यूरोपीय मुद्रा बाजार में इस सप्ताह की शुरुआत जोरदार हलचल के साथ हुई है, जहां साझा मुद्रा यूरो ने कई प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले बढ़त हासिल की है। अक्टूबर महीने के दौरान जर्मनी के कारोबारी माहौल को मापने वाले आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स में आई तेज छलांग ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। यह सूचकांक उछलकर अपने तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था को लेकर लंबे समय से बनी चिंताएं कुछ हद तक दूर हुई हैं। आर्थिक उम्मीदों में आए इस उल्लेखनीय सुधार ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को लेकर निवेशकों और कारोबारियों के बीच बने असंतोष और गिरावट के असर को पूरी तरह बेअसर कर दिया है। इसी तेजी के दम पर यूरो बनाम ब्रिटिश पाउंड जोड़ी ने अपनी पुरानी गिरावट की भरपाई की और सत्र के उच्च स्तर 0.8400 के दायरे को छू लिया।
फ्रांस की रेटिंग पर मूडीज के फैसले से राहत
यूरो को मजबूती देने में केवल जर्मनी के आंकड़े ही शामिल नहीं थे, बल्कि फ्रांस को लेकर आई एक बड़ी वित्तीय खबर ने भी बाजार की धारणा सुधारने में अहम भूमिका निभाई। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने फ्रांस की सॉवरेन डेट रेटिंग को बिना किसी बदलाव के Aa3 पर बरकरार रखा है। बाजार पहले से ही देश पर बढ़ते कर्ज के भारी बोझ और हालिया सामाजिक अशांति को देखते हुए रेटिंग में कटौती की आशंका जता रहा था। पिछले सप्ताहांत फ्रांस के अधिकांश प्रमुख शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिससे राजनीतिक और राजकोषीय अस्थिरता की चिंताएं गहरा गई थीं। इसके बावजूद रेटिंग न घटने के फैसले का वित्तीय बाजारों ने व्यापक स्वागत किया। इस घोषणा के बाद फ्रांस के 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल 5% के स्तर से नीचे आ गया, हालांकि बाद में सोमवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान इसमें से कुछ लाभ कम भी हुआ।
अमेरिकी डॉलर में बिकवाली से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन को मिला सहारा
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना रहा। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई और गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई हल्की नरमी ने डॉलर की तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबरने की कोशिशों को रोक दिया। इस माहौल में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी पूरे एशियाई सत्र के दौरान 0.7000 के स्तर से ऊपर टिकी रही और सोमवार को पहले छुए गए एक महीने के उच्च स्तर के करीब कारोबार करती दिखी। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को लगातार समर्थन दे रही हैं, हालांकि मंगलवार से शुरू हो रही दो दिवसीय अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले यह बढ़त सीमित दायरे में नजर आई।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी में भी सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान नए सिरे से बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार को 18 सितंबर के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़कने के बाद यह जोड़ी वहां से संभलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी के कारण यह रिकवरी रुक गई। इसके अतिरिक्त, बैंक ऑफ जापान के सख्त मौद्रिक रुख के संकेतों ने जापानी मुद्रा येन को अतिरिक्त मजबूती दी, जिससे इस मुद्रा जोड़ी पर लगातार दबाव बना रहा। हालांकि, इस सप्ताह के उत्तरार्ध में होने वाली अमेरिकी फेड और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों के मद्देनजर ट्रेडर्स किसी बड़े आक्रामक दांव से बचते दिखे, जिससे गिरावट की सीमा सीमित रही।
सोने में हल्की बढ़त और कार्डानो पर चौतरफा दबाव
कमजोर अमेरिकी डॉलर के बीच सोने की कीमतों ने अपने तीन महीने के निचले स्तर के आसपास से मामूली सुधार दर्ज किया। पीली धातु सोमवार के एशियाई सत्र के दौरान 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर कारोबार करती दिखी। भू-राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई की संभावना को खारिज करने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिसका असर सुरक्षित संपत्तियों पर भी पड़ा। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर किसी भी जल्दबाजी का संकेत नहीं दिया है, जिससे सोने को कुछ स्थिरता मिली।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में स्थिति काफी कमजोर बनी रही, जहां कार्डानो में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। अक्टूबर की शुरुआत से लगातार तीन हफ्तों तक 20% से अधिक की गिरावट झेलने के बाद यह डिजिटल टोकन 0.202 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया। डेरिवेटिव्स संकेतकों की कमजोरी, मंदी के संकेत देने वाले ऑन-चेन डेटा और बिगड़ते तकनीकी परिदृश्य के चलते कार्डानो पर बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है। डेरिवेटिव्स बाजार का रुख स्पष्ट रूप से गिरावट की तरफ झुका हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में और नुकसान का जोखिम बना हुआ है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और मौद्रिक नीति का भविष्य
अमेरिकी डॉलर अब 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है। वित्तीय बाजार अभी से यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण को लेकर होने वाली चुनावी लड़ाई राजकोषीय नीति की भावी दिशा बदल सकती है। इस राजनीतिक बदलाव का सीधा असर अप्रत्यक्ष रूप से 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति के रास्ते पर भी पड़ सकता है, जिसके चलते आने वाले हफ्तों में वैश्विक मुद्राओं में तेज उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है।

















