त्रिपुरा में बिजली की बढ़ती खपत और प्राकृतिक गैस के घटते भंडार के बीच ऊर्जा मंत्री रतन लाल नाथ ने अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने खासकर रूफटॉप सोलर को तेजी से अपनाने पर जोर दिया है ताकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके और राज्य पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम किया जा सके।
अमर्त्तला में हुई विशेष बैठक
अगरतला म्युनिसिपल कॉरपोरेशन कॉन्फ्रेंस हॉल में सोमवार को एक विशेष काउंसिल मीटिंग का आयोजन किया गया था। इस बैठक के दौरान यूएलए मॉडल के तहत रूफटॉप सोलर प्लांट्स स्थापित किए जाने की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए रतन लाल नाथ ने कहा कि सरकार की यह स्पष्ट प्रतिबद्धता है कि विकास कार्यों और योजनाओं का लाभ समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचना चाहिए।
बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा
मंत्री ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने से पहले त्रिपुरा में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगभग सात लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 10.68 लाख हो गई है। उपभोक्ताओं की इस बड़ी संख्या में से चार लाख से अधिक ऐसे परिवार हैं जो हर महीने 50 यूनिट या उससे कम बिजली की खपत करते हैं। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि राज्य के एक बहुत बड़े हिस्से में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निवास करते हैं.
कमजोर वर्गों को राहत देने की तैयारी
बढ़ती बिजली मांग और भविष्य में दरों में किसी भी संभावित बढ़ोतरी से इन गरीब परिवारों को बचाने के लिए सरकार एक खास मैकेनिज्म पर काम कर रही है। मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य के हर हिस्से में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना बेहद जरूरी है। उद्योगों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और कचरा प्रबंधन सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के सुचारू संचालन के लिए बिजली एक अनिवार्य आवश्यकता है। बिजली की बढ़ती खपत को देखते हुए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें पावर सेक्टर को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से गंभीर हैं।
गैस आधारित उत्पादन पर असर
रतन लाल नाथ ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि त्रिपुरा में बिजली उत्पादन मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। हालांकि, प्राकृतिक गैस की उपलब्धता लगातार कम हो रही है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर राज्य के प्रमुख बिजली संयंत्रों के उत्पादन पर पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर, पलताना पावर प्लांट की मूल रूप से करीब 700 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता थी, लेकिन गैस की सीमित सप्लाई के कारण यह संयंत्र वर्तमान में केवल लगभग 500 मेगावाट बिजली ही उत्पादित कर पा रहा है।
अन्य संयंत्रों की स्थिति और सोलर का विकल्प
इसी तरह, रामचंद्रनगर पावर प्लांट से लगभग 100 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा समय में यह संयंत्र केवल 50 से 60 मेगावाट बिजली ही पैदा कर रहा है। इन तमाम चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार सोलर और हाइड्रोपवर जैसे रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। मंत्री ने याद दिलाया कि पारंपरिक कोयला और गैस आधारित बिजली उत्पादन के विपरीत सोलर, विंड और हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते हैं और पूरी तरह से स्वच्छ ऊर्जा का साधन हैं।



















