महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा विमल इलायची के विज्ञापनों के सिलसिले में बॉलीवुड के जाने-माने कलाकारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस भेजे जाने के बाद इस पूरे प्रकरण पर विभाग के कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर से बेहद कड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने अपनी बात में बिल्कुल साफ कर दिया है कि कानून का पालन कराने के मामले में किसी भी तरह की रियायत नहीं बरती जाएगी और इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हर एक व्यक्ति पर नियम समान रूप से लागू होंगे।
खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से हो रहा पालन
तुकाराम मुंढे ने एक बातचीत के दौरान मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह पूरा कदम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस के प्रावधानों को पूरी सख्ती के साथ लागू करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इन नियमों का एक सबसे अहम हिस्सा विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की सत्यता और भ्रामक प्रचार पर रोक से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, जिस तरह से विमल ब्रांड का यह प्रचार सामने आया है, उसे देखकर पहली नजर में यही प्रतीत होता है कि यह किसी प्रतिबंधित उत्पाद यानी गुटखा या पान मसाला का परोक्ष विज्ञापन यानी सरोगेट एड है। कमिश्नर ने दो टूक शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि कानून की नजर में हर नागरिक बराबर है और इस विज्ञापन से जुड़ी पूरी श्रृंखला में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
नोटिस में दिए गए हैं कड़े कानूनी प्रावधानों के हवाले
जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, तीनों फिल्मी सितारों शाहरुख खान, टाइगर श्रॉफ और अजय देवगन को भेजे गए आधिकारिक नोटिस में इस बात का खास तौर पर जिक्र किया गया है कि प्राथमिक जांच के दौरान यह बात खुलकर सामने आई है कि यह विज्ञापन सीधे तौर पर विमल ब्रांड का प्रचार कर रहा है, जिसकी पहचान मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ी है। इस मामले में यह भी उल्लेखनीय है कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त महाराष्ट्र द्वारा 13 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। इस आदेश के तहत खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम की धारा 30(2)(a) का इस्तेमाल करते हुए पूरे राज्य की सीमाओं के भीतर पान मसाला के निर्माण, उसके भंडारण, एक जगह से दूसरी जगह परिवहन, वितरण और उसकी कुल बिक्री पर पूरे एक साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
नियम तोड़ने वालों को मिलेगा कारण बताओ नोटिस
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए एफडीए कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि जो भी लोग इन तय किए गए नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए जाएंगे, उन सभी विज्ञापनदाताओं को विभाग की तरफ से औपचारिक रूप से कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। इस नोटिस के जरिए उनसे यह जवाब तलब किया जाएगा कि आखिर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पूरी व्यवसायिक श्रृंखला में हिस्सेदार हर एक व्यक्ति अपनी इस हरकत के लिए पूरी तरह से जवाबदेह है। यह कानून ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक में रहने वाले हर इंसान पर एक समान रूप से लागू होता है। चाहे कोई व्यक्ति ऐसे उत्पादों का निर्माण कर रहा हो, उनका भंडारण कर रहा हो, उनकी बिक्री में जुटा हो या फिर उनकी प्रोसेसिंग कर रहा हो, इस सख्त कार्रवाई के दायरे से कोई भी बाहर नहीं बच पाएगा।
विज्ञापनों और जुर्माने को लेकर एफडीए का सख्त रुख
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ अपनी इस मुहिम को और अधिक तेज कर दिया है। विभाग ने इस कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 की धारा 24 का भी विशेष रूप से हवाला दिया है। यह धारा किसी भी खाद्य पदार्थ के सिलसिले में किए जाने वाले भ्रामक या ग्राहकों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगाने का अधिकार देती है। इसके साथ ही, एफडीए ने इसी अधिनियम की धारा 53 का भी जिक्र करते हुए यह चेतावनी दी है कि ऐसे गुमराह करने वाले विज्ञापनों या प्रचार अभियानों में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति पर 10 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है। राज्य भर में खाद्य सुरक्षा के इन मानकों को पूरी कठोरता के साथ लागू करने के लिए प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा यह व्यापक अभियान उसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



















