त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी के बाजारों में रौनक लौटने लगी है, लेकिन विरोध-प्रदर्शनों की वजह से होने वाले व्यवधान ने दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। नवरात्रि, रामलीला और दीपावली के इस व्यस्त कारोबारी समय में दिल्ली के व्यापारी अब किसी भी आंदोलन के दबाव में अपने प्रतिष्ठान बंद रखने को तैयार नहीं हैं। व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को औपचारिक पत्र भेजकर बाजारों और दुकानदारों के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठाई है। उनका स्पष्ट रुख है कि साल के सबसे बड़े बिक्री सीजन को धरना-प्रदर्शनों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जा सकता।
बाजारों और दुकानदारों के लिए सुरक्षा की पुख्ता मांग
व्यापारिक संगठन ने पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि शहर के सभी प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े और पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। पुलिस आयुक्त को लिखे संदेश में कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे व्यापारी किसी भी तरह के भय या आशंका के बिना अपनी दुकानें खोल सकें और ग्राहक भी बेखौफ खरीदारी कर सकें। संगठन का जोर इस बात पर है कि कानून-व्यवस्था की बहाली के साथ ही वाणिज्यिक गतिविधियों का निर्बाध संचालन भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए, ताकि खुदरा और थोक दोनों स्तरों पर भरोसा बना रहे।
हालिया प्रदर्शन से 2,000 करोड़ रुपये के नुकसान का हवाला
व्यापारिक प्रतिनिधियों ने पिछले घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए बताया कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में सुरक्षा पाबंदियां लगानी पड़ीं और जबरन बाजार बंद कराने की नौबत आई। संगठन का आकलन है कि उस अकेले दिन के व्यवधान से शहर में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिसका सीधा असर 20 लाख से अधिक छोटे और बड़े व्यापारियों की आजीविका पर पड़ा। व्यापारियों का कहना है कि पूरे वर्ष इस सीजन की प्रतीक्षा की जाती है, क्योंकि इसी दौरान उपभोक्ता खर्च चरम पर होता है और इन्वेंट्री खाली होती है। ऐन वक्त पर सड़कें जाम होने या बाजार बंद होने से कारोबारियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ जाता है।
राजनीतिक दलों से दिवाली तक दूसरे शहरों में जाने की अपील
आर्थिक नुकसान की आशंका को देखते हुए संगठन ने कॉकरोच जनता पार्टी समेत सभी सियासी दलों से विशेष गुहार लगाई है। व्यापारियों ने अपील की है कि दीपावली का पर्व संपन्न होने तक दिल्ली के भीतर धरने या प्रदर्शन आयोजित करने से परहेज किया जाए। संगठन ने राजनीतिक रणनीतिकारों को सुझाव दिया है कि यदि अपने मुद्दों पर आंदोलन करना अत्यंत अनिवार्य हो, तो उसके लिए राजधानी के बजाय किसी अन्य शहर का चयन किया जाए, जिससे दिल्ली के त्योहारी जनजीवन और बाजार व्यवस्था पर विपरीत असर न पड़े।
सैकड़ों रामलीलाओं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर प्रभाव की चेतावनी
व्यापारियों ने यह पहलू भी रेखांकित किया कि दिल्ली में करीब 650 रामलीलाओं का मंचन होता है, जिनके आयोजनों से लाखों कामगारों, कलाकारों और स्थानीय विक्रेताओं को अस्थायी रोजगार मिलता है। यदि विरोध-प्रदर्शनों के चलते मुख्य मार्गों पर अवरोध उत्पन्न होते हैं या मेट्रो स्टेशनों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इन सांस्कृतिक आयोजनों में दर्शकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली पूरे देश का एक प्रमुख वितरण केंद्र है, जहां से थोक माल अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी भेजा जाता है। ऐसे में त्योहारी महीनों में व्यापारिक आवाजाही सुचारु रहना न केवल दुकानदारों बल्कि आम उपभोक्ताओं और आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी बेहद आवश्यक है।


















