आगामी त्योहारी सीजन के दौरान अपने घर के लिए नए उपकरण खरीदने की योजना बना रहे परिवारों को अपने बजट में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियां कीमतों में एक और बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं। उद्योग के प्रमुख ब्रांड्स दशहरा और दिवाली के मुख्य त्योहारी सीजन से ठीक पहले कीमतों में संशोधन की योजना बना रहे हैं। इस मूल्य वृद्धि में सबसे आगे एयर कंडीशनर (AC) रहने की उम्मीद है, जिसमें सबसे बड़ी वृद्धि देखी जा सकती है। इसके अलावा TV, वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर जैसी अन्य श्रेणियों के उपकरणों के दाम भी बढ़ेंगे। कंपनियां विनिर्माण लागत और वैश्विक लॉजिस्टिक्स के खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि से निपटने के लिए यह कदम उठा रही हैं।
जो ग्राहक त्योहारी सीजन में मिलने वाले ऑफर्स और डिस्काउंट के भरोसे नया AC, रेफ्रिजरेटर या स्मार्ट TV खरीदने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए ये नई कीमतें बजट को प्रभावित कर सकती हैं। कई प्रमुख कंपनियों द्वारा आने वाले हफ्तों में कीमतों में 5% से 8% तक की बढ़ोतरी करने की योजना है। यह मूल्य वृद्धि विशेष रूप से उन श्रेणियों में अधिक होगी जो वर्तमान में कच्चे माल की भारी महंगाई का सामना कर रही हैं। हालांकि त्योहारी सीजन के दौरान रिटेलर्स द्वारा कुछ डिस्काउंट और फाइनेंसिंग स्कीम्स की पेशकश की जा सकती है, लेकिन वे बढ़ी हुई आधार कीमतों के प्रभाव को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर पाएंगी।
त्योहारी सीजन का महत्व और कंपनियों की चुनौती
कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय में आ रहा है जो इन कंपनियों के वार्षिक बिक्री चक्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत में त्योहारी खरीदारी की शुरुआत दक्षिण में ओणम के त्योहार से होती है और यह शरद ऋतु में दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली तक चलती है। यह समय घरेलू उपकरण निर्माताओं के लिए पूरे साल का सबसे बड़ा और सबसे अधिक कमाई वाला समय होता है। उद्योग के अनुमान बताते हैं कि यह त्योहारी अवधि इन कंपनियों की कुल वार्षिक बिक्री में लगभग 30% से 40% तक का योगदान देती है। इस कारण से, कीमतों में कोई भी बदलाव कंपनियों और ग्राहकों दोनों के लिए बहुत संवेदनशील होता है।
बिक्री की इस बड़ी हिस्सेदारी के कारण, विनिर्माता आमतौर पर इस अवधि के दौरान कीमतों को स्थिर रखना पसंद करते हैं ताकि वे अधिक से अधिक ग्राहकों को आकर्षित कर सकें और बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकें। हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण उनके पास अब बहुत सीमित विकल्प बचे हैं। इस महत्वपूर्ण मांग वाले सीजन में अपने मुनाफा मार्जिन को दांव पर लगाना कंपनियों के लिए संभव नहीं है। इसके परिणामस्वरूप, ग्राहकों को अब गर्मियों या मानसून के शुरुआती महीनों की तुलना में अधिक कीमतों का सामना करना पड़ेगा।
कच्चे माल की महंगाई और तांबे का संकट
कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पिछले एक साल में वैश्विक स्तर पर कच्चे माल की कीमतों में आया उछाल है। कूलिंग और हीटिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनियों के लिए तांबा एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। तांबे के अलावा अन्य आवश्यक वस्तुएं जैसे स्टील, एल्युमिनियम और प्लास्टिक पॉलिमर भी लगातार महंगे हुए हैं, जिससे सभी श्रेणियों के उपकरणों की विनिर्माण लागत बढ़ गई है। इसके साथ ही, वैश्विक माल ढुलाई की बढ़ी हुई दरें और आयातित इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों की उच्च लागत ने इस स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
घरेलू उपकरणों में एयर कंडीशनर की निर्माण लागत पर सबसे अधिक दबाव देखा जा रहा है क्योंकि इसके विनिर्माण में तांबे का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। AC के कंडेनसर कॉइल, इवेपोरेटर ट्यूब और बिजली के तारों में तांबे की खपत बहुत अधिक होती है। इस निर्भरता के कारण, वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतों में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर AC की अंतिम खुदरा कीमत पर पड़ता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तांबे के दाम बढ़ते हैं, तो कंपनियों के पास कीमतों को संशोधित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।
तांबे की इस महंगाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल तांबा लगभग 8,000 USD से 9,000 USD प्रति मीट्रिक टन के बीच कारोबार कर रहा था। हाल के समय में इसकी कीमत बढ़कर लगभग 14,500 USD प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। चूंकि एक सामान्य स्प्लिट या विंडो AC को बनाने में लगभग 3 से 4 किलोग्राम तांबे का उपयोग होता है, इसलिए उत्पाद की अंतिम कीमत सीधे तौर पर तांबे के अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ी होती है।
विभिन्न कंपनियों की मूल्य वृद्धि और समय सीमा
इन बढ़ती लागतों के जवाब में हायर इंडिया ने अपनी मूल्य निर्धारण रणनीति तैयार की है। कंपनी 1 अक्टूबर से अपने रूम AC की कीमतों में लगभग 5% की बढ़ोतरी लागू करने की योजना बना रही है। हायर इंडिया के अध्यक्ष एनएस सतीश ने संकेत दिया है कि कंपनी स्थिति की समीक्षा करेगी और दिवाली के बाद कीमतों में एक और बदलाव पर विचार कर सकती है। यदि कच्चे माल और वैश्विक लॉजिस्टिक्स की लागत ऊंची बनी रहती है, तो जनवरी में एक और मूल्य वृद्धि की जा सकती है। LED टेलीविजन और वाशिंग मशीन जैसे अन्य लोकप्रिय उपकरणों के लिए हायर इंडिया 2% से 3% की मामूली बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।
कुछ ब्रांड्स जहां कीमतों में बदलाव के लिए अक्टूबर का इंतजार कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य कंपनियों ने पहले ही अपनी कीमतें बढ़ा दी हैं। डायकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया ने 16 सितंबर से अपने AC उत्पादों की कीमतों में लगभग 8% से 10% की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के पीछे एक और बड़ा कारण मुद्रा विनिमय दर है क्योंकि यह उद्योग आयातित पुर्जों पर अत्यधिक निर्भर है, जिनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजारों के अनुसार तय होती हैं। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से इन पुर्जों को आयात करने की रुपये में लागत बढ़ जाती है, जिससे मुनाफा मार्जिन और घट जाता है।
इसी तरह ब्लू स्टार ने भी अपने एयर कंडीशनर और डीप फ्रीजर के पोर्टफोलियो में कीमतें बढ़ा दी हैं। ब्लू स्टार के प्रबंध निदेशक बी त्यागराजन ने पुष्टि की है कि कंपनी ने कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण कीमतों में 5% से 8% की बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि इस साल AC की कीमतें पिछले साल के त्योहारी सीजन की तुलना में लगभग 15% अधिक हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राहकों को GST से मिलने वाले लगभग 10% के इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ से इस मूल्य वृद्धि का बोझ कुछ हद तक कम हो सकता है।
संपूर्ण गृह उपकरण क्षेत्र पर महंगाई का प्रभाव
यह मूल्य वृद्धि केवल कूलिंग उत्पादों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य श्रेणियों के उपकरण भी इसकी चपेट में हैं। वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर के ड्रम और ढांचा बनाने के लिए स्टील और एल्युमिनियम मुख्य कच्चे माल हैं, जबकि प्लास्टिक रेजिन का उपयोग पुर्जों, अलमारियों और पैकेजिंग सामग्री में बड़े पैमाने पर किया जाता है। वैश्विक शिपिंग दरों और घरेलू परिवहन खर्चों में बढ़ोतरी ने इस वितरण नेटवर्क की कुल लागत को और बढ़ा दिया है।
गोदरेज अप्लायंसेज, हायर इंडिया, डायकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया, ब्लू स्टार और सुपर प्लास्ट्रोनिक्स जैसी प्रमुख कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपकरणों की अलग-अलग श्रेणियों में कीमतों में बढ़ोतरी अपरिहार्य हो गई है। पैनासोनिक अभी बाजार की स्थिति का विश्लेषण कर रही है और उसके बाद ही कीमतों में बदलाव का कोई अंतिम फैसला लेगी। दूसरी ओर, उद्योग के सूत्रों का कहना है कि एलजी और बॉश होम कम्फर्ट (जो हिताची ब्रांड के AC का संचालन करती है) जैसी बड़ी कंपनियों ने भी बढ़ती लागतों के कारण अपने AC की कीमतों में करीब 5% की वृद्धि कर दी है।
खुदरा दुकानों में ग्राहकों को मिलने वाली अंतिम कीमत कई बातों पर निर्भर करेगी। इनमें कंपनियों के पास मौजूद कच्चे माल का पुराना स्टॉक, उनके पुर्जों के आयात की आवश्यकता और विनिर्माताओं द्वारा लागत का खुद वहन करने की क्षमता शामिल है। ग्राहकों के लिए इस बढ़ोतरी के प्रभाव को कम करने का एकमात्र तरीका समय से पहले खरीदारी करना या त्योहारी सीजन के शुरुआती क्रेडिट कार्ड ऑफर्स और रिटेल डील्स का लाभ उठाना हो सकता है।

















