त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश भर के उपभोक्ताओं को एक बड़ा झटका लगने वाला है। घर के लिए एयर कंडीशनर (एसी), एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। देश की प्रमुख उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते अपने उत्पादों के दाम 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह बढ़ोतरी 1 अक्टूबर से प्रभावी होने जा रही है। कंपनियों का कहना है कि तांबा, एल्युमिनियम और स्टील जैसी बुनियादी धातुओं की कीमतों में लगातार आ रही तेजी के कारण उनके पास कीमतों को बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी उछाल
घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। केवल कच्चे माल की कीमतें ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर माल ढुलाई यानी फ्रेट चार्ज में हुई बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी विनिर्माण लागत को काफी बढ़ा दिया है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने आयातित पुर्जों को और अधिक महंगा बना दिया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों के अनुसार, चालू कैलेंडर वर्ष में यह तीसरा मौका होगा जब उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को इन बाहरी आर्थिक कारकों के कारण अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।
डाइकिन ने सितंबर के मध्य से ही बढ़ाई कीमतें
कीमतें बढ़ाने की इस रेस में कुछ कंपनियों ने पहले ही कदम उठा लिए हैं। डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कंवलजीत जावा ने साझा किया कि कंपनी ने 16 सितंबर से ही अपने उत्पादों की कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे की कीमतों में लगभग 25 से 35 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है। इसके साथ ही डॉलर की मजबूती ने घरेलू विनिर्माताओं पर लागत का भारी दबाव बना दिया है, जिससे कीमतों में तत्काल संशोधन करना जरूरी हो गया था।
कच्चे माल की कीमतों का सीधा गणित
हायर इंडिया के अध्यक्ष एन.एस. सतीश ने विनिर्माण के इस गणित को समझाते हुए बताया कि तांबे की कीमत पिछले साल के लगभग 8,000 से 9,000 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अब तकरीबन 14,500 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई है। चूंकि एक सामान्य एयर कंडीशनर के निर्माण में औसतन 3 से 4 किलोग्राम तांबे का उपयोग होता है, इसलिए तांबे की कीमतों में हुई इस अभूतपूर्व वृद्धि का सीधा असर एसी की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। हायर इंडिया भी आगामी 1 अक्टूबर से अपने एसी मॉडल्स की कीमतों में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि करने जा रही है, जबकि एलईडी टीवी और वॉशिंग मशीन की कीमतों में भी 2 से 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कच्चे माल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो दिसंबर और जनवरी के महीनों में कीमतों में एक और दौर की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
उद्योग जगत के अन्य दिग्गजों का रुख
एलजी और बॉश होम कम्फर्ट (जो हिताची ब्रांड के एयर कंडीशनर का विपणन करती है) जैसी बड़ी कंपनियों ने भी एसी की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। दूसरी ओर, पैनासोनिक जैसी कुछ कंपनियां अभी बाजार की स्थिति और उपभोक्ता मांग का बारीकी से आकलन कर रही हैं और कीमत बढ़ाने को लेकर जल्द ही कोई अंतिम निर्णय ले सकती हैं।
ब्लू स्टार के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. त्यागराजन ने बताया कि लगातार बढ़ती कमोडिटी कीमतों के कारण कंपनी अपने एसी और डीप फ्रीजर की कीमतों में पहले ही 5 से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि कर चुकी है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि स्टील, तांबा और प्लास्टिक की बढ़ती लागत की वजह से कंपनी को इस साल तीन बार कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के बिजनेस हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट कमल नंदी ने भी इस चिंता को दोहराया है। उनका कहना है कि पिछली बार की गई कीमतों की समीक्षा के बाद से कमोडिटी की लागत में फिर से 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस अंतर को पाटने के लिए विभिन्न श्रेणियों में 5 से 7 प्रतिशत तक की मूल्य वृद्धि करना बेहद आवश्यक हो गया है। हालांकि, उन्होंने उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत देते हुए कहा कि पुराने दामों पर खरीदा गया डीलर स्टॉक बाजार में अगले एक से डेढ़ महीने तक उपलब्ध रहेगा, जिससे शुरुआती खरीदारों को पुरानी कीमतों का लाभ मिल सकता है।
त्योहारी मांग और कंपनियों के सामने चुनौती
भारतीय उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के लिए ओणम से शुरू होकर दशहरा और दिवाली तक चलने वाला त्योहारी सीजन बेहद महत्वपूर्ण होता है। घरेलू कंपनियों की कुल वार्षिक बिक्री का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा इसी अवधि के दौरान आता है। ऐसे में त्योहारी मांग के चरम पर होने के समय कीमतों में बढ़ोतरी करना कंपनियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इससे त्योहारी सीजन के दौरान बिक्री की रफ्तार प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। कुछ उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का असर शुरुआती तौर पर सीमित रहेगा, क्योंकि डीलरों के पास पुराना स्टॉक मौजूद है, लेकिन त्योहारी सीजन के उत्तरार्ध में उपभोक्ताओं को महंगे दामों का सामना करना ही पड़ेगा।


















