मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए तैयार हो रहा उज्जैन-गरोठ फोर-लेन लिंक एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। यह नया 136 किलोमीटर लंबा मार्ग देश के सबसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को सीधे भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन से जोड़ने का काम करेगा। लगभग 2,600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार हो रहे इस हाईवे का आधिकारिक नाम एनएच-752डी है, जिसके शुरू होने से उत्तर भारत और पश्चिमी भारत के कई प्रमुख शहरों से उज्जैन तक की यात्रा बेहद सुगम हो जाएगी।
गरोठ में होगा मुख्य कॉरिडोर से सीधा जुड़ाव
इस फोर-लेन लिंक एक्सप्रेसवे का आरंभ उज्जैन शहर से होता है और यह मंदसौर जिले के गरोठ कस्बे तक जाता है। गरोठ के समीप ही यह खंड सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के मुख्य अलाइनमेंट से मिल जाता है। इस कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि दिल्ली की दिशा से आने वाले अथवा मुंबई और गुजरात की ओर से सफर करने वाले यात्री बिना किसी रुकावट या शहर के अंदरूनी ट्रैफिक में फंसे सीधे उज्जैन पहुंच सकेंगे। एनएचएआई का लक्ष्य शेष बचे 10 प्रतिशत काम को तेजी से निपटाकर इस पूरे रूट को जल्द से जल्द आम जनता और वाहन चालकों के आवागमन के लिए खोलना है।
सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत
प्रशासन और राजमार्ग प्राधिकरण की विशेष प्राथमिकता यह है कि इस पूरे मार्ग को वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले विराट सिंहस्थ कुंभ मेले से काफी पहले पूरी तरह चालू कर दिया जाए। कुंभ मेले के दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान रहता है, ऐसे में यह लिंक एक्सप्रेसवे एक मजबूत जीवनरेखा साबित होगा। विशेष रूप से गुजरात के यात्रियों को इसका बड़ा लाभ मिलने जा रहा है। वर्तमान में अहमदाबाद से उज्जैन तक सड़क मार्ग से सफर तय करने में लगभग 10 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन इस नए रास्ते के जरिए यह यात्रा अवधि घटकर मात्र 4 घंटे रह जाएगी, यानी पूरे 6 घंटे की सीधी बचत होगी। अपनी 136 किलोमीटर की दूरी के दौरान यह मार्ग करीब 8 जिलों से कनेक्टिविटी स्थापित करेगा, जिससे मध्य प्रदेश के आंतरिक क्षेत्रों का संपर्क दिल्ली और मुंबई दोनों महानगरों से मजबूत होगा।
मालवा के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स परिदृश्य में बदलाव
यह लिंक एक्सप्रेसवे केवल धार्मिक यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की संपूर्ण अर्थव्यवस्था को एक नया आधार देने जा रहा है। मालवा का इलाका अब तक अपनी पूरी आर्थिक क्षमता का दोहन नहीं कर पाया था, लेकिन दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से सीधा संपर्क मिलने के बाद यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में उछाल आने की उम्मीद है। एनएचएआई का मानना है कि इस मार्ग से मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के बीच माल ढुलाई और व्यापारिक आवाजाही तेज होगी। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों के लिए नए व्यापारिक रास्ते खुलेंगे, जिससे मालवा क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के नए अवसर तैयार होंगे।

















