बिहार में छठ महापर्व के आगमन के साथ ही चारों तरफ पारंपरिक और भक्तिमय गीतों की स्वर लहरियां गूंजने लगी हैं। इस पावन अवसर पर राज्य के कलाकार हर साल नए भक्ति गीतों की रचना करते हैं, जो लोक आस्था के माहौल को और भी गहरा बना देते हैं। इसी कड़ी में जहानाबाद जिले की रहने वाली लोक गायिका सोनम श्री इस बार के छठ पर्व पर अपना नया गीत लेकर आ रही हैं। उनके नए गीत के बोल हैं, केकर लाली लाली अंखिया केकर लंबी लंबी केस। यह प्रस्तुति छठ पूजा से ठीक पहले श्रोताओं के बीच जारी की जा रही है।
पारंपरिक छठ गीतों से लेकर सरकारी आयोजनों तक का सफर
सोनम श्री इससे पहले भी कई छठ गीतों को अपनी आवाज दे चुकी हैं। वह केवल पारंपरिक छठ गीत ही नहीं गातीं, बल्कि लोकगीतों सहित विभिन्न शैलियों के गायन में अपनी विशेष पहचान बना चुकी हैं। आज वह निजी कार्यक्रमों के साथ साथ विभिन्न सरकारी आयोजनों और सांस्कृतिक उत्सवों में लगातार अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं। अपनी संगीत यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए वह बताती हैं कि कुछ समय पहले देवघर में आयोजित श्रावणी महोत्सव के दौरान उन्होंने पूरे एक महीने तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लगातार प्रस्तुतियां दी थीं। वर्तमान में उनकी व्यस्तता इतनी बढ़ चुकी है कि उन्हें घर पर आराम से बैठने का समय भी मुश्किल से मिल पाता है।
सहेली के साथ मंच पर जाने से हुई गायन की शुरुआत
सोनम श्री की संगीत यात्रा बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रही है। उनके इस सफर की शुरुआत काफी अप्रत्याशित तरीके से हुई थी। उनकी एक सहेली डांसर थीं, जिनके कहने पर सोनम एक दिन उनके साथ एक स्टेज कार्यक्रम में चली गईं। वह पूरी रात वहीं रुकी रहीं। कार्यक्रम जब अपने समापन की ओर था, तब वहां मौजूद म्यूजिकल ग्रुप के सामने सोनम के हाथ में माइक थमा दिया गया। पहली बार मंच पर माइक हाथ में लेते ही उनके हाथ कांपने लगे थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और किसी तरह एक गाना गाया। उस पहले ही गीत को श्रोताओं और आयोजकों से खूब सराहना व प्यार मिला, और यहीं से उनके पेशेवर गायन की नींव पड़ी।
पारिवारिक विरोध, सामाजिक ताने और आर्थिक तंगी की चुनौती
मंच पर पहला मौका मिलने के बाद आगे का रास्ता बेहद कठिन साबित हुआ। जब उनके परिवार को स्टेज पर गाने की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। परिवार के सदस्य इस काम को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे। इतना ही नहीं, समाज के लोगों ने भी उन्हें नचनिया कहकर ताने मारने शुरू कर दिए। विरोध और सामाजिक दबाव इस हद तक बढ़ गया कि उन्हें अपने घर से अलग होकर रहने तक के लिए विवश होना पड़ा। अपने आत्मसम्मान और कला के दम पर उन्होंने इस अकेले सफर में कभी हिम्मत नहीं हारी।
ब्यूटिशियन की नौकरी और चार साल की कठिन तपस्या
शुरुआती दौर में मंचों पर गाने के बदले पैसे नहीं मिलते थे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी। जीवनयापन और घर का खर्च चलाने के लिए उन्होंने अपने ब्यूटिशियन के हुनर का सहारा लिया। सोनम ने एक जगह ब्यूटिशियन की नौकरी शुरू की, जिससे मिलने वाले थोड़े बहुत पैसों से किसी तरह उनका गुजारा चलने लगा। उनकी गायिकी का यह औपचारिक सफर 2018 में शुरू हुआ था। इसके बाद करीब 3 से 4 वर्षों की अनवरत मेहनत और लगन ने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी। आज वह संगीत विषय में अपनी पढ़ाई भी आगे बढ़ा रही हैं और कई बड़े मंचों पर लोकगीत व अन्य विविध शैलियों के गीतों की सफल प्रस्तुतियां दे रही हैं।


















