दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक रविवार, 1 नवंबर को अपने गठन की 71वीं वर्षगांठ पूरे उत्साह के साथ मनाने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर के उपलक्ष्य में प्रांतीय प्रशासन ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले 71 गणमान्य व्यक्तियों को प्रतिष्ठित राज्योत्सव पुरस्कार 2026 से सम्मानित करने की आधिकारिक घोषणा की है। इस विशेष दिन समूचे राज्य में सरकारी अवकाश रहता है, जहां जनमानस अपनी भाषाई विरासत, गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का उत्सव मनाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और नामकरण का सफर
कन्नड़ भाषी क्षेत्रों के एकीकरण का यह सफर दशकों लंबे जनसंघर्ष और भाषाई चेतना का परिणाम रहा है। वर्ष 1956 में 1 नवंबर की ऐतिहासिक तारीख को विभिन्न रियासतों तथा प्रांतों में बिखरे हुए कन्नड़ भाषा बोलने वाले इलाकों को मिलाकर एक अलग प्रशासनिक इकाई का गठन किया गया था। आरंभिक दौर में इस नवगठित प्रांत को मैसूर राज्य के नाम से पहचाना जाता था। कालांतर में क्षेत्रीय जनभावनाओं और भाषाई स्वाभिमान को पूर्ण अभिव्यक्ति देने के उद्देश्य से 1 नवंबर 1973 को आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया। तब से लेकर आज तक प्रतिवर्ष इस दिन को स्थापना दिवस के तौर पर बेहद भव्य रूप से मनाया जाता है।
प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान और प्रमुख हस्तियां
वार्षिक उत्सव की पूर्व संध्या पर 30 अक्टूबर को राज्य सरकार की ओर से चुनी गई 71 विशिष्ट प्रतिभाओं के नामों की घोषणा की गई। कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदागी ने इस आधिकारिक चयन सूची की पुष्टि की। प्रांतीय व्यवस्था के तहत यह दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है। इस प्रतिष्ठित प्रशस्ति के अंतर्गत चयनित होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 5 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है, जिसके साथ 25 ग्राम वजन का शुद्ध सोने का पदक भी औपचारिक तौर पर सौंपा जाता है।
इस वर्ष सम्मानित होने वाली विभूतियों में कानून, कला, पत्रकारिता, साहित्य, सार्वजनिक सेवा और सिनेमा जगत के कई दिग्गज नाम सम्मिलित हैं। प्रमुख नामों में पूर्व महाधिवक्ता बी.वी. आचार्य, पारंपरिक यक्षगान विधा के प्रसिद्ध कलाकार गोपाल गाणिगा, वरिष्ठ छायाकार विश्वनाथ सुवर्णा, विदुषी लेखिका डॉ. इंदिरा हेगड़े, अनुभवी राजनेता कागोडु थिमप्पा, रूपहले पर्दे के अभिनेता अशोक और पूर्व आईएएस अधिकारी टेरेसा भट्टाचार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। दूसरी तरफ, सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े वाटल नागराज ने इस वर्ष घोषित सम्मान को स्वीकार करने से मना कर दिया।
विविध विधाओं का प्रतिनिधित्व और नेतृत्व का संदेश
घोषित सम्मान सूची में समाज के हर रचनात्मक क्षेत्र का संतुलित प्रतिनिधित्व देखने को मिला है। प्रांतीय संस्कृति की जड़ों को सींचने वाली लोककला विधा से सात गुणी जनों को चुना गया है, जबकि संगीत क्षेत्र से तीन कलाकारों, नृत्य विधा से एक प्रतिभा और सिनेमा तथा टेलीविजन संसार से तीन हस्तियों को इस सम्मान का भागीदार बनाया गया है। समग्र चयन सूची में 12 महिला विभूतियों का शामिल होना सामाजिक समावेशन की दिशा में एक सशक्त संदेश देता है।
सम्मान सूची सार्वजनिक होने के पश्चात राज्य के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सभी चयनित महानुभावों को बधाई संदेश प्रेषित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में रेखांकित किया कि इन सभी विभूतियों की समर्पित साधना और उत्कृष्ट कार्यों ने प्रांत की प्रतिष्ठा को चार चांद लगाए हैं।
अपनों से साझा करने योग्य प्रेरक संदेश
इस पावन पर्व पर कन्नड़ अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत को नमन करते हुए लोग एक-दूसरे को आत्मीय बधाई प्रेषित करते हैं। आप भी अपने स्वजनों, सहकर्मियों और मित्रों के साथ इन चुने हुए भावपूर्ण विचारों को साझा कर सकते हैं
- कर्नाटक राज्योत्सव की आप सभी को हार्दिक बधाई, ईश्वर करे कि कन्नड़ भाषा, साझा संस्कृति और हमारी पारस्परिक एकता का गौरव हर बीतते साल के साथ और अधिक सशक्त बने।
- परंपरा और आधुनिक प्रगति के अनूठे संगम को नमन, जहां मैसूर की ऐतिहासिक धरोहर से लेकर बेंगलुरु के गगनचुंबी क्षितिज तक विकास की अनुपम गाथा दर्ज है; राज्योत्सव की शुभकामनाएं।
- राज्य स्थापना दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर आइए हम उस मधुर भाषा, कालजयी साहित्य, कर्णप्रिय संगीत और निष्ठावान जनमानस का अभिनंदन करें जो इस धरा को अनुपम बनाते हैं।
- पीले और लाल ध्वज के सम्मान तथा असीम आत्मगौरव के साथ, सभी प्रदेशवासियों को कन्नड़ राज्योत्सव की कोटिशः मंगलकामनाएं।
- एक ही पुण्य भूमि, एक ही पावन जुबान और एक ही धड़कता हृदय, कर्नाटक निर्माण दिवस पर एकता का यह संकल्प सदा अमर रहे।
- ध्वज फहराएं, अपनी मातृभाषा में संवाद करें और साझी संस्कृति की छटा बिखेरें, राज्योत्सव के इस पुनीत अवसर का उल्लास मनाएं।



















