उद्योगपति संजय कपूर के निधन के बाद उनकी विशाल संपत्ति और पारिवारिक ट्रस्ट पर छिड़ा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर संतोष जताया है कि परिवार के सदस्यों के बीच जारी सुलह-सफाई की बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। न्यायपीठ ने दोनों पक्षों के बीच चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह भरोसा जताया कि सभी पक्ष एक सर्वसम्मति वाले शांतिपूर्ण समाधान के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
मध्यस्थता के लिए 2 नवंबर तक मिला अतिरिक्त समय
कानूनी खींचतान को आपसी सहमति से समाप्त करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया की अवधि को 2 नवंबर तक जारी रखने की अनुमति प्रदान कर दी है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मध्यस्थता प्रक्रिया में होने वाले मध्यस्थ के शुल्क का भुगतान आरके फैमिली ट्रस्ट के कोष से किया जाएगा। सुनवाई के दौरान पीठ ने उम्मीद जताई कि कानूनी लड़ाइयों को आगे बढ़ाने के बजाय परिवार शांतिपूर्ण तरीके से मामले को निपटा लेगा। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि यदि बातचीत किसी कारणवश विफल रहती है तो सभी पक्षों को नियमानुसार कानून का रास्ता अपनाने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी।
आरके फैमिली ट्रस्ट से शुरू हुई कलह की पूरी कहानी
जून 2025 में उद्योगपति संजय कपूर के असामयिक निधन के बाद उनकी लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति और व्यावसायिक हिस्सेदारी पर अधिकार को लेकर पारिवारिक मतभेद खुलकर सामने आए थे। इस विवाद की मुख्य जड़ साल 2017 में गठित आरके फैमिली ट्रस्ट है। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने ट्रस्ट के निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया था कि यह ट्रस्ट उनकी जानकारी और सहमति के बिना बनाया गया। उनका कहना था कि परिवार की संयुक्त परिसंपत्तियों को गलत तरीके से इसमें शामिल किया गया है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
दूसरी तरफ संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर का पक्ष है कि ट्रस्ट की स्थापना पूरी तरह से वैधानिक नियमों के तहत की गई थी और इसका मुख्य उद्देश्य सभी लाभार्थियों के हितों को सुरक्षित रखना है। प्रिया कपूर ने रानी कपूर पर ट्रस्ट के कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए उन्हें न्यासी पद से हटाने का नोटिस भी जारी किया था। प्रिया का तर्क था कि इस तरह की रुकावटों से लाभार्थियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
करिश्मा कपूर से शादी और बच्चों के अधिकार
इस पारिवारिक जायदाद के विवाद में संजय कपूर की पहली पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चों के हित भी जुड़े हुए हैं। संजय कपूर और अभिनेत्री करिश्मा कपूर का विवाह वर्ष 2003 में हुआ था और वर्ष 2016 में दोनों कानूनी रूप से अलग हो गए थे। इस शादी से उनके दो बच्चे हैं, समायरा कपूर और कियान कपूर। संजय कपूर ने अपने जीवनकाल में ही दोनों बच्चों के सुरक्षित भविष्य और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ठोस आर्थिक इंतजाम किए थे। संजय कपूर के निधन के पश्चात उनकी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर, मां रानी कपूर और बच्चों के कानूनी अधिकारों तथा आर्थिक हिस्सेदारी को लेकर स्थिति उलझ गई।
दिल्ली हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर होने और आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज होने के बाद यह मामला अंततः देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने विवाद की संवेदनशीलता और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अदालत के बाहर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का सुझाव दिया। इस जटिल विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। उनकी देखरेख में दोनों पक्षों के बीच लगातार वार्ताएं आयोजित की जा रही हैं, जिसकी हालिया रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने सौहार्दपूर्ण अंत की आशा व्यक्त की है।



















