उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में मौजूद असीम क्षमताओं को आर्थिक समृद्धि में बदलने के लिए एक व्यापक विकास योजना की रूपरेखा तैयार की गई है। विश्व बैंक की वित्तीय और तकनीकी मदद से संचालित होने वाली इस पहल का प्राथमिक मकसद पिछड़े जिलों में कारोबार, पूंजी निवेश और रोजगार के नए रास्ते तैयार करना है। उत्तर प्रदेश सक्षम जिला-आधारित आर्थिक विकास यानी यूपी-एज नाम की यह विशेष कार्ययोजना केवल उद्योग लगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने पर भी समान रूप से जोर देगी। राज्य सरकार की इस पहल से क्षेत्रीय असंतुलन को पाटने में उल्लेखनीय मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल संग उच्चस्तरीय विमर्श
इस प्रस्तावित परियोजना की बारीकियों को अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के मध्य एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट यानी पीपीआर को केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजने से जुड़े तमाम पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद सत्र में विश्व बैंक के प्रैक्टिस मैनेजर हून सोह, शीर्ष अर्थशास्त्री एवं राजकोषीय नीति विशेषज्ञ ऑरेलियन क्रॉस, वरिष्ठ अर्थशास्त्री विंसेंट बेलिंगा तथा वरिष्ठ विशेषज्ञ नेहा गुप्ता मौजूद रहे। बैठक के दौरान बताया गया कि इस प्रारूप को खास तौर पर पूर्वांचल के 28 जिलों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
बुंदेलखंड को शामिल करने की पहल और वित्तीय खाका
पूर्वांचल के अलावा बुंदेलखंड के 7 जिलों को भी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दायरे में लाने की सिफारिश रखी गई है। लगभग 2500 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च से तैयार होने वाला यह विशेष कार्यक्रम आगामी 5 वर्षों की अवधि में क्रियान्वित किया जाएगा। आर्थिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि पूर्वांचल में राज्य की कुल आबादी का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है, मगर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में इस भूभाग की हिस्सेदारी लगभग 27.6 प्रतिशत ही बैठती है। इसके अतिरिक्त, इस इलाके की प्रति व्यक्ति आय प्रदेश के औसत से करीब 45 प्रतिशत पीछे है और लगभग 80 प्रतिशत श्रमिक वर्ग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। इन्हीं विषमताओं को दूर करने के लिए जिलेवार आवश्यकताओं और संभावनाओं के अनुरूप उद्योग लगाने की रणनीति बनाई जा रही है।
स्थानीय संभावनाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ने का दृष्टिकोण
क्षेत्रीय विषमता दूर करने के संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और आर्थिक अवसरों को ध्यान में रखते हुए जिलेवार बड़े निवेश परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।" इसके साथ ही खेती पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता कम करने के लिए विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का विस्तार करने पर भी विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक और स्थानीय शिल्पों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और वैश्विक निर्यात नेटवर्क से जोड़कर ही कारीगरों और छोटे उत्पादकों की कमाई में स्थायी इजाफा किया जा सकता है।
उद्यमिता, कौशल प्रशिक्षण और भविष्य के सेक्टर
एक जिला एक उत्पाद जैसी मौजूदा योजनाओं को सुदृढ़ बाजार व्यवस्था मुहैया कराने के साथ ही करीब 1 लाख नए उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें महिला कारोबारियों को आगे लाने पर विशेष ध्यान रहेगा। आर्थिक विस्तार के लिए पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएं, उच्च शिक्षा, ई-कॉमर्स, डेटा सेंटर और डिजिटल जिलों जैसे नए जमाने के क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में युवाओं को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिसिटी और वेलनेस पर्यटन के नए केंद्र स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।


















