अरावली पर्वतमाला और राजस्थान के प्राकृतिक वन क्षेत्रों में गैरकानूनी रूप से खनिज दोहन करने वाले गिरोहों की मनमानी इस कदर बढ़ चुकी है कि वे वर्दीधारी सरकारी कर्मचारियों पर सीधे हमले करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी इलाके से एक दिल दहला देने वाला वाकया सामने आया, जहां अवैध मिट्टी निकासी की रोकथाम के लिए पहुंचे वन रेंजर प्रताप सिंह को डंपर चालक ने वाहन से रौंद दिया। गंभीर रूप से जख्मी होने के बाद उन्हें फौरन चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, मगर वहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी सांसें थम गईं।
प्रतापगढ़ में मिट्टी ढोने वाले वाहन चालक का खूनी खेल
छोटीसादड़ी इलाके में बिना किसी अनुमति के बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई और वाहनों से उसकी ढुलाई की पुख्ता जानकारी मिली थी। इस सूचना के आधार पर रेंजर प्रताप सिंह अपने अधीनस्थ वनकर्मियों के साथ मौके पर छापेमारी करने पहुंचे थे। टीम जब गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने की कवायद कर रही थी, उसी क्षण डंपर चला रहे शख्स ने वाहन की गति तेज कर सीधे रेंजर के ऊपर चढ़ा दिया। इस क्रूर हमले ने न केवल एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का जीवन छीन लिया, बल्कि राज्य भर में वन सुरक्षा कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अलवर में वन रक्षक से पहचान पत्र और नकदी छीनी
कानून को चुनौती देने का यह कोई अकेला मामला नहीं है। मौजूदा वर्ष के अप्रैल माह के दौरान अलवर जिले के कठूमर उपखंड अंतर्गत सहाड़ी ग्राम में भी वन दस्ते के साथ हिंसक झड़प हुई थी। इलाके में अवैध रूप से पत्थरों के व्यापार की गुप्त टोह मिलने पर क्षेत्रीय वन अधिकारी रवि सिंह भाटी ने दल-बल के साथ दबिश दी थी। वहां पत्थरों से लदे एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली को रुकने का इशारा किया गया, लेकिन चालक श्याम गुर्जर ने रुकने के बजाय वाहन भगाने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने पीछा कर उसे पकड़ लिया, मगर पूछताछ के बीच ही उसने अपने परिचितों को फोन कर दिया।
कुछ ही मिनटों के भीतर सतवीर गुर्जर अपने चार से पांच साथियों को लेकर वहां आ धमका और वन अमले पर ईंट-पत्थरों से भीषण हमला शुरू कर दिया। इस हंगामे के दौरान उपद्रवियों ने वन रक्षक रामवीर सिंह के साथ मारपीट की, पत्थर मारे और उनका सरकारी परिचय पत्र, जेब में रखी नकदी तथा मोबाइल फोन लूट लिया। इसके उपरांत हमलावर अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली को छुड़ाकर वहां से रफूचक्कर हो गए। स्थानीय स्तर पर यह बात रेखांकित की गई है कि इस भूभाग में अवैध कारोबारियों का खुद का एक सक्रिय मुखबिर तंत्र बना हुआ है, जो विभागीय हलचलों की भनक उन्हें तुरंत दे देता है।
झुंझुनू में जब्त मशीनें छुड़ाकर अधिकारियों पर चलाई गाड़ी
ऐसा ही एक दुस्साहसिक वाकया झुंझुनू के खेतड़ी अंचल में भी पेश आया था। देवता तातीजा की अरावली पहाड़ियों में रात्रि के वक्त अवैध उत्खनन की जानकारी मिलते ही रेंजर मुकेश मीणा अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। मौके पर जेसीबी और ट्रैक्टर के जरिए खुदाई चल रही थी, जिसे सरकारी अमले ने तत्परता दिखाते हुए अपने कब्जे में ले लिया। परंतु कुछ ही देर में हथियारबंद होकर शीशराम गुर्जर, नरेश गुर्जर और उनके सहयोगी वहां आ पहुंचे और बलपूर्वक दोनों जब्त वाहन छुड़ा ले गए।
वन अमला जब किसी प्रकार अपनी रक्षा करते हुए सिंघाना क्षेत्र के कुठानिया गांव के निकट पहुंचा, तो बोलेरो गाड़ी में सवार हमलावरों ने उनके रास्ते में अपनी गाड़ी आड़ी लगाकर रोक दी। हमलावरों ने विभागीय गाड़ियों के शीशे तोड़े, तोड़फोड़ की और रेंजर मुकेश मीणा पर सीधी गाड़ी चढ़ाकर उन्हें जान से मारने का प्रयास किया। लाठियों, लोहे के सरियों व हथियारों से किए गए इस प्राणघातक वार में वनपाल शाहरुख खान और सहायक वनपाल सत्यवान लहूलुहान हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा।
बारां में गश्ती दल पर सीधी टक्कर का प्रयास और जवाबी छापेमारी
बारां जिले के छीपाबड़ौद क्षेत्र में भी गश्त पर निकली वन टीम के सामने ऐसा ही संकट खड़ा हुआ था। टीम वहां अवैध उत्खनन तथा गैरकानूनी तरीके से तेंदूपत्ता तोड़े जाने की निगरानी कर रही थी। बड़ावदा गांव स्थित मंदिर के पास एक संदिग्ध ट्रैक्टर नजर आया, जिसे रुकवाने पर उसके चालक ने विभागीय वाहन को सीधी टक्कर मारने की कोशिश की और तेजी से निकल भागा। इस टक्कर में दो वनकर्मी चोटिल हो गए और गाड़ी के शीशे चकनाचूर हो गए, जिसके बाद छीपाबड़ौद थाने में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
इस दुस्साहस के पश्चात पुलिस और खनिज विभाग ने साझा अभियान छेड़ते हुए सुरताक तथा किशनगंज इलाकों में व्यापक तलाशी ली। इस संयुक्त कार्रवाई में तीन एलएनटी पॉकलेण्ड मशीनें, दो जेसीबी, चार ट्रैक्टर, दो नावें, एक डम्पर और एक मोटरसाइकिल जब्त की गई। नदी के जलमार्ग से चलने वाली नावों और भारी तकनीकी संयंत्रों की बरामदगी से माफिया गिरोहों में भारी खलबली मच गई।
प्रशासनिक अभियान: 552 कार्रवाइयां और करोड़ों की वसूली
इन लगातार हमलों के बीच सरकारी एजेंसियां भी सक्रिय रुख अपनाए हुए हैं। खनिज विभाग तथा संबद्ध एजेंसियों ने विशेष मुहिम चलाकर अवैध खनन गतिविधियों के विरुद्ध 552 से अधिक कार्रवाइयां की हैं। इस विस्तृत अभियान के अंतर्गत 76 प्राथमिकियां (एफआईआर) दर्ज की गईं और 17 अभियुक्तों को सलाखों के पीछे भेजा गया। इसके अतिरिक्त एक्सक्वेटर, जेसीबी और क्रेन सहित कुल 512 वाहन व उपकरण जब्त किए गए।
इस प्रशासनिक सख्ती के तहत अब तक 2 करोड़ 88 लाख रुपये से अधिक की जुर्माना राशि वसूल करके राजकोष में जमा कराई गई है। यह संपूर्ण प्रवर्तन अभियान खास तौर पर अरावली श्रृंखला और उन संवेदनशील जिलों पर केंद्रित रखा गया है, जहां से लंबे समय से अवैध उत्खनन की लगातार शिकायतें प्रशासन तक पहुंच रही थीं।





















