भारत की लगभग 55 प्रतिशत आबादी आज भी कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्रामीणों को उनके अपने गांव में ही रोजगार और अच्छी आय के अवसर उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में सुल्तानपुर जिले में मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख रीढ़ मानते हुए मत्स्य पालकों के लिए एक नई मछली बीमा योजना लागू की गई है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य प्राकृतिक आपदाओं तथा विभिन्न बीमारियों के कारण होने वाले वित्तीय जोखिम से मछली पालकों को सुरक्षा प्रदान करना है।
प्राकृतिक आपदा और बीमारियों से नुकसान की भरपाई
सुल्तानपुर जिले के मत्स्य पालन विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामाकांत पांडेय ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अत्यधिक बारिश, बाढ़, जलभराव और संक्रामक बीमारियों के कारण मछलियों की मृत्यु होने पर पालकों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा। मानसून के दौरान अचानक बाढ़ आने या तालाबों में जलभराव होने से मछलियां बह जाती हैं अथवा बीमारियों की चपेट में आकर मर जाती हैं, जिससे पालकों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। यह नई बीमा व्यवस्था इस प्रकार की तमाम अनिश्चितताओं से मत्स्य पालकों को राहत दिलाएगी।
यूपी फिश फार्मर ऐप से पंजीकरण और प्रीमियम व्यवस्था
इस बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए मत्स्य पालकों का पंजीकरण यूपी फिश फार्मर ऐप के जरिए किया जा रहा है। योजना के तहत बीमा की राशि और शर्तें किसान के तालाब के आकार तथा उसमें पाली जा रही मछलियों की प्रजाति के आधार पर निर्धारित की जाएंगी। वित्तीय सहूलियत को ध्यान में रखते हुए बीमा प्रीमियम का एक हिस्सा संबंधित मत्स्य पालक देगा, जबकि शेष बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा और उन्हें पूरी सुरक्षा मिलेगी।
मत्स्य पालकों के लिए ₹5 लाख का दुर्घटना बीमा
यह योजना न केवल मछलियों और फसल का बीमा करती है, बल्कि मछली पालन के कार्य में लगे किसानों की जीवन सुरक्षा का भी ध्यान रखती है। इसके अंतर्गत सभी पंजीकृत मत्स्य पालकों का दुर्घटना बीमा कराया जा रहा है। यदि किसी दुर्घटना में मत्स्य पालक की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी की ओर से उनके आश्रित परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। योजना के आरंभ से लेकर अब तक जिले में 1305 पालकों का दुर्घटना बीमा कराया जा चुका है।
सुल्तानपुर में मत्स्य पालन का दायरा और वार्षिक उत्पादन
सुल्तानपुर में मछली पालन का कार्य काफी बड़े पैमाने पर होता है। जिले की 2673 ग्राम पंचायतों के अधीन मौजूद सरकारी तालाबों तथा 508 निजी तालाबों में मत्स्य पालन किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में 3181 पंजीकृत मत्स्य पालक कार्यरत हैं, जबकि हजारों अन्य लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़े हैं। सुल्तानपुर में हर साल लगभग 25 हजार से 30 हजार टन मछली का उत्पादन दर्ज किया जाता है। इतने व्यापक स्तर पर होने वाले उत्पादन को आर्थिक सुरक्षा देना जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेगा।
पंजीकरण की प्रक्रिया और कार्यालय का पता
जिले के जिन मत्स्य पालकों ने अभी तक इस योजना के तहत अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे जल्द से जल्द अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। किसान अपने मोबाइल से यूपी फिश फार्मर ऐप डाउनलोड करके डिजिटल पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा, जो किसान ऐप का उपयोग करने में सहज नहीं हैं, वे सुल्तानपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मत्स्य पालन कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकते हैं और अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।



















