वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान भारत की विदेश व्यापार नीति का असर आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। जिन देशों के साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, वहां भारतीय वस्तुओं के निर्यात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्यसभा में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून तिमाही के दौरान एफटीए साझेदार देशों को किया जाने वाला मर्चेंडाइज निर्यात बढ़कर 43.14 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो पिछले वित्तवर्ष की इसी अवधि में 34.65 अरब डॉलर रहा था। यह वृद्धि दर्शाती है कि वैश्विक बाजारों में भारतीय सामान की पहुंच मजबूत हो रही है।
कुल निर्यात में इजाफा और एफटीए साझेदारों की बढ़ी हिस्सेदारी
एफटीए वाले देशों को हुए निर्यात की विकास दर देश के कुल निर्यात की तुलना में काफी अधिक रही है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, पहली तिमाही के दौरान देश का कुल वस्तु निर्यात 16 फीसदी की दर से बढ़ा है। पिछले साल अप्रैल से जून के बीच भारत का कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 111.57 अरब डॉलर था, जो इस साल की समान अवधि में बढ़कर 129.32 अरब डॉलर हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, भारत के कुल निर्यात में एफटीए साझेदार देशों की हिस्सेदारी भी बढ़ गई है। पिछले साल पहली तिमाही में इन देशों का हिस्सा 31.1 फीसदी था, जो इस बार बढ़कर 33.4 फीसदी हो गया है।
व्यापारिक गतिविधियों में आए इस उछाल की पुष्टि प्रशासनिक आंकड़ों से भी होती है। निर्यातकों को जारी किए जाने वाले सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन की संख्या में पिछले 5 वर्षों के दौरान दोगुना विस्तार देखा गया है। 5 साल पहले जहां 3.6 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 7.8 लाख तक पहुंच चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय निर्यातक व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली रियायतों का अधिक लाभ उठा रहे हैं।
सर्विस सेक्टर की तेज वृद्धि और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
वाणिज्य मंत्रालय का मानना है कि व्यापार समझौतों के जरिए भारत को अपना ट्रेड एजेंडा सेट करने में आसानी मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्तवर्ष 2025-26 में भारत ने वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था, जब कुल निर्यात 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह वित्तवर्ष 2021-22 में दर्ज किए गए लगभग 676 अरब डॉलर के कुल निर्यात से काफी अधिक है।
पिछले 4 वर्षों के दौरान व्यापारिक रुझानों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि मर्चेंडाइज सेक्टर की तुलना में सर्विस सेक्टर ने अधिक तेजी से प्रगति की है। वित्तवर्ष 2021-22 में वस्तुओं का निर्यात 422 अरब डॉलर था, जो वित्तवर्ष 2024-25 में मामूली बढ़ोतरी के साथ 442 अरब डॉलर के आसपास पहुंचा। दूसरी ओर, इसी 4 साल के दौरान सर्विस सेक्टर का निर्यात 254.53 अरब डॉलर से छलांग लगाकर 421.29 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिसने देश के समग्र निर्यात ढांचे को नया संबल प्रदान किया।
पीएलआई योजना और 2.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश
वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में घरेलू औद्योगिक नीतियों ने भी अहम भूमिका निभाई है। पीएलआई यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना ने विनिर्माण क्षमता और निर्यात योग्य अधिशेष को बढ़ाने में मदद की है। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक पीएलआई योजना को 14 प्रमुख सेक्टर्स में लागू किया जा चुका है।
इस योजना के अंतर्गत अब तक कुल 892 आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इन मंजूरियों के माध्यम से चिन्हित क्षेत्रों में 2.40 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष निवेश आया है। इस निवेश से न केवल विनिर्माण आधार मजबूत हुआ है, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए एफटीए साझेदार देशों के विशाल बाजारों का लाभ उठाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।



















