ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच मैके के मैदान पर खेला गया दूसरा टेस्ट मुकाबला केवल दो दिनों के भीतर ही समाप्त हो गया। इस तेजतर्रार मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के दबदबे के सामने बांग्लादेशी बल्लेबाज बेबस नजर आए, लेकिन मैच खत्म होने के बाद असली बहस पिच की गुणवत्ता को लेकर छिड़ गई है। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि अगर यही मुकाबला भारतीय सरजमीं पर दो दिन में खत्म हुआ होता, तो इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गजों का हंगामा खड़ा हो जाता और पिच पर सवाल उठाए जाने लगते। लेकिन चूंकि यह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की धरती पर हुआ है, इसलिए पूरी तरह से खामोशी छाई हुई है।
ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर चुप्पी और भारतीय पिचों पर आलोचना का दोहरा मानक
सुनील गावस्कर ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा असंतोष जताया है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जब भी भारत में कोई टेस्ट मैच ढाई या दो दिन में समाप्त होता है, तो पश्चिमी मीडिया और विदेशी पूर्व खिलाड़ी तुरंत स्पिन के अनुकूल बनी पिचों की आलोचना शुरू कर देते हैं। भारतीय पिचों को तुरंत खराब या असुरक्षित ठहराने की होड़ मच जाती है। इसके विपरीत, जब ऑस्ट्रेलियाई मैदानों पर गेंद अत्यधिक उछाल लेती है और मैच दो दिन में खत्म हो जाता है, तो उस पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जाता।
गावस्कर का तर्क है कि क्रिकेट जगत में पिचों के आकलन को लेकर दो तरह के मापदंड अपनाए जा रहे हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में टर्न लेने वाली पिचों को हमेशा कटघरे में खड़ा किया जाता है, जबकि सेना देशों में अतिरिक्त उछाल और रफ्तार वाली पिचों को रोमांचक क्रिकेट का नाम देकर मामले को दबा दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि खेल के नियम और पिचों के मानक सभी देशों के लिए समान क्यों नहीं होने चाहिए।
हालिया वर्षों में 4 दो-दिवसीय टेस्ट और पर्थ-मेलबर्न के उदाहरण
अपने हालिया विचारों को व्यक्त करते हुए सुनील गावस्कर ने कुछ ठोस आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऑस्ट्रेलिया में चार ऐसे टेस्ट मुकाबले खेले जा चुके हैं जो महज दो दिनों के भीतर खत्म हो गए। इसके बावजूद, वहां की पिचों की वैसी तीखी आलोचना कभी देखने को नहीं मिली जैसी भारतीय मैदानों के लिए की जाती है।
उन्होंने पिछले साल की मशहूर एशेज सीरीज का विशेष रूप से जिक्र किया, जहां पर्थ और मेलबर्न में खेले गए टेस्ट मैच दो दिनों के अंदर सिमट गए थे। गावस्कर ने कहा कि जब ऑस्ट्रेलिया में तेज और अत्यधिक उछाल वाली पिचें बनाई जाती हैं, तो अक्सर उनके पक्ष में तर्क दिए जाने लगते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब पिच पर अनियंत्रित उछाल होता है, तो यह सफाई दी जाती है कि क्यूरेटर या ग्राउंड्समैन ने मौसम के अनुमान को ध्यान में रखते हुए घास ज्यादा छोड़ दी थी, जिससे गेंद ने उम्मीद से अधिक उछाल लिया। गावस्कर के अनुसार, इस प्रकार के बहाने बनाकर असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है।
बांग्लादेश के उलटफेर के बाद ऑस्ट्रेलिया का रणनीति बदलना
इस दो टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में बांग्लादेश ने क्रिकेट जगत को चौंकाते हुए ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में पराजित कर दिया था। इस ऐतिहासिक उलटफेर के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम दबाव में थी। मैके में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्रबंधन ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए एक बेहद तेज और उछाल भरी पिच तैयार करवाई।
गावस्कर ने कहा कि उन्हें मैके में इस तरह की पिच देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। पहले टेस्ट में मिली हार के बाद ऑस्ट्रेलिया को वापसी करने के लिए अपनी घरेलू परिस्थितियों और ताकत का पूरा फायदा उठाना ही था। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों ने इस पिच का पूरा लाभ उठाया और बांग्लादेशी टीम को मैच की दोनों पारियों में 100 रन के भीतर ही समेट दिया। ऑस्ट्रेलिया ने यह मुकाबला एक पारी और 51 रन से जीतकर सीरीज में 1-1 की बराबरी हासिल कर ली।
SENA देशों का मिथक और ICC की रेटिंग पर उठे गंभीर सवाल
सुनील गावस्कर ने अपनी बात को सिर्फ ऑस्ट्रेलिया तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने उस व्यापक धारणा पर भी प्रहार किया जिसके तहत यह माना जाता है कि SENA देश (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) अपनी सुविधा या जरूरत के हिसाब से पिचें तैयार नहीं करते। गावस्कर का कहना है कि मैके की पिच ने इस मिथक को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। जब अपनी कमजोरियों को छुपाने और विपक्षी टीम को दबाव में लाने की बात आती है, तो ऑस्ट्रेलिया भी बाकी टीमों की तरह ही अपनी पसंद की पिच तैयार करता है।
गावस्कर की नाराजगी उस समय और बढ़ गई जब ऐसी खबरें आईं कि ICC मैके टेस्ट की इस पिच को वेरी गुड रेटिंग देने पर विचार कर रही है। उल्लेख है कि ICC की चार-स्तरीय पिच रेटिंग प्रणाली में वेरी गुड सबसे सर्वोच्च श्रेणी मानी जाती है। गावस्कर ने कहा कि अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मैच रेफरी इस पिच को आधिकारिक तौर पर क्या रेटिंग प्रदान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर यही स्थिति किसी भारतीय पिच के साथ होती, तो ICC और मैच रेफरी की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग होती। उन्होंने मांग की कि पिचों के मूल्यांकन के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था लागू होनी चाहिए जो सभी देशों पर समान रूप से लागू हो।


















