वैश्विक स्तर पर कई बड़ी ताकतों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच से बेहद सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के नए सर्वेक्षण में यह बात स्पष्ट हुई है कि आने वाले 12 महीनों के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया के सभी प्रमुख देशों को पीछे छोड़ देगी। इस आकलन के अनुसार विकास की रफ्तार के मामले में अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप जैसे बड़े आर्थिक क्षेत्र भी भारत से काफी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की हालिया समीक्षाएं भी भारत के इसी दबदबे की तस्दीक कर रही हैं।
अर्थशास्त्रियों के भरोसे में बड़ा उछाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक रुझानों पर नजर रखने वाले मुख्य अर्थशास्त्रियों के बीच भारत को लेकर सकारात्मक रुख लगातार गहरा हो रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 98 फीसदी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगले एक साल में भारत की विकास दर मध्यम या उससे भी बेहतर स्तर पर बनी रहेगी। इसके अलावा 74 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने देश की वृद्धि दर के मजबूत या बेहद मजबूत रहने की संभावना व्यक्त की है। मई के दौरान कराए गए पिछले आकलन में यह आंकड़ा 52 फीसदी पर था, जिससे पता चलता है कि कुछ ही महीनों के अंतराल में वैश्विक विशेषज्ञों का भरोसा भारत की स्थिरता और विस्तार पर तेजी से बढ़ा है।
प्रमुख वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से आगे भारत
वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जो इसे सबसे तेज दौड़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है। जहां पश्चिमी देश महंगाई और धीमी रफ्तार से जूझ रहे हैं, वहीं भारत अपनी मजबूत घरेलू खपत और नीतिगत स्थिरता के दम पर अपनी बढ़त बनाए हुए है। वैश्विक आर्थिक मंच पर चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आ चुकी है कि भारत इस साल वैश्विक आर्थिक वृद्धि में करीब 20 प्रतिशत तक का योगदान दे सकता है, जो दुनिया के कुल विकास में इसकी निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।

















