अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में बुधवार को फिर से दबाव देखने को मिला है, जहां भाव 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष करते नजर आए। हाल के सत्रों में 4,300 डॉलर के निचले स्तरों से आई रिकवरी के बाद अब ट्रेडर्स नई दिशा तय करने से कतरा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बातचीत से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं में किसी भी एक तरफा बड़े कदम पर ब्रेक लग गया है। बुलियन का मौजूदा ढांचा एक तरफ अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग और दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड्स तथा कच्चे तेल में आई नरमी के बीच उलझकर रह गया है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल बाजार की सुस्ती का असर
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित रूप से खोलने और अमेरिका व ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते की नई उम्मीदों ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाया है। ऊर्जा कीमतों में इस नरमी से व्यापक स्तर पर मुद्रास्फीति के दबाव कम होने के आसार बने हैं, जिसका सीधा प्रभाव अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल यानी यील्ड्स पर पड़ा है। ट्रेजरी यील्ड्स में आई इस गिरावट ने बिना ब्याज वाली संपत्तियों जैसे कि सोने को कुछ तकनीकी सहारा जरूर दिया है, जिससे सोने में भारी गिरावट की आशंका फिलहाल थमी हुई है।
कूटनीतिक मोर्चे पर घटनाक्रम काफी तेजी से बदले हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाएगा। इस बीच, मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बुधवार तड़के बताया कि मध्यस्थों ने पूरे दिन दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक आवाजाही की। उन्होंने आगे जोड़ा कि दोनों पक्षों ने बातचीत का एक दौर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और उम्मीद है कि यह प्रक्रिया रचनात्मक और आशाजनक साबित होगी। हालांकि, इन कूटनीतिक वार्ताओं की सकारात्मक प्रगति के बावजूद ट्रेडर्स ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत के ठोस नतीजों से पहले किसी भी तरह का भारी जोखिम उठाने से बच रहे हैं।
फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और डॉलर का दबदबा
सोने पर ऊपरी स्तरों से दबाव की एक प्रमुख वजह फेडरल रिजर्व की ओर से जारी सख्त मौद्रिक नीति के संकेत हैं। फेड अधिकारी कॉलिन्स ने मंगलवार को अपने संबोधन में अपेक्षा से कहीं अधिक आक्रामक रुख प्रदर्शित किया। उनके वक्तव्य में मुद्रास्फीति के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बने रहने को लेकर गहरी चिंता जताई गई। उन्होंने पिछली नीतिगत दर वृद्धि का स्पष्ट समर्थन करते हुए यह रेखांकित किया कि जब तक मूल्य स्थिरता पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, तब तक मौद्रिक नीति को प्रतिबंधात्मक बनाए रखना जरूरी है। कॉलिन्स की टिप्पणी कि नीतिगत दर को कुछ और समय तक अधिक प्रतिबंधात्मक बनाए रखने की आवश्यकता है, इस बात की पुष्टि करती है कि अमेरिकी डॉलर को ऊंची बॉन्ड यील्ड्स से समर्थन मिलता रहेगा।
अमेरिकी डॉलर वर्तमान में लगभग दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब टिका हुआ है। मुद्रास्फीति के जोखिमों और मजबूत श्रम बाजार के बीच फेड के सख्त बयानों ने निवेशकों को डॉलर में पूंजी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है। इसके अलावा, ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले कई ट्रेडर्स टेबल से अपना मुनाफा समेट रहे हैं, जिससे सोने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है। बाजार की नजरें अब सिर्फ दोनों महाशक्तियों की वार्ता पर ही नहीं, बल्कि आगामी अमेरिकी एसएंडपी ग्लोबल प्रारंभिक बिजनेस पीएमआई आंकड़ों और अन्य फेड अधिकारियों के बयानों पर भी टिकी हैं।
तकनीकी विश्लेषण: अनिर्णय के मोड़ पर अटका सोना
दैनिक तकनीकी चार्ट पर सोने का विश्लेषण करें तो यह 4,339.47 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया है। धातु वर्तमान में 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) 4,307.31 डॉलर और 100-दिवसीय एसएमए 4,313.57 डॉलर से मिलने वाले तकनीकी समर्थन तथा 21-दिवसीय एसएमए 4,388.96 डॉलर से मिलने वाले दबाव के बीच फंसी हुई है। 48.18 के स्तर पर बैठा रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 50 की तटस्थ मध्य रेखा के ठीक नीचे है, जो हालिया गिरावट के बाद बाजार में अनिर्णय की स्थिति का संकेत देता है। वहीं लंबी अवधि का 200-दिवसीय एसएमए 4,542.04 डॉलर पर बना हुआ है, जो यह स्पष्ट करता है कि बाजार ने अपनी ऊपरी गति जरूर गंवाई है, लेकिन यह पूरी तरह से मंदी के दौर में प्रवेश नहीं कर पाया है।
ताजा लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सोना (जीसी=एफ) 4,376 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 4,384 डॉलर के बंद स्तर से 0.17 प्रतिशत कम है। सोने का 52-सप्ताह का दायरा 3,750 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.77 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों में 14-अवधि का आरएसआई 46 पर है, जबकि एमएसीडी -7.10 बनाम 10.35 सिग्नल लाइन पर है, जिसका हिस्टोग्राम -17.45 के साथ मंदी का रुख दर्शा रहा है। मूविंग एवरेजेज के मोर्चे पर, ईएमए 20 स्तर 4,421 डॉलर, ईएमए 50 स्तर 4,392 डॉलर और ईएमए 200 स्तर 4,432 डॉलर पर है, जबकि एसएमए 50 स्तर 4,338 डॉलर और एसएमए 200 स्तर 4,555 डॉलर पर बना हुआ है। ईएमए 50 का ईएमए 200 से नीचे जाना लंबी अवधि में डेथ क्रॉस संरचना का निर्माण कर रहा है। बॉलिंगर बैंड्स 4,257 डॉलर से 4,665 डॉलर के बीच स्थित हैं, जिनका मध्य स्तर 4,461 डॉलर है और कीमत इस दायरे के भीतर बनी हुई है। बाजार में कमजोरी को दर्शाने वाला एडीएक्स 15 पर है, जबकि फास्ट स्टोकेस्टिक 36 और सिग्नल 43 पर स्थित है। 104.17 डॉलर का एटीआर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जिसमें पिवट 4,373 डॉलर, पहला प्रतिरोध 4,418 डॉलर, दूसरा प्रतिरोध 4,459 डॉलर तथा पहला समर्थन 4,331 डॉलर और दूसरा समर्थन 4,286 डॉलर पर स्थित है।
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव की पृष्ठभूमि
सोने के सुरक्षित निवेश की मांग को समझने के लिए अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापारिक टकराव को जानना आवश्यक है। व्यापार युद्ध मूल रूप से दो या अधिक देशों के बीच अत्यधिक संरक्षणवादी नीतियों से उपजा आर्थिक संघर्ष होता है। इसके तहत टैरिफ जैसी व्यापार बाधाएं खड़ी की जाती हैं, जिससे बदले की भावना से जवाबी कदम उठाए जाते हैं और आयात लागत बढ़ने से अंततः जीवनयापन की लागत बढ़ जाती है।
अमेरिका और चीन के बीच यह आर्थिक टकराव पहली बार 2018 की शुरुआत में शुरू हुआ था, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाते हुए भारी टैरिफ लगाए थे। चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ऑटोमोबाइल और सोयाबीन जैसे उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिए। यह तनाव जनवरी 2020 में दोनों देशों द्वारा फेज वन व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने तक बढ़ता रहा। इस समझौते में चीन के व्यापार नियमों में सुधार की मांग की गई थी ताकि विश्वास बहाल हो सके, लेकिन कोरोना महामारी के आने से ध्यान इस विवाद से हट गया। इसके बाद सत्ता में आए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इन शुल्कों को न केवल बरकरार रखा, बल्कि कुछ अतिरिक्त टैक्स भी जोड़े।
अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी ने इस व्यापारिक तनाव को फिर से हवा दे दी है। 2024 के अपने चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने वादा किया था कि पद संभालते ही वह चीन पर 60 प्रतिशत तक टैरिफ लगाएंगे, जिसे उन्होंने 20 जनवरी 2025 को सत्ता में आने के बाद लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए। इस नीति ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करने, औद्योगिक निवेश में कटौती लाने और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति को सीधे बढ़ाने का जोखिम फिर से पैदा कर दिया है।
वैश्विक मुद्राओं और केंद्रीय बैंकों की स्थिति
मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख जोड़ों में भी इस भू-राजनीतिक तनाव और नीतिगत अंतर का असर देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (एयूडी/यूएसडी) पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव दिखा है और यह एशियाई कारोबार में 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के ताजा विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों में संकुचन दर्ज किया गया है, जबकि सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने धीमी गति से विस्तार हुआ है। इस कमजोर आर्थिक डेटा और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने मिलकर इस मुद्रा पर दबाव बनाया है।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन (यूएसडी/जेपीवाई) 157.00 के मध्य स्तर पर मंडरा रहा है। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने सात-दो के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि यह मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक कदम था और बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप था, लेकिन इसके नरम लहजे ने जापानी येन को कमजोर बनाए रखा है। येन में इस कमजोरी और फेड के आक्रामक रुख ने डॉलर-येन जोड़ी को मजबूत रखा है, हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने इस जोड़ी की बढ़त को सीमित किया है। वैश्विक स्तर पर पूंजीगत लागत और एआई बुनियादी ढांचे में होने वाले भारी निवेश ने भी मुद्रास्फीति और उधारी लागत के गणित को उलझा दिया है। ऐसे जटिल माहौल में, जब तक ट्रंप और शी जिनपिंग की चर्चा से ठोस वैश्विक आर्थिक दिशा तय नहीं हो जाती, सोने की कीमतों में अनिर्णय की यह स्थिति जारी रहने की संभावना है।
















