वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों और भू-राजनीतिक गतिविधियों के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इंडोनेशियाई मुद्रा में महत्वपूर्ण उठापटक दर्ज की जा रही है। बैंक इंडोनेशिया (BI) की महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति बैठक से ठीक पहले मुद्रा जोड़ी USD/IDR फिसलकर 17,800 के अहम तकनीकी स्तर के करीब पहुंच गई है। व्यापक तकनीकी संरचना को देखें तो यह जोड़ी पिछले कुछ समय से एक आरोही चैनल (असेंडिंग चैनल) के भीतर कारोबार कर रही है, जहां 17,800 से 17,804 का दायरा तत्काल समर्थन के रूप में उभरकर सामने आया है। इस स्तर पर 50-दिवसीय और 9-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) दोनों मौजूद हैं, जो मौजूदा गिरावट को रोकने के लिए पहली रक्षा पंक्ति का काम कर रहे हैं। यदि यह जोड़ी यहां संभलती है, तो इसमें चैनल की ऊपरी सीमा 18,060 की ओर वापसी देखने को मिल सकती है, जबकि विफलता की स्थिति में चार महीने के निचले स्तरों का रास्ता खुल सकता है।
तकनीकी संकेतकों का मिजाज और प्रमुख समर्थन स्तर
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो USD/IDR का 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 54.08 पर बना हुआ है, जबकि ताजा क्लोजिंग डेटा में यह लगभग 55 के आसपास दर्ज किया गया है। यह स्तर बाजार में किसी ओवरबॉट या ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाए बिना एक संतुलित और हल्का सकारात्मक रुझान प्रस्तुत करता है। इसका मतलब यह है कि खरीदारों के पास अभी भी कीमतों को ऊपर धकेलने की पर्याप्त गुंजाइश है, बशर्ते कि मौजूदा समर्थन क्षेत्र सुरक्षित रहे। यदि यह जोड़ी 50-दिवसीय ईएमए (17,804) और 9-दिवसीय ईएमए (17,800) के नीचे सफलतापूर्वक निर्णायक ब्रेकडाउन देती है, तो बिकवाली का दबाव गहरा सकता है। ऐसी स्थिति में बाजार 9 सितंबर को दर्ज किए गए चार महीने के निचले स्तर 17,476 के क्षेत्र की तरफ फिसल सकता है।
इसके विपरीत, यदि बाजार आरोही चैनल के निचले सिरे से उछाल दर्ज करने में कामयाब रहता है, तो सबसे पहले 18,060 के प्रतिरोध का परीक्षण हो सकता है। इस बाधा को पार करने के बाद निवेशकों की निगाहें 8 जून को बने 18,247 के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर टिक जाएंगी। लाइव मार्केट संकेतकों के अनुसार, 20-दिवसीय ईएमए 17,725, 50-दिवसीय ईएमए 17,762 और 200-दिवसीय ईएमए 17,369 पर स्थित हैं, जो गोल्डन क्रॉस संरचना (EMA50 का EMA200 से ऊपर होना) के साथ दीर्घकालिक तेजी के रुझान की पुष्टि करते हैं। दैनिक आधार पर धुरी स्तर (पिवट पॉइंट) 17,826 पर है, जबकि तत्काल प्रतिरोध R1 17,852 और R2 17,904 पर है, तथा सपोर्ट S1 17,774 और S2 17,748 पर टिका हुआ है।
जोखिम भावना और वैश्विक मुद्राओं पर इसका प्रभाव
वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने में 'रिस्क-ऑन' (जोखिम लेने की प्रवृत्ति) और 'रिस्क-ऑफ' (जोखिम से बचने की प्रवृत्ति) जैसे बुनियादी बाजार मनोविज्ञान की अहम भूमिका होती है। जब निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो बाजार में 'रिस्क-ऑन' माहौल बनता है। ऐसी परिस्थितियों में निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों की खरीदारी बढ़ाते हैं, जिससे शेयर बाजारों में तेजी आती है और कमोडिटी निर्यातक देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं। दूसरी ओर, जब अनिश्चितता या संकट के बादल गहराते हैं, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाशते हुए 'रिस्क-ऑफ' का रुख करते हैं। ऐसे समय में सरकारी बॉन्ड, सोना और पारंपरिक सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली मुद्राओं की मांग बढ़ जाती है।
कमोडिटी निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं वाली मुद्राएं, जैसे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD), रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR), आमतौर पर रिस्क-ऑन के दौरान बढ़त दर्ज करती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि वैश्विक आर्थिक गतिविधि तेज होने पर कच्चे माल की मांग में भारी इजाफा होता है। इसके उलट, रिस्क-ऑफ के दौर में अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) जैसी प्रमुख सुरक्षित मुद्राओं का बोलबाला रहता है। अमेरिकी डॉलर को दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा का दर्जा प्राप्त है और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफ़ॉल्ट होने की आशंका नगण्य मानी जाती है। जापानी येन को घरेलू निवेशकों के भारी बॉन्ड स्वामित्व से स्थिरता मिलती है, जबकि स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून स्विस फ्रैंक में पूंजी को मजबूत कानूनी संरक्षण प्रदान करते हैं।
एशियाई कारोबारी सत्र में अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों का हाल
वैश्विक करेंसी क्रॉस और कमोडिटी बाजारों में भी बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान खासी हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नए सिरे से बिकवाली के दबाव में आ गया और बुधवार को एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर का परीक्षण करता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के फ्लैश पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन दर्ज किया गया, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से विस्तार कर रहा था, जिससे इस जोड़ी पर भारी दबाव बना। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती और डोनाल्ड ट्रंप तथा शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक के इंतजार ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की धारणा को प्रभावित किया, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत को बाजार ने नजरअंदाज कर दिया।
उधर USD/JPY की जोड़ी बुधवार को एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य क्षेत्र के आसपास मंडराती रही, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो कि बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप था, लेकिन इसके नरम रुख ने येन को कमजोर बनाए रखा। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख से अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित मुद्रा हस्तक्षेप का डर येन में अत्यधिक गिरावट को सीमित कर रहा है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों पर भी बिकवाली का दबाव दिखा और यह बुधवार को एशिया में 4,350 डॉलर के करीब संघर्ष करता रहा, क्योंकि निवेशक ट्रंप और शी जिनपिंग की आगामी बैठक से पहले सर्राफा बाजार में नए सौदे बनाने से बच रहे हैं।
व्यापक वृहद आर्थिक पृष्ठभूमि और पूंजी लागत की चुनौती
वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मुद्रास्फीति अनुमानों और ब्याज दर परिदृश्य का हिस्सा बन गया है, जहां अक्टूबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। इसके साथ ही ब्रिटेन में राजकोषीय गुंजाइश घटकर आधी रह गई है और फ्रांस के क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (CDS) दोनों देशों के बजट पेश होने से पहले 2020 के बाद के सबसे व्यापक स्तर पर पहुंच गए हैं। राजनयिक मोर्चे पर मसूद पेजेशकियान न्यूयॉर्क पहुंचे हैं, जहां खाड़ी देशों के साथ उनकी बैठकें तय हैं लेकिन कोई द्विपक्षीय बातचीत निर्धारित नहीं है। वित्तीय बाजार अब एआई विस्तार के दौर में पूंजी की बदलती लागत और केंद्रीय बैंकों की सख्त होती नीतियों के साथ तालमेल बिठाने में जुटे हैं, जिसका सीधा असर विकासशील बाजारों की मुद्राओं पर देखा जा रहा है।


















