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यमुना के किनारे आगरा के किसान कम खर्च में उगा रहे पालक, 40 दिन में शुरू कमाई और चार गुना तक मुनाफाव्यापार
13 जून 2026, 3:29 am (46 दिन पहले)· 0

यमुना के किनारे आगरा के किसान कम खर्च में उगा रहे पालक, 40 दिन में शुरू कमाई और चार गुना तक मुनाफा

आगरा में पालक की खेती से किसानों को कम लागत में तीन से चार गुना तक मुनाफा मिल रहा है, और बीज रोपण के 30 से 40 दिन में ही पैदावार शुरू हो जाती है।

उत्तर प्रदेश के आगरा में पालक उगाने वाले किसानों की किस्मत चमक रही है। असल में पालक की खेती में लागत बहुत कम बैठती है, जबकि किसानों को इसका तीन से चार गुना तक मुनाफा हासिल होता है। इतना ही नहीं, एक बार बीज बोने के बाद पालक की कटाई तीन से चार बार तक की जा सकती है, जिससे उन्हें दोहरा लाभ मिलता है। आगरा में पालक की खेती करने वाले एक किसान ने बताया कि उन्हें अपनी फसल का लागत मूल्य से कहीं बेहतर लाभकारी दाम मिल जाता है। उनका कहना है कि सीजन खत्म होने के बाद भी वे आसानी से अपना घर-परिवार चला लेते हैं, और जैसे ही नया सीजन शुरू होता है वे फिर से खेती में जुट जाते हैं और अच्छी कमाई कर लेते हैं।

प्रति एकड़ 10 से 15 हजार रुपये की लागत

आगरा में पालक की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि एक एकड़ खेत में करीब 10 से 15 हजार रुपये का खर्च आता है। उनके मुताबिक जब पालक की पैदावार शुरू होती है तो एक ही बार के बीज रोपण से चार बार तक पालक की कटाई हो जाती है, जिससे उन्हें बढ़िया मुनाफा मिलता है। उन्होंने बताया कि फसल पर जैविक खाद डाली जाती है और कुछ कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी किया जाता है, क्योंकि पालक में जल्दी कीड़ा लगने का खतरा रहता है। किसानों का कहना है कि कम लागत और अच्छे मुनाफे की वजह से आगरा के कई इलाकों में पालक उगाया जाता है। किसान ने बताया कि खेत में पालक तैयार होने के बाद उसे सीधे मंडी पहुंचाया जाता है, जहां व्यापारी उसका अच्छा लाभकारी दाम देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सबसे बड़ी खूबी यह है कि बीज बोने के करीब 30 से 40 दिनों में ही पैदावार शुरू हो जाती है।

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नदी और यमुना किनारे होती है ज्यादा खेती

आगरा में पालक की खेती नदी और यमुना के किनारे बड़े पैमाने पर की जाती है। किसान बताते हैं कि इस समय यमुना का पानी प्रदूषित हो जाने की वजह से वहां फिलहाल खेती नहीं की जा रही है। एक दौर ऐसा था जब पालक को यमुना के किनारे ही उगाया जाता था। उनका कहना है कि आगरा में नदी के किनारे और जहां जलोढ़ मिट्टी मिलती है, वहां इसकी फसल ज्यादा की जाती है। उन्होंने बताया कि जलोढ़ मिट्टी पालक की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इस मिट्टी में होने वाली फसल अच्छी और भरपूर मात्रा में होती है। इसके साथ ही नदी किनारा होने के कारण यहां नमी बनी रहती है, जिससे ज्यादा पानी या सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, कई किसान इन दिनों इसे अपने उन खेतों में भी उगा रहे हैं जो नदी किनारे नहीं हैं, बस वहां समय पर सिंचाई करनी पड़ती है।

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