अक्सर 12वीं कक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों के बीच यह धारणा देखने को मिलती है कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी या कंपनी सेक्रेटरी जैसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए स्कूली स्तर पर कॉमर्स की पढ़ाई अनिवार्य है। इस धारणा के कारण साइंस और आर्ट्स स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाले युवा यह मान लेते हैं कि वित्त, कॉर्पोरेट कानून और टैक्स के क्षेत्र में उनके लिए करियर के रास्ते बंद हैं। हालांकि, सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के नियम किसी भी विषय पृष्ठभूमि के छात्रों को इन कोर्सों में शामिल होने की अनुमति देते हैं।
दाखिले के लिए दो प्रमुख रास्ते
अगर आपने 12वीं में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, इतिहास या भूगोल जैसे विषय पढ़े हैं, तो भी आप अकाउंटिंग और कॉर्पोरेट जगत में प्रवेश कर सकते हैं। नियामक संस्थाओं ने ऐसे छात्रों के लिए दो अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई हैं, ताकि शुरुआती चरण में कॉमर्स न पढ़ने वाले अभ्यर्थियों के लिए राह आसान बनी रहे।
1. फाउंडेशन रूट: स्कूली शिक्षा पूरी करते ही प्रवेश
स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद नॉन-कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्र फाउंडेशन प्रक्रिया के माध्यम से इन पेशेवर पाठ्यक्रमों में पंजीकरण करा सकते हैं। सीए बनने की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों को आईसीएआई द्वारा आयोजित की जाने वाली सीए फाउंडेशन परीक्षा के लिए आवेदन करना होता है। वहीं सीएस बनने के इच्छुक उम्मीदवारों को आईसीएसआई की सीएसईईटी (सीएस एग्जीक्यूटिव प्रवेश परीक्षा) में बैठना पड़ता है।
इन प्रवेश परीक्षाओं में मूल अकाउंटिंग, अर्थशास्त्र, व्यावसायिक कानून और तार्किक क्षमता से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। हालांकि गैर-कॉमर्स पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को बुनियादी अकाउंट्स की बारीकियों को समझने के लिए शुरुआत में थोड़ा अधिक प्रयास करना पड़ता है, लेकिन नियमित अध्ययन के साथ 3 से 4 महीने की केंद्रित तैयारी में इस अंतर को आसानी से समाप्त किया जा सकता है।
2. डायरेक्ट एंट्री रूट: स्नातक के बाद सीधे प्रवेश
जो छात्र 12वीं के बाद फाउंडेशन परीक्षा दिए बिना उच्च शिक्षा पूरी कर चुके हैं, उनके लिए डायरेक्ट एंट्री की सुविधा उपलब्ध है। इस व्यवस्था के तहत बीएससी, बीए या बीटेक जैसे गैर-कॉमर्स विषयों में कम से कम 60% अंकों के साथ स्नातक या स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को शुरुआती प्रवेश परीक्षा देने से छूट मिलती है।
कम से कम 60% अंक प्राप्त करने वाले गैर-कॉमर्स स्नातक सीधे सीए इंटरमीडिएट स्तर पर दाखिला ले सकते हैं। ठीक इसी प्रकार आईसीएसआई भी पात्र स्नातकों को सीएसईईटी परीक्षा से छूट देते हुए सीधे सीएस एग्जीक्यूटिव स्तर में प्रवेश का अवसर प्रदान करता है।
साइंस और आर्ट्स के विद्यार्थियों की विशेष क्षमताएं
गैर-कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों में अक्सर यह हिचकिचाहट होती है कि वे कॉमर्स पृष्ठभूमि वाले सहपाठियों का मुकाबला कैसे करेंगे। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि साइंस और आर्ट्स दोनों ही स्ट्रीम के छात्रों के पास ऐसी क्षमताएं होती हैं जो इन परीक्षाओं में काफी मददगार साबित होती हैं। साइंस पृष्ठभूमि के छात्रों की गणितीय और तार्किक विश्लेषण क्षमता बेहद मजबूत होती है, जो टैक्स, मैथ और ऑडिटिंग जैसे विषयों को समझने में काफी काम आती है।
दूसरी ओर, आर्ट्स पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत, अवधारणात्मक समझ और सैद्धांतिक विषयों पर पकड़ मजबूत होती है। यह खूबी कॉर्पोरेट गवर्नेंस, बिजनेस लॉ और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों की व्यापक तैयारी में बहुत बड़ी ताकत साबित होती है।
तैयारी की शुरुआत के लिए व्यावहारिक सुझाव
गैर-कॉमर्स पृष्ठभूमि से आने वाले उम्मीदवारों को सीधे कठिन अध्ययन सामग्री उठाने के बजाय बुनियादी स्तर से पढ़ाई शुरू करने की सलाह दी जाती है। इसके लिए 11वीं और 12वीं कक्षा की बेसिक अकाउंटेंसी और बिजनेस स्टडीज की किताबों का अध्ययन करना एक बेहतरीन शुरुआती कदम है।
शुरुआती 2 से 3 महीनों का समय डेबिट और क्रेडिट के मूलभूत नियमों को समझने तथा बैलेंस शीट की संरचना सीखने में लगाना चाहिए। एक बार जब वित्तीय शब्दावली और मूल सिद्धांत स्पष्ट हो जाते हैं, तो सीए और सीएस का बाकी पाठ्यक्रम भी किसी अन्य सामान्य विषय की तरह सहज और समझने योग्य बन जाता है।



















