झारखंड की राजधानी रांची में फिल्म मेकिंग, डॉक्यूमेंट्री निर्माण और मीडिया प्रोडक्शन के क्षेत्र में अपना भविष्य तलाश रहे युवाओं के लिए बेहतरीन शैक्षणिक रास्ते खुल रहे हैं। भारतीय मनोरंजन उद्योग, क्षेत्रीय सिनेमा और सरकारी प्रचार माध्यमों में बढ़ती मांग को देखते हुए शहर के कई अग्रणी संस्थान युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। मात्र 10,000 रुपये के शुरुआती शुल्क से लेकर उच्च स्तरीय 3D एनीमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मीडिया पाठ्यक्रमों तक, रांची के कॉलेजों में छात्रों की अलग-अलग जरूरतों और बजट के हिसाब से विकल्प उपलब्ध हैं। शिक्षा विशेषज्ञ दिलीप का मानना है कि मुंबई स्थित बॉलीवुड और क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्री के अलावा सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
कम बजट में फिल्म मेकिंग का बुनियादी प्रशिक्षण
रांची यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज में छात्र 1 साल का फिल्म मेकिंग कोर्स कर सकते हैं, जिसमें 6 महीने की फीस मात्र ₹10,000 तय की गई है। कम खर्च में सिनेमा के बुनियादी गुर सीखने की चाह रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह एक बेहद आकर्षक अवसर है। इसके अतिरिक्त, शहर के प्रसिद्ध गोसनर कॉलेज और संत जेवियर कॉलेज में भी मीडिया से जुड़े कोर्सेज का संचालन किया जा रहा है। संत जेवियर कॉलेज में मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की व्यवस्था है, जहां छात्र 2 साल की मास्टर डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। इस मास्टर प्रोग्राम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी के पास किसी भी मान्यता प्राप्त विषय में बैचलर डिग्री होना अनिवार्य है। संत जेवियर कॉलेज में छात्रों को डॉक्यूमेंट्री निर्माण की बारीकियां सिखाई जाती हैं और शॉर्ट फिल्म निर्माण के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। हालांकि, यहां का वार्षिक शुल्क लगभग ₹1,00,000 है, जो अन्य सरकारी संस्थानों की तुलना में थोड़ा अधिक है।
मारवाड़ी कॉलेज में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और पोर्टफोलियो निर्माण
व्यावहारिक ज्ञान पर ध्यान केंद्रित करने वाले विद्यार्थियों के लिए मारवाड़ी कॉलेज एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। मारवाड़ी कॉलेज में मास कम्युनिकेशन पाठ्यक्रम के तहत ही शॉर्ट फिल्म निर्माण के सिलेबस को शामिल किया गया है। संस्थान के प्रोफेसर राजीव बताते हैं कि अन्य निजी संस्थानों की तुलना में यहां की फीस काफी किफायती है, जो सालाना लगभग ₹30,000 तक आती है। इसे मध्यमवर्गीय छात्र आसानी से वहन कर सकते हैं। इस संस्थान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां किताबी ज्ञान से ज्यादा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर दिया जाता है। पढ़ाई के दौरान थ्योरी के साथ-साथ छात्रों से डॉक्यूमेंट्री का निर्माण करवाया जाता है। यह निर्मित डॉक्यूमेंट्री छात्रों के पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाती है। जब सरकारी विभाग या निजी एजेंसियां किसी प्रोजेक्ट के लिए रचनात्मक प्रतिभाओं की तलाश करती हैं, तो छात्र अपने पोर्टफोलियो में शामिल 2-3 तैयार फिल्मों को प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे उन्हें करियर में बेहतर बढ़त और प्राथमिकता मिलती है।
बीआईटी कॉलेज में एनीमेशन, 3D और AI तकनीक का संगम
आधुनिक दौर में डिजिटल मीडिया और विजुअल इफेक्ट्स की मांग को देखते हुए बीआईटी कॉलेज एनीमेशन और 3D कोर्सेज की पढ़ाई करवा रहा है। जो छात्र अपनी शॉर्ट फिल्मों में एनीमेशन, 3D विजुअल्स या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहते हैं, उनके लिए यह पाठ्यक्रम सर्वोत्तम माना जा रहा है। संस्थान ने समय की मांग और नई तकनीकों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे सिलेबस को विशेष रूप से डिजाइन किया है। बीआईटी कॉलेज में इस 3 साल के कोर्स की कुल फीस लगभग ₹5,00,000 से ₹6,00,000 के बीच है।
प्लेसमेंट और मुंबई फिल्म उद्योग का सीधा रास्ता
बीआईटी कॉलेज की सबसे बड़ी मजबूती इसका मजबूत प्लेसमेंट नेटवर्क है। संस्थान के पीआरओ मुकुल के अनुसार, कोर्स पूरा होने के समय देश की बड़ी-बड़ी मीडिया और एनीमेशन कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आती हैं। इनमें प्राइम फोकस, कॉसमॉस और कई प्रमुख टीवी सीरीज निर्माण कंपनियां शामिल हैं। अगर विद्यार्थियों के पास बेहतर कौशल और व्यावहारिक पकड़ है, तो उन्हें नौकरी की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती। यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र सीधे मुंबई के मीडिया और एंटरटेनमेंट उद्योग में कदम रख रहे हैं। इस प्रकार रांची अब पूर्वी भारत के युवाओं के लिए मीडिया और फिल्म मेकिंग ट्रेनिंग के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है।



















