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40 रुपये की स्कूल फीस से समाज कल्याण अधिकारी तक, जानिए वेद प्रकाश मिश्र के संघर्ष की दास्तानकरियर
29 अक्तू॰ 2026, 8:27 am (5 मिनट पहले)· 0

40 रुपये की स्कूल फीस से समाज कल्याण अधिकारी तक, जानिए वेद प्रकाश मिश्र के संघर्ष की दास्तान

मऊ के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर कन्नौज में समाज कल्याण अधिकारी बने वेद प्रकाश मिश्र की प्रेरणादायक जीवन यात्रा युवाओं को धैर्य और लगन का पाठ पढ़ाती है।

अक्सर देखा जाता है कि आज के दौर में युवा रातों-रात कामयाबी हासिल करने की होड़ में अपना धैर्य खो बैठते हैं। ऐसे दौर में कन्नौज जिले के समाज कल्याण अधिकारी वेद प्रकाश मिश्र की जीवन यात्रा यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित साधन भी लक्ष्य के आड़े नहीं आते। एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर प्रशासनिक पद तक पहुंचने का उनका सफर अनुशासन और निरंतर अभ्यास की मिसाल पेश करता है।

पिता का सपना और परिवार का शुरुआती संघर्ष

वेद प्रकाश मिश्र के पारिवारिक इतिहास में भी शिक्षा के प्रति गहरा जुड़ाव देखने को मिलता है। उनके पिता सत्य प्रकाश मिश्र मूल रूप से एक कृषक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते थे। पढ़ने-लिखने के विशेष शौक के चलते उनके पिता ने वकालत की पढ़ाई पूरी कर वकील बनने की दिशा में कदम बढ़ाया था। हालांकि, कानून के पेशे में उन्हें मनचाही कामयाबी हासिल नहीं हो सकी। इस मोड़ के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और खेती-किसानी के साथ-साथ छोटी-मोटी नौकरियों का सहारा लेकर अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली।

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मऊनाथ भंजन में बीता बचपन और आरंभिक तालीम

पूर्वांचल के मऊनाथ भंजन में 1 जनवरी 1989 को जन्मे वेद प्रकाश मिश्र अपने घर में तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटे हैं। बचपन में उनकी पढ़ाई मऊ स्थित विद्या मंदिर से शुरू हुई, जहां उन्होंने कक्षा तीन तक बुनियादी तालीम ली। इसके उपरांत उन्होंने एक बौद्ध विद्यालय में दाखिला लेकर अपनी आगे की स्कूली शिक्षा जारी रखी। घर के हालात भले ही तंग रहे हों, मगर उनके परिजनों ने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को हमेशा सबसे ऊपर रखा।

तंगहाली के बीच 40 रुपये की फीस और इलाहाबाद का रुख

एक ऐसा दौर भी आया जब उनके घर की माली हालत बेहद नाजुक हो गई थी। हालात यह थे कि जिस स्कूल में उनके पिता नौकरी करते थे, उसी संस्थान में वेद प्रकाश की पढ़ाई चल रही थी। उस दौर में मासिक स्कूल फीस महज 40 रुपये हुआ करती थी, जबकि पिता का वेतन भी काफी सीमित था। इन तमाम दुश्वारियों के बाद भी पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कोई अड़चन नहीं आने दी। स्कूली शिक्षा पूरी करने के पश्चात वेद प्रकाश मिश्र ने उच्च अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की मजबूत नींव तैयार करने के लिए इलाहाबाद का रुख किया।

सिविल सेवा की तैयारी और सफलता का नजरिया

प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के दिनों में उन्होंने कड़े अनुशासन, नियमित दिनचर्या और विषयों पर गहरी पकड़ को अपनी रणनीति का केंद्र बनाया। युवाओं की मनोदशा पर अपने विचार साझा करते हुए वे स्पष्ट करते हैं कि तैयारी के दौरान जल्दबाजी से बचना चाहिए। उनका मानना है कि उम्मीदवार का ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि सफलता मिले, न कि इस बात पर कि वह कितनी जल्दी हासिल होती है। नियमित अध्ययन चक्र और बार-बार अभ्यास ही वास्तविक मजबूती देते हैं।

शून्य से शिखर की सोच बनी जीवन का संबल

अपने अनुभवों को शब्दों में पिरोते हुए उन्होंने एक कविता-कहानी की रचना भी की है। इसमें उन्होंने उल्लेख किया,

‘अगर मैं शून्य हूं, तो मैं बहुत कुछ हूं’।
उनका दर्शन है कि शून्य को कभी हीन भावना से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि शून्य से नीचे कुछ भी मौजूद नहीं होता और संसार की प्रत्येक बड़ी यात्रा की शुरुआत शून्य से ही होती है। यही दृष्टिकोण आज उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने और अनगिनत युवाओं को सही राह दिखाने का संबल देता है।

सवाल-जवाब

वेद प्रकाश मिश्र वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?
वेद प्रकाश मिश्र वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात हैं।
वेद प्रकाश मिश्र का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 1 जनवरी 1989 को पूर्वांचल के मऊनाथ भंजन जिले में हुआ था।
उनके पिता का क्या नाम है और उन्होंने क्या पढ़ाई की थी?
उनके पिता का नाम सत्य प्रकाश मिश्र है, जिन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की थी।
वेद प्रकाश मिश्र ने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा कहां से प्राप्त की?
उन्होंने कक्षा तीन तक की पढ़ाई मऊ के विद्या मंदिर से की और उसके बाद एक बौद्ध विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी की।
बचपन में उनके स्कूल की फीस कितनी थी?
जिस विद्यालय में उनके पिता नौकरी करते थे, वहां उस समय उनकी मासिक स्कूल फीस मात्र 40 रुपये हुआ करती थी।
उच्च अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए वे कहां गए?
आगे की पढ़ाई पूरी करने और सिविल सेवा की नींव रखने के लिए वे इलाहाबाद चले गए थे।
वेद प्रकाश मिश्र ने अपनी कविता में शून्य को लेकर क्या विचार व्यक्त किए हैं?
उन्होंने लिखा कि 'अगर मैं शून्य हूं, तो मैं बहुत कुछ हूं', क्योंकि शून्य से नीचे कुछ नहीं होता और हर बड़ी शुरुआत शून्य से ही होती है।
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