लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) का नाम सामने आते ही उत्तराखंड के मसूरी की खूबसूरत पहाड़ियों की याद ताजा हो जाती है और जेहन में ट्रेनी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तस्वीरें उभरने लगती हैं। देश भर से लाखों युवा हर साल सिविल सेवा परीक्षा की कठिन वैतरणी पार कर इस प्रतिष्ठित संस्थान की दहलीज पर पहुंचने का सपना देखते हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या बिना यूपीएससी की इस बाधा को पार किए भी कोई इस ऐतिहासिक और विशिष्ट परिसर के अंदर प्रवेश पा सकता है। यह विचार सुनने में भले ही हैरान करने वाला लगे, लेकिन यह पूरी तरह से सच है और इसके कई वैकल्पिक रास्ते भी मौजूद हैं।
आम तौर पर यही माना जाता है कि मसूरी स्थित इस परिसर में केवल वही लोग आ सकते हैं जिनका चयन सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से हुआ है। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है क्योंकि यह केवल अधिकारियों की बुनियादी ट्रेनिंग का ठिकाना भर नहीं है, बल्कि देश के सबसे बड़े प्रशासनिक और वैचारिक मंथन का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। यहां ऐसे कई विशेष कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं जिनके जरिए बिना यूपीएससी की परीक्षा पास किए भी अंदर जाने का मौका मिल जाता है। आइए जानते हैं उन दिलचस्प और अनसुने रास्तों के बारे में जिनके जरिए बिना आईएएस बने भी इस सपनों के कैंपस तक पहुंचना संभव हो पाता है।
लॉ स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स के लिए इंटर्नशिप के विशेष अवसर
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को मसूरी स्थित संस्थान में प्रशिक्षण का अवसर मिलता है और जिन लोगों का चयन किसी भी सिविल सेवा के लिए होता है, उनकी शुरुआती यात्रा यहीं से शुरू होती है। इसके बावजूद जो लोग परीक्षा में असफल हो जाते हैं या जिन्होंने कभी यह परीक्षा नहीं दी है, उनके मन में भी इस परिसर के भीतर जाने की तीव्र इच्छा होती है। ऐसे युवाओं के लिए बिना सिविल सेवा परीक्षा दिए अंदर प्रवेश पाने का सबसे बेहतरीन माध्यम इंटर्नशिप साबित होता है। संस्थान के नेशनल सेंटर फॉर लॉ एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NCLA) की तरफ से अंतिम वर्ष के कानून के छात्रों के लिए चार सप्ताह की एक शैक्षणिक इंटर्नशिप की शुरुआत की गई है।
इस विशेष व्यवस्था के अंतर्गत देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और वरिष्ठ संकाय सदस्यों के साथ मिलकर गवर्नेंस तथा एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ जैसे विषयों पर गहन शोध करने का सुनहरा अवसर प्राप्त होता है। इसके अलावा यह संस्थान समय-समय पर पब्लिक पॉलिसी, सोशल साइंसेज, मीडिया और रिसर्च जैसे क्षेत्रों से जुड़े युवाओं के लिए भी अपने विभिन्न सेंटर्स के माध्यम से प्रोजेक्ट आधारित इंटर्नशिप के द्वार खोलता रहता है। इसके लिए अभ्यर्थियों को संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर लगातार नजर बनाए रखनी होती है। हालांकि इस चार सप्ताह की अवधि वाली इंटर्नशिप के दौरान किसी प्रकार का स्टाइपेंड नहीं दिया जाता है, लेकिन परिसर के भीतर रहने और खाने की व्यवस्था पूरी तरह से निःशुल्क होती है।
मिड-करियर ट्रेनिंग और अकादमिक मेहमानों की एंट्री
सिविल सेवा परीक्षा को पास किए बिना इस प्रशासनिक केंद्र में दाखिला पाने का एक अन्य ठोस माध्यम मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम (MCTP) भी है। देश की अलग-अलग केंद्रीय सेवाओं जैसे कि भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा और इसके अलावा राज्य सिविल सेवा के अनुभवी अधिकारियों को समय-समय पर रिफ्रेशर कोर्स पूरा करने के लिए मसूरी भेजा जाता है। इन अधिकारियों की गिनती भी उन लोगों में होती है जो सीधे यूपीएससी के ताजा बैच से नहीं आते बल्कि अपनी सेवा के दौरान उन्नत प्रशिक्षण के लिए वहां पहुंचते हैं। इसके साथ ही देश और विदेश से मैनेजमेंट, इकोनॉमिक्स और आधुनिक टेक्नोलॉजी के दिग्गज विशेषज्ञों को बतौर गेस्ट लेक्चरर, कंसलटेंट या रिसर्चर इस प्रतिष्ठित संस्थान में आमंत्रित किया जाता है।
क्या आम नागरिक भी इस परिसर में घूम सकते हैं, यह एक ऐसा सवाल है जो अक्सर लोगों के जेहन में आता है। यह बात भली-भांति समझ लेनी चाहिए कि यह कोई आम पर्यटन स्थल नहीं है, जिसके कारण यहां सीधे तौर पर आम लोगों की एंट्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हालांकि, देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों के विद्यार्थी शैक्षणिक दौरों यानी एजुकेशनल टूर के तहत विशेष अनुमति लेकर यहां आ सकते हैं। यह प्रशासनिक सोच का एक ऐसा मंदिर है जहां केवल ज्ञान, बुद्धिमत्ता और उच्च स्तर के प्रोफेशनलिज्म के दम पर ही इन चुनिंदा रास्तों के माध्यम से प्रवेश पाया जा सकता है।



















