स्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम में किसी भी फेरबदल की सुगबुगाहट अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच चिंता बढ़ा देती है। नौवीं कक्षा के गणित विषय को लेकर हालिया दिनों में कुछ ऐसी ही बेचैनी देखने को मिली, जब इंटरनेट मंचों और शिक्षकों के समूहों में यह बात तेजी से फैलने लगी कि महत्वपूर्ण अध्याय हटा दिए गए हैं। अंतिम इम्तिहानों की तैयारी में जुटे छात्र इस कथित कटौती से परेशान थे, लेकिन अब शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने सामने आकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।
अध्याय कम होने का भ्रम कैसे पैदा हुआ
परिषद ने स्पष्ट रूप से बताया है कि किताबों का अध्ययन केवल अध्यायों की कुल गिनती देखकर नहीं किया जाना चाहिए। पुरानी और प्रस्तावित पुस्तकों की विषय-सूची में अंतर दिखने से यह गलतफहमी उपजी कि रेखाएं और कोण या यूक्लिडियन ज्यामिति जैसे बुनियादी विषय कोर्स से गायब हो गए हैं। असलियत यह है कि किसी भी जरूरी विचार को बाहर नहीं किया गया, बल्कि उन्हें दूसरे अध्यायों के भीतर व्यावहारिक अनुप्रयोगों के साथ समाहित कर दिया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 की सिफारिशों पर अमल करते हुए यह बदलाव किए जा रहे हैं। पुरानी शैली में फॉर्मूले रटने की विवशता को खत्म करके विषयों को आपस में जोड़ना इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद है।
प्रस्तावित संरचना में अवधारणाओं का नया संयोजन
पाठ्यचर्या निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों ने अमूर्त सूत्रों को अलग-थलग पढ़ाने के बजाय उन्हें समग्र संदर्भ में प्रस्तुत किया है। कक्षा 9 की नई व्यवस्था में ज्यामिति के सिद्धांतों को अधिक उपयोगी बनाकर पेश किया जा रहा है।
- रेखाएं और कोण का समायोजन: इस विषय के आधुनिक उपयोग अब अध्याय 9 यानी प्रपोजिशन्स एंड कन्वर्सेज और अध्याय 12 यानी क्वाड्रीलेटरल्स के भीतर शामिल कर दिए गए हैं।
- यूक्लिडियन ज्यामिति का व्यावहारिक रूप: सैद्धांतिक और नीरस लगने वाले यूक्लिडियन नियमों को अलग से याद कराने के बजाय विभिन्न अध्यायों के भीतर पिरोया गया है, जिससे छात्र यह जान सकें कि इन नियमों का वास्तविक जीवन में उपयोग कैसे होता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक की मांग के अनुरूप तैयारी
इस पूरे बदलाव का सबसे दूरगामी पहलू यह है कि विद्यार्थियों को सूचना क्रांति और कृत्रिम मेधा के दौर के लिए तैयार किया जा रहा है। आज की दुनिया डेटा और कंप्यूटिंग तकनीकों पर निर्भर है, इसलिए स्कूली स्तर पर ही कंप्यूटेशनल थिंकिंग को मजबूत करना जरूरी समझा गया है।
परिषद ने नई योजना में एल्गोरिदम से जुड़ा विशेष अध्याय जोड़ा है। इसके साथ ही डेटा स्ट्रक्चर्स और रनिंग-टाइम एफिशिएंसी जैसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है, जो आगे चलकर कंप्यूटर विज्ञान या उच्च गणित पढ़ने वाले हर शिक्षार्थी के लिए ठोस आधारशिला का काम करेंगी। पारंपरिक और पुराने तरीकों के स्थान पर यह आधुनिक दृष्टिकोण नौवीं के बच्चों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए सक्षम बनाएगा।
परिषद ने अपने सोशल मीडिया संदेश में इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्कूली शिक्षा की रूपरेखा 2023 के अनुसार अध्ययन सामग्री को नए सिरे से संवारा जा रहा है।
सुझाव मांगे गए, अक्टूबर में तय होगा अंतिम रूप
वर्तमान में सामने आई सामग्री एक आरंभिक मसौदा है। परिषद ने देशभर के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षाविदों से इस प्रारूप पर टिप्पणियां और विचार आमंत्रित किए हैं। सभी पक्षों के सुझावों का विश्लेषण करने के बाद अक्टूबर में कक्षा 9 के गणित का अंतिम पाठ्यक्रम जारी किया जाएगा।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए परिषद अपनी अद्यतन पुस्तकें भी प्रस्तुत कर रही है। गणित मंजरी भाग 2 तथा सामाजिक विज्ञान की अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड भाग 2 जैसी पुस्तकें परिषद के आधिकारिक पोर्टल और अमेज़न पर उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।



















