देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में प्रवेश पाने की इच्छा रखने वाले लाखों अभ्यर्थी हर सत्र में जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड की कड़ी परीक्षा से गुजरते हैं। महीनों की अनवरत तैयारी के बावजूद कई बार उम्मीदवार मेरिट सूची में आवश्यक कटऑफ से मामूली अंतर से चूक जाते हैं। अधिकांश छात्र ऐसी स्थिति में यह मान लेते हैं कि उनका प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान में पढ़ने का सफर यहीं समाप्त हो गया। हालांकि वास्तविक नियम पुस्तिका यह स्पष्ट करती है कि कम रैंक अथवा तय कटऑफ से थोड़ा पीछे रह जाने के बावजूद संस्थान परिसर में अध्ययन करने के विशिष्ट और नियमानुकूल रास्ते पूरी तरह बंद नहीं होते हैं।
बीटेक दाखिले की मुख्य व्यवस्था और प्रिपरेटरी कोर्स का नियम
सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत संस्थानों के पारंपरिक बीटेक पाठ्यक्रमों में प्रवेश केवल जेईई एडवांस्ड की मेरिट सूची और काउंसिलिंग आवंटन के जरिए ही संपन्न होता है। मुख्य सूची में रैंक पीछे रहने पर सामान्य सीट सीधे हासिल करना संभव नहीं होता, परंतु विशेष वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए प्रिपरेटरी कोर्स एक प्रमाणित विकल्प प्रदान करता है। यह व्यवस्था प्राथमिक रूप से एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी श्रेणियों के उन परीक्षार्थियों के लिए बनाई गई है जो न्यूनतम कटऑफ अंक से मामूली अंतर से पीछे रह जाते हैं और मुख्य मेरिट सूची में सीधी सीट पाने से वंचित रह जाते हैं।
इस प्रणाली के अंतर्गत चयनित छात्रों को एक वर्ष का गहन प्रिपरेटरी कोर्स कराया जाता है। इस एक वर्षीय शैक्षणिक अवधि को सफलता के साथ पूरा करने के पश्चात संबंधित छात्रों को अगले शैक्षणिक सत्र में नियमित बीटेक पाठ्यक्रम में सीधे प्रवेश दे दिया जाता है। इस तरह एक साल का शैक्षणिक आधार मजबूत करके अभ्यर्थी बिना किसी नई प्रवेश परीक्षा के मुख्य इंजीनियरिंग डिग्री कार्यक्रम का हिस्सा बन जाते हैं।
वैकल्पिक डिग्री कार्यक्रम और नए शैक्षणिक प्रारूप
पारंपरिक चार वर्षीय बीटेक के अतिरिक्त तकनीकी संस्थानों ने समय के साथ कई नए शैक्षणिक प्रारूप भी विकसित किए हैं। इनमें बीएससी, एमएससी और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड डिग्री के साथ-साथ ऑनलाइन और हाइब्रिड पाठ्यक्रम शामिल हैं। यदि किसी अभ्यर्थी की जेईई एडवांस्ड रैंक मुख्य इंजीनियरिंग शाखाओं के लिए पर्याप्त नहीं बैठती, तो वे इन विशिष्ट संकायों और हाइब्रिड प्रारूपों के जरिए संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधिकारिक डिग्री हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होता है जो संस्थान के ब्रांड और अकादमिक माहौल से जुड़ना चाहते हैं।
स्पोर्ट्स एक्सीलेंस एडमिशन और खेल कोटे की शुरुआत
अतीत में इंजीनियरिंग परिसरों में खेल कोटे के आधार पर किसी भी प्रकार के प्रवेश का कोई प्रावधान नहीं हुआ करता था। हालांकि हाल के वर्षों में इस नीतिगत व्यवस्था में प्रगतिशील बदलाव देखा गया है। आईआईटी मद्रास ने स्पोर्ट्स एक्सीलेंस एडमिशन योजना लागू करके इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज करने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए विशेष सीटें आरक्षित की गई हैं।
इस योजना में खेल उपलब्धियों को अत्यधिक प्राथमिकता दी जाती है, परंतु बुनियादी पात्रता के रूप में अभ्यर्थी का जेईई एडवांस्ड परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य रखा गया है। न्यूनतम शैक्षणिक स्तर की पुष्टि होते ही राष्ट्रीय स्तर के पदक या अंतरराष्ट्रीय भागीदारी वाले खिलाड़ियों को वरीयता के आधार पर चुना जाता है। खेल प्रतिभा को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की यह पहल आने वाले समय में अन्य परिसरों में भी अपनाई जा सकती है।
पूर्व छात्रों के बच्चों के लिए विशेष रियायत का सच
अकादमिक जगत में अक्सर यह भ्रांति पाई जाती है कि पूर्व छात्रों अथवा संस्थान में कार्यरत प्राध्यापकों के बच्चों को प्रवेश प्रक्रिया में कोई गुप्त रियायत या प्रबंधन कोटा मिलता है। केंद्रीय वित्तपोषित और पूर्णतः पारदर्शी संस्थान होने के कारण यहां किसी भी पूर्व छात्र के आश्रित अथवा संबंधी के लिए कोई समानांतर व्यवस्था या प्रबंधन कोटा अस्तित्व में नहीं है। परिवार की सामाजिक पृष्ठभूमि, अभिभावकों का औद्योगिक कद अथवा संस्थान से उनका पुराना जुड़ाव दाखिले में कोई भूमिका नहीं निभाता। प्रत्येक अभ्यर्थी को समान धरातल पर जेईई एडवांस्ड की पारदर्शी मेरिट व्यवस्था से ही अपनी सीट सुनिश्चित करनी होती है।
स्वास्थ्य और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए निर्धारित प्रावधान
चिकित्सीय आधार पर प्रवेश मिलने को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों के बीच कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं। परीक्षा के दौरान अचानक स्वास्थ्य बिगड़ जाने, किसी गंभीर बीमारी अथवा आपातकालीन दुर्घटना के आधार पर अलग से कोई सीट सुरक्षित करने का कोई नियम नहीं है। संस्थान में चिकित्सीय आधार पर केवल दिव्यांगजन आरक्षण लागू होता है, जो केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप चालीस प्रतिशत या उससे अधिक स्थायी दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान करता है। इसके इतर किसी भी अस्थायी बीमारी या तात्कालिक असुविधा के आधार पर किसी अतिरिक्त राहत का कोई प्रावधान नियमावली में दर्ज नहीं है।



















