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पलामू में मल्चिंग से संवरेगी स्ट्रॉबेरी की फसल, जैविक और प्लास्टिक शीट के सही चुनाव से घटेगा खर्चझारखंड
12 अक्तू॰ 2026, 9:55 am (2 घंटे पहले)· 1

पलामू में मल्चिंग से संवरेगी स्ट्रॉबेरी की फसल, जैविक और प्लास्टिक शीट के सही चुनाव से घटेगा खर्च

पलामू में स्ट्रॉबेरी उत्पादन को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए कृषि विशेषज्ञ ने रेज्ड बेड पर उचित मल्चिंग के तरीके और जैविक विकल्पों के लाभ साझा किए हैं।

झारखंड के पलामू इलाके में पारंपरिक फसलों से अलग स्ट्रॉबेरी का उत्पादन काश्तकारों के बीच आर्थिक मजबूती का एक नया जरिया बनकर उभर रहा है। नकदी फसल होने के कारण इसमें कमाई की भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं, मगर बेहतर पैदावार और आकर्षक मुनाफा हासिल करने के लिए सही कृषि पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य माना जाता है। इसी क्रम में मल्चिंग तकनीक का प्रयोग फसल की गुणवत्ता सुधारने, खरपतवार की रोकथाम करने तथा जमीन के भीतर जरूरी नमी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में बेहद असरदार साबित हो रहा है। काश्तकार बाजार से खरीदी जाने वाली कृत्रिम प्लास्टिक शीट के अलावा स्थानीय जैविक सामग्री से भी मल्चिंग कर सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत घटती है और मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुधरता है।

रेज्ड बेड पद्धति और जैविक मल्च के दोहरे फायदे

पलामू जिले के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, स्ट्रॉबेरी की व्यवस्थित खेती के लिए खेत में उठी हुई क्यारियां यानी रेज्ड बेड तैयार करना और उन पर मल्चिंग लगाना तकनीकी रूप से अत्यंत उपयोगी रहता है। इस कार्य के लिए प्लास्टिक मल्च अथवा ऑर्गेनिक मल्च में से किसी का भी चयन किया जा सकता है। हालांकि, जैविक मल्च काश्तकारों के बजट और खेत की सेहत दोनों के लिहाज से कई मामलों में अधिक लाभदायक सिद्ध होता है। इसके तहत खेतों में पेड़ों की सूखी पत्तियां, फसलों का पुआल और अन्य प्राकृतिक जैविक अवशेष बिछाए जा सकते हैं। चूंकि यह सामग्री स्थानीय स्तर पर ही आसानी से मिल जाती है, इसलिए बाहर से सामग्री खरीदने का अतिरिक्त खर्च पूरी तरह बच जाता है।

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भूमि की उर्वरा शक्ति और नमी संरक्षण

ऑर्गेनिक मल्च के तकनीकी फायदों की चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्राकृतिक आवरण भूमि में जल धारण क्षमता को बनाए रखता है, जिसके चलते बार-बार पानी देने या सिंचाई करने की विवशता काफी हद तक कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, धूप सीधे जमीन पर न पड़ने के कारण अवांछित खरपतवारों का उगना और फैलना भी थम जाता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, यह जैविक परत धीरे-धीरे सड़कर जमीन में समा जाती है और उसमें जैविक कार्बन तथा पोषक तत्वों का इजाफा करती है। इससे खेत की संरचना में उल्लेखनीय सुधार आता है और उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इस विधि में ध्यान रखने योग्य मुख्य बात यह है कि स्ट्रॉबेरी के नाजुक फलों को सड़ांध से सुरक्षित रखने के लिए मल्च की परत को हमेशा साफ-सुथरा और संतुलित मात्रा में बिछाना चाहिए।

प्लास्टिक मल्च की मोटाई और माइक्रोन का पैमाना

जो काश्तकार खेत में प्लास्टिक मल्च शीट बिछाने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें उसकी मोटाई यानी माइक्रोन के मानक पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। स्ट्रॉबेरी की सामान्य खेती के दौरान प्रायः 25 माइक्रोन मोटाई वाली प्लास्टिक फिल्म का उपयोग व्यावहारिक माना जाता है। यदि फसल का चक्र केवल तीन महीने की अल्पावधि का है, तो वहां 20 माइक्रोन की शीट भी काम कर सकती है। वहीं दूसरी ओर, यदि फसल चक्र लंबा है, तो अधिक समय तक टिकने वाली मजबूत और टिकाऊ शीट को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि वह बीच में ही खराब न हो।

बाजार में लागत और गुणवत्ता की पहचान

डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि बाजार से प्लास्टिक मल्चिंग खरीदते समय सामग्री की मजबूती और टिकाऊपन की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि वह बिछाते वक्त या मौसम के प्रभाव से जल्दी न फटे। वर्तमान में बाजार में 25 से 30 माइक्रोन मोटाई वाली लगभग 450 मीटर लंबी प्लास्टिक शीट तकरीबन 1500 रुपये के मूल्य पर उपलब्ध हो जाती है। लंबी अवधि की फसल लेने वाले किसानों को टिकाऊपन के लिए ज्यादा माइक्रोन वाली शीट लगानी चाहिए, जबकि जैविक मल्च अपनाने वाले किसान स्थानीय संसाधनों के सहारे अपनी कुल लागत घटाकर लाभ का दायरा और अधिक विस्तृत कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

स्ट्रॉबेरी की खेती में सामान्यतः कितने माइक्रोन की प्लास्टिक मल्च का उपयोग किया जाता है?
स्ट्रॉबेरी की सामान्य खेती में 25 माइक्रोन मोटाई वाली प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल किया जाता है।
तीन महीने की कम अवधि वाली फसल के लिए कौन सी मल्च उपयोगी है?
तीन महीने की अल्पावधि वाली फसल के लिए 20 माइक्रोन मोटाई की प्लास्टिक मल्च भी उपयोगी हो सकती है।
बाजार में प्लास्टिक मल्च की अनुमानित कीमत क्या है?
बाजार में 25 से 30 माइक्रोन मोटाई वाली लगभग 450 मीटर लंबी प्लास्टिक शीट करीब 1500 रुपये में मिलती है।
ऑर्गेनिक मल्च में किन प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा सकता है?
ऑर्गेनिक मल्च के लिए पेड़ों की सूखी पत्तियां, फसलों का पुआल और अन्य स्थानीय जैविक सामग्री उपयोग में लाई जा सकती है।
जैविक मल्च के इस्तेमाल से मिट्टी को क्या लाभ होता है?
जैविक मल्च समय के साथ सड़कर मिट्टी में मिल जाता है, जिससे जमीन में जैविक पदार्थ की मात्रा और उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
स्ट्रॉबेरी के फलों को सड़ने से बचाने के लिए मल्चिंग में क्या सावधानी रखनी चाहिए?
फलों को सड़ांध से सुरक्षित रखने के लिए मल्च को हमेशा साफ-सुथरा और उचित व संतुलित मात्रा में बिछाना जरूरी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·26 मिनट पहले

पलामू में स्ट्रॉबेरी की खेती का विचार अच्छा है, पर प्लास्टिक और जैविक मल्च के बीच का चुनाव इतना आसान नहीं होता जितना बताया गया है। शुरुआती लागत बचाने के चक्कर में कई बार फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ जाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·48 मिनट पहले

पिछले साल जब मैं झारखंड गया था, तो कुछ किसानों से बात हुई थी जो पारंपरिक खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की तरफ बढ़ रहे थे। पलामू में यह प्रयोग वाकई कमाल कर रहा है, खासकर जब इसमें लागत घटाने के लिए जैविक तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·48 मिनट पहले

रविकेश जी, बात बिल्कुल सही है। सरकारी नीतियां जब ज़मीन पर उतरती हैं और किसानों को लागत कम करने के ऐसे नुस्खे मिलते हैं, तभी खेती वाकई मुनाफे का सौदा बनती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

पिछले साल जब मैं पलामू गया था, तब एक किसान से बात हुई थी जो स्ट्रॉबेरी की खेती में प्लास्टिक शीट के खर्च से परेशान था। अब जैविक मल्च का यह तरीका वाकई उनकी जेब का बोझ हल्का करेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, डॉ. प्रमोद कुमार ने सही सलाह दी है, सूखी पत्तियों और पुआल के इस्तेमाल से वाकई किसानों का खर्च बचेगा।

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