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कॉलेज में कदम रखते ही न दोहराएं ये पांच बड़ी चूक, वरना डिग्री मिलने के बाद भी हाथ नहीं लगेगी नौकरीकरियर
12 अक्तू॰ 2026, 4:30 pm (2 घंटे पहले)· 0

कॉलेज में कदम रखते ही न दोहराएं ये पांच बड़ी चूक, वरना डिग्री मिलने के बाद भी हाथ नहीं लगेगी नौकरी

बारहवीं कक्षा पास करने के बाद कॉलेज की आजादी में खोकर छात्र अक्सर बुनियादी व्यावहारिक कौशल, इंटर्नशिप और नेटवर्किंग की अनदेखी कर देते हैं, जिससे आगे चलकर रोजगार मिलना मुश्किल हो जाता है।

बारहवीं की पढ़ाई पूरी करना हर छात्र की जिंदगी का एक अहम पड़ाव होता है। स्कूल के सख्त नियमों, तय दिनचर्या और शिक्षकों की लगातार निगरानी से निकलकर जब युवा कॉलेज परिसर में कदम रखते हैं, तो उन्हें एक नई आजादी का अहसास होता है। इस नए सफर की शुरुआत में हर किसी की आंखों में बड़े सपने होते हैं। कोई चिकित्सा क्षेत्र में नाम कमाना चाहता है, कोई कुशल इंजीनियर बनने की हसरत रखता है, तो कोई कॉर्पोरेट सेक्टर में ऊंचा मुकाम हासिल करने की योजना बनाता है। इसके बावजूद, सही मार्गदर्शन के अभाव में कई छात्र जाने अनजाने ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका भारी नुकसान उन्हें पूरे करियर के दौरान उठाना पड़ता है।

केवल डिग्री के भरोसे रहना और व्यावहारिक कौशल न सीखना

अक्सर छात्र यह मान बैठते हैं कि किसी कॉलेज से डिग्री हासिल कर लेने मात्र से बड़ी कंपनियां उन्हें लाखों रुपये के पैकेज की पेशकश करने लगेंगी। मौजूदा जॉब मार्केट की असलियत इससे बिल्कुल अलग है। आज के कॉर्पोरेट जगत में केवल किताबी ज्ञान की कद्र नहीं है, बल्कि कंपनियां व्यावहारिक दक्षता, वास्तविक काम का अनुभव और सही नजरिया परखती हैं।

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यदि कोई छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान कोडिंग, व्यावहारिक प्रशिक्षण, डिजिटल माध्यमों की समझ और कार्यक्षेत्र से जुड़े नए औजार नहीं सीखता, तो उसकी डिग्री महज एक कागज का टुकड़ा बनकर रह जाती है। इसलिए कॉलेज के वर्षों में केवल सिलेबस पूरा करने तक सीमित न रहें। अपनी पढ़ाई के समानांतर ऑनलाइन कोर्स पूरा करें, वास्तविक प्रोजेक्ट्स पर काम करें और लगातार अपने हुनर को निखारते रहें।

भीड़ की देखादेखी और बिना व्यक्तिगत रुचि के पाठ्यक्रम चुनना

बारहवीं के बाद दाखिले की दौड़ में छात्र अक्सर अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या पड़ोसियों के फैसलों की नकल करने लगते हैं। कोई दोस्त इंजीनियरिंग चुन रहा है तो दूसरा छात्र भी उसी दिशा में चल पड़ता है, भले ही गणित या तकनीक में उसका मन बिल्कुल न लगता हो। यही स्थिति बीसीए या बीबीए जैसे पाठ्यक्रमों में भी देखने को मिलती है, जहां बिना सोचे समझे छात्र सिर्फ देखादेखी में दाखिला ले लेते हैं।

जब कोई व्यक्ति बिना किसी वास्तविक रुचि या लगन के किसी क्षेत्र को अपनाता है, तो कुछ ही महीनों बाद पढ़ाई भारी बोझ महसूस होने लगती है। ऐसी स्थिति में छात्र कभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते और न ही उस क्षेत्र के विशेषज्ञ बन पाते हैं। करियर का रास्ता चुनते वक्त अपनी व्यक्तिगत ताकत, रुचि और आने वाले समय में उस कार्यक्षेत्र की मांग का गहराई से विश्लेषण करना बेहद जरूरी है।

उद्योग जगत के संपर्कों और इंटर्नशिप को दरकिनार करना

कॉलेज के शुरुआती वर्षों में ज्यादातर छात्र यह सोचते हैं कि करियर और नौकरी की चिंता करने के लिए अभी बहुत समय बचा है। वे इंटर्नशिप तलाशने और पेशेवर नेटवर्क तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कदमों को अंतिम वर्ष तक टालते रहते हैं। रोजगार के वर्तमान दौर में यह एक भारी रणनीतिक भूल साबित होती है।

आजकल बेहतर नौकरियों के अवसर लिंक्डइन जैसे मंचों पर बने पेशेवर संपर्कों और आंतरिक संदर्भों के माध्यम से ज्यादा सामने आते हैं। कॉलेज के दौरान यदि छात्र उद्योग जगत के दिग्गजों से संवाद स्थापित नहीं करते, सेमिनार में हिस्सा नहीं लेते और इंटर्नशिप के जरिए कार्यस्थल की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू नहीं होते, तो डिग्री पूरी होने के बाद एक फ्रेशर के रूप में उन्हें भारी संघर्ष झेलना पड़ता है। कार्यस्थल पर किताबी समझ की तुलना में व्यावहारिक अनुभव को हमेशा अधिक तवज्जो दी जाती है।

समय के सही प्रबंधन का अभाव और शुरुआती असफलता से घबराना

स्कूली माहौल और कॉलेज की जीवनशैली में जमीन आसमान का अंतर होता है। स्कूल में शिक्षकों और अभिभावकों का अनुशासन बना रहता है, जबकि कॉलेज में छात्रों को अपनी दिनचर्या और प्राथमिकताओं की जिम्मेदारी पूरी तरह खुद संभालनी होती है। बहुत से छात्र दिन का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर रील देखने या गैर जरूरी गतिविधियों में गंवा देते हैं।

इसके साथ ही, पढ़ाई या कोडिंग के दौरान आने वाली छोटी मोटी रुकावटों और असफलताओं से कई छात्र तुरंत हिम्मत हार जाते हैं। पेशेवर दुनिया में निरंतरता और समय का सदुपयोग ही कामयाबी की बुनियाद तय करता है। हर दिन नया सीखने की आदत डालना और अपनी कमियों को दूर करना ही किसी भी युवा को भीड़ से अलग पहचान दिलाता है।

संवाद क्षमता और व्यक्तित्व विकास पर पर्याप्त ध्यान न देना

तकनीकी रूप से कोई छात्र कितना भी दक्ष क्यों न हो, यदि वह साक्षात्कार के दौरान अपनी बात स्पष्ट और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने में असमर्थ है, तो उसका सारा ज्ञान व्यर्थ साबित हो सकता है। छात्र अक्सर अपनी भाषा शैली, शारीरिक भाषा और आम बातचीत के तौर तरीकों को सुधारने पर ध्यान नहीं देते।

आधुनिक कॉर्पोरेट परिवेश में टीम के साथ मिलकर काम करने और ग्राहकों से तालमेल बिठाने के लिए बेहतरीन संवाद क्षमता का होना अनिवार्य है। कॉलेज के पहले वर्ष से ही अपने व्यक्तित्व को निखारने का प्रयास करना चाहिए। वाद विवाद प्रतियोगिताओं और सार्वजनिक मंचों पर बोलने का अभ्यास करके छात्र अपने भीतर वह आत्मविश्वास पैदा कर सकते हैं, जिसकी तलाश हर नियोक्ता को होती है।

सवाल-जवाब

12वीं के बाद केवल कॉलेज डिग्री पर निर्भर रहना क्यों जोखिम भरा है?
कंपनियां अब केवल किताबी ज्ञान के आधार पर नौकरी नहीं देती हैं, बल्कि वे व्यावहारिक कौशल, वास्तविक अनुभव और समस्या सुलझाने की क्षमता को प्राथमिकता देती हैं।
कॉलेज के दौरान करियर के लिए कौन से कौशल सीखना सबसे जरूरी है?
छात्रों को अपनी फील्ड के अनुसार व्यावहारिक कोडिंग, डिजिटल टूल्स, प्रोजेक्ट वर्क और बेहतरीन संवाद कौशल सीखने पर शुरुआत से ही ध्यान देना चाहिए।
पाठ्यक्रम का चुनाव करते समय छात्रों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
दोस्तों की देखादेखी करने के बजाय अपनी व्यक्तिगत रुचि, बौद्धिक क्षमता और उस क्षेत्र में भविष्य के रोजगार की मांग को देखकर ही कोर्स चुनना चाहिए।
इंटर्नशिप और नेटवर्किंग की शुरुआत किस वर्ष से करनी चाहिए?
इसे आखिरी साल के लिए टालने के बजाय कॉलेज के शुरुआती वर्षों से ही लिंक्डइन जैसे मंचों पर संपर्क बनाना और इंटर्नशिप के जरिए अनुभव लेना शुरू कर देना चाहिए।
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