देशभर के मेडिकल उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जल्द ही देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा नीट यूजी के पैटर्न में भारी फेरबदल करने जा रही है। इस बदलाव के तहत पारंपरिक पेन और पेपर आधारित ओएमआर शीट व्यवस्था को हमेशा के लिए विदाई दी जा सकती है और परीक्षार्थियों को कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर ऑनलाइन माध्यम से सवालों के जवाब देने होंगे।
ऑनलाइन मोड की तरफ बढ़ने की वजह
इस बड़े कदम के पीछे मुख्य मकसद परीक्षा प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता लाना और किसी भी प्रकार की धांधली या गड़बड़ी को पूरी तरह से समाप्त करना है। पिछले दिनों नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और विवादों के बाद सरकार ने कड़े कदम उठाने का फैसला किया था। इसी स्थिति से निपटने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स का गठन किया गया था, जो देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
सीबीटी मोड के फायदे और चुनौतियां
पारंपरिक पेन और पेपर फॉर्मेट वाली परीक्षाओं में अक्सर पेपर लीक होने, ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ करने और परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके विपरीत, कंप्यूटर आधारित टेस्ट में एन्क्रिप्टेड प्रश्न, डिजिटल लॉग्स और सख्त सर्वर सुरक्षा के कारण लीक होने की संभावनाएं लगभग शून्य हो जाती हैं। हालांकि, देश भर में लाखों छात्रों की संख्या को देखते हुए इतने बड़े स्तर पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटर लैब तैयार करना एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन जेईई मेन, यूजीसी नेट और सीयूईटी जैसी अन्य प्रमुख परीक्षाएं पहले ही ऑनलाइन मोड में सफलतापूर्व आयोजित की जा रही हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक स्तर की तकनीक
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी केवल ऑनलाइन प्रणाली तक ही सीमित नहीं रहना चाहती है, बल्कि वह परीक्षा की सुरक्षा को और चाक-चौबंद करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी विशेष जोर दे रही है। परीक्षा हॉल के भीतर किसी भी प्रकार की नकल या धोखाधड़ी रोकने के वास्ते एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और उन्नत डेटा एनालिटिक्स की मदद ली जाएगी। इसके अलावा, भारत अपनी घरेलू परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के बाद ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर क्रॉस-बॉर्डर परीक्षाएं आयोजित करने की दिशा में भी विचार कर रहा है और चीन की प्रसिद्ध गाओकाओ परीक्षा जैसी कठिन व्यवस्थाओं से सीख लेकर तकनीकी सुरक्षा को मजबूत कर रहा है।



















