त्वचा पर बार-बार पिंपल्स उभरने की समस्या केवल बाहरी स्किन केयर की कमी तक सीमित नहीं होती है, बल्कि आपकी खानपान की आदतें भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं। दैनिक जीवन में जरूरत से ज्यादा मीठा खाना, ऑयली चीजें लेना, दूध या कुछ विशेष डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कुछ लोगों में मुंहासों की परेशानी को काफी बढ़ा सकता है। इसके विपरीत, एक संतुलित डाइट अपनाना, भरपूर मात्रा में पानी पीना और जरूरी पोषक तत्वों का सेवन करना त्वचा को अंदर से स्वस्थ और साफ रखने में मदद करता है। इस संबंध में डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट से विस्तार से जानकारी मिलती है कि खानपान में किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।
चीनी और मीठे खाद्य पदार्थों का असर
फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट रितिका शर्मा बताती हैं कि चीनी और मीठी चीजों को काफी हद तक पिंपल्स बढ़ने की एक बड़ी वजह माना जा सकता है। इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि जब कोई व्यक्ति अधिक मात्रा में चीनी का सेवन करता है, तो शरीर का कॉर्टिसोल स्तर बढ़ जाता है। इससे शरीर तनाव की स्थिति में चला जाता है और फिर इंफ्लेमेशन यानी सूजन की प्रक्रिया शुरू होती है, जो चेहरे पर विशेष तौर पर जॉलाइन और चिन यानी ठुड्डी के हिस्से पर नजर आने लगती है और पिंपल्स निकलने लगते हैं।
तैलीय और अनहाइजीनिक भोजन की भूमिका
रितिका शर्मा बताती हैं कि ऑयली खाना खाने से भी पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि यह समझना भी बहुत आवश्यक है कि साफ-सुथरे तरीके से घर में बने ऑयली खाने की तुलना में अनहाइजीनिक और बाहर का ऑयली खाना ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। यदि आप घर में पूड़ी बना रहे हैं या कभी-कभार कोई तली हुई चीज अपनी पसंद से खा लेते हैं, तो उससे उतनी अधिक परेशानी होने की संभावना नहीं रहती है। इसके उलट, यदि आप बाहर का ऐसा अस्वच्छ खाना नियमित तौर पर खाते हैं जिसमें नमक बहुत ज्यादा होता है, मसाले अत्यधिक होते हैं और ट्रांस फैट का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, तो वह सेहत और त्वचा के लिए ज्यादा खतरनाक साबित होता है।
ट्रांस फैट का सीधा अर्थ यह होता है कि एक ही तेल को बार-बार गर्म करके उसी में बार-बार खाना पकाया जा रहा है। इस तरह का जला हुआ या बार-बार इस्तेमाल किया गया तेल शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है और इससे शरीर के भीतर इंफ्लेमेशन बढ़ जाती है। इसका सीधा और बुरा असर व्यक्ति की त्वचा पर पड़ता है जिससे चेहरे पर पिंपल्स उभरने लगते हैं।
दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स का प्रभाव
रितिका शर्मा के अनुसार, दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करने से पिंपल्स बढ़ने का प्रभाव हर इंसान के शरीर में अलग-अलग तरीके से हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति के शरीर को दूध सूट नहीं करता है या फिर डेयरी उत्पादों से उसे किसी प्रकार की परेशानी होती है, तो ऐसे लोगों में पिंपल्स होने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। अगर किसी को पहले से ही किसी तरह की एलर्जी है या पाचन संबंधी यानी इनडाइजेशन की समस्या है, तो भी इस प्रकार की दिक्कतें होने की पूरी संभावना बनी रहती है।
सामान्य परिस्थितियों में यदि कोई पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति है, जिसे किसी भी प्रकार की एलर्जी नहीं है और पाचन तंत्र भी ठीक है, तो उसे दूध या उससे बनी चीजों से इस तरह की परेशानी होने की संभावना काफी कम होती है। यदि दूध में किसी भी तरह के केमिकल या हार्मोनल इंजेक्शन के इस्तेमाल की बात सामने आती है, तो समस्या असल में दूध से नहीं बल्कि उसमें मौजूद किसी बाहरी तत्व की वजह से हो सकती है, जिससे शरीर में इंफ्लेमेशन होने के चांस बढ़ जाते हैं।
हाइड्रेशन और बैलेंस डाइट का महत्व
रितिका शर्मा यह भी बताती हैं कि शरीर के लिए उचित हाइड्रेशन बनाए रखना बेहद जरूरी है और पानी की मात्रा हमेशा अपनी व्यक्तिगत जरूरत को ध्यान में रखकर ही लेनी चाहिए। इसके साथ ही एक बैलेंस डाइट लेनी चाहिए जिसमें फाइबर, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट जैसी सभी जरूरी चीजें नियमित और संतुलित मात्रा में शामिल हों। इससे शरीर को लगातार ऊर्जा और सही पोषण मिलता रहता है, जिससे इंफ्लेमेशन बढ़ने की संभावना कम होती है और पिंपल्स की समस्या पर भी नियंत्रण रहता है।
रितिका शर्मा स्पष्ट करती हैं कि केवल पानी की कमी होने मात्र से सीधे तौर पर पिंपल्स नहीं बढ़ते हैं। हालांकि डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी की वजह से आपकी त्वचा पर पपड़ी जमने यानी फ्लेक्स आने और ड्राइनेस या सूखापन बढ़ने जैसी समस्याएं जरूर पैदा हो सकती हैं। इसकी वजह से चेहरे पर कई बार लाल रंग के बंप्स भी आने लगते हैं। चूंकि पानी की कमी से सीधे मुंहासे नहीं होते हैं, फिर भी समग्र स्वास्थ्य और त्वचा की नमी के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है।



















