देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में सहायक प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए पात्रता तय करने वाली प्रतिष्ठित परीक्षा के तौर पर पहचानी जाने वाली यूजीसी नेट की आगामी दिसंबर 2026 की परीक्षा को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की तरफ से विस्तृत दिशा-निर्देश और संशोधित अपडेट्स सार्वजनिक किए गए हैं। इन नए बदलावों का सीधा असर परीक्षा में बैठने वाले लाखों पंजीकृत विद्यार्थियों की तैयारियों और परीक्षा केंद्र पर उनकी दिनचर्या पर पड़ने वाला है। एजेंसी द्वारा परीक्षा की तारीखों से लेकर एग्जाम हॉल के भीतर बरती जाने वाली सावधानियों तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की गई है। परीक्षा शुरू होने से पहले इन तमाम तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों से पूरी तरह वाकिफ होना हर अभ्यर्थी के लिए बेहद जरूरी है ताकि ऐन वक्त पर किसी भी प्रकार की असुविधा या मानसिक तनाव से बचा जा सके। जरा सी भी लापरवाही या नियमों की अनदेखी वर्षों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर सकती है, इसलिए प्रत्येक दिशा-निर्देश को गहराई से समझना बुद्धिमानी होगी।
संशोधित इनफॉरमेशन बुलेटिन के माध्यम से ना केवल पूरी परीक्षा की समय सारणी को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है, बल्कि अंकों के मूल्यांकन यानी मार्किंग स्कीम, दिव्यांग श्रेणी के परीक्षार्थियों के लिए मिलने वाले अतिरिक्त समय और शुल्क वापसी यानी रिफंड पॉलिसी जैसे मुद्दों पर पूरी पारदर्शिता बरती गई है। जो अभ्यर्थी आगामी 14 दिसंबर से अपनी परीक्षा की शुरुआत करने जा रहे हैं, उन्हें इन सभी संशोधित नियमों के व्यावहारिक पहलुओं को भली-भांति समझ लेना चाहिए।
बदला हुआ परीक्षा शेड्यूल और जरूरी तारीखें
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यूजीसी नेट दिसंबर 2026 सत्र के लिए संशोधित परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह परीक्षा 14 से 19 दिसंबर के बीच आयोजित होनी थी, लेकिन अब इसमें संशोधन करते हुए नया परीक्षा चक्र 14 से 18 दिसंबर और इसके बाद 21 दिसंबर 2026 को संपन्न कराया जाएगा। हालांकि विभिन्न विषयों के अनुसार अलग-अलग पालियों और तिथियों का विस्तृत विषयवार शेड्यूल बहुत जल्द आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर अपलोड कर दिया जाएगा, जिसे परीक्षार्थी नियमित तौर पर देख सकते हैं।
परीक्षा की तैयारियों को सुगम बनाने के लिए एजेंसी ने कुछ अन्य अहम तारीखें भी निर्धारित की हैं। उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शहर की जानकारी देने वाली सिटी इंटीमेशन स्लिप आगामी 23 नवंबर 2026 को पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद मुख्य प्रवेश पत्र यानी एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया 7 दिसंबर 2026 से आरंभ हो जाएगी। जैसे ही सिटी इंटीमेशन स्लिप जारी हो, परीक्षार्थियों को तुरंत अपना अलॉटेड शहर देख लेना चाहिए। यदि परीक्षा केंद्र किसी दूरदराज के शहर में पड़ता है, तो यात्रा और ठहरने के साधन की व्यवस्था पहले से ही सुनिश्चित कर लेनी समझदारी होगी। एडमिट कार्ड के आने का आखिरी क्षणों तक इंतजार करने से कई बार अंतिम समय की भगदड़ और तनाव काफी बढ़ जाता है।
परीक्षा केंद्र के सख्त नियम और ड्रेस कोड
इस बार के परीक्षा हॉल के भीतर अनुशासन, पहनावे और सामान ले जाने की पाबंदियों को लेकर प्रशासन बेहद सख्त रुख अपना रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा केंद्र पर पेन ले जाने को लेकर स्थिति बिल्कुल साफ कर दी गई है। परीक्षार्थियों को घर से किसी भी तरह का बॉल पेन साथ लेकर जाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। कच्चा काम यानी रफ वर्क करने के लिए आवश्यक पेन और कागज परीक्षा केंद्र के अंदर ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
घड़ियों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। चाहे सुई वाली एनालॉग घड़ी हो, आधुनिक डिजिटल घड़ी हो या फिर किसी भी प्रकार की स्मार्टवॉच हो, किसी को भी परीक्षा हॉल के अंदर पहनकर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उम्मीदवारों की सुविधा के लिए कंप्यूटर स्क्रीन पर ही लगातार डिजिटल टाइमर चलता रहेगा जिससे वे समय का आकलन आसानी से कर सकें।
जूते और चप्पलों के चयन को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। परीक्षार्थियों को लंबे बूट या बहुत भारी भरकम जूते पहनकर आने से बचने की सलाह दी गई है। इसके स्थान पर केवल सामान्य जूते, हल्की और कम एड़ी वाली सैंडल या फिर साधारण चप्पल पहनकर ही केंद्र पर पहुंचना उचित रहेगा।
परीक्षा हॉल के भीतर केवल कुछ चुनिंदा चीजों को ले जाने की ही छूट दी गई है। उम्मीदवार अपने साथ एक पार्सदर्शी यानी ट्रांसपेरेंट पानी की बोतल रख सकते हैं। इसके अलावा मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित मरीज अपनी चिकित्सीय जरूरत के अनुसार शुगर की गोलियां या फिर साबुत फल जैसे केला या सेब अपने साथ ले जा सकते हैं, बशर्ते वे निर्धारित मानकों का पालन करते हों।
मार्क फॉर रिव्यू वाले सवालों की मार्किंग
कंप्यूटर आधारित परीक्षा के दौरान स्क्रीन पर आने वाले विकल्पों और ‘Mark for Review’ की कार्यप्रणाली को लेकर परीक्षार्थियों के मन में जो संशय की स्थिति बनी हुई थी, उसे अब एजेंसी ने पूरी तरह से दूर कर दिया है। यदि किसी परीक्षार्थी ने किसी प्रश्न का सही विकल्प चुन लिया है और उसके बाद उसे समीक्षा के लिए चिह्नित कर दिया है, तो उस प्रश्न का मूल्यांकन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। ऐसी स्थिति में यदि वह उत्तर सही निकलता है, तो उसके पूरे अंक मिलेंगे और यदि उत्तर गलत होता है, तो लागू नियमों के अनुसार नकारात्मक अंक यानी निगेटिव मार्किंग का प्रावधान लागू होगा या फिर शून्य अंक मिलेगा।
दूसरी तरफ, यदि किसी अभ्यर्थी ने प्रश्न का कोई भी विकल्प नहीं चुना है और केवल उसे बिना उत्तर दिए ही समीक्षा के लिए मार्क कर दिया है, तो उस प्रश्न की जांच नहीं की जाएगी और उसका कोई भी मूल्यांकन नहीं होगा।
करेक्शन विंडो और शहर चयन के प्रावधान
आवेदन प्रक्रिया के दौरान यदि किसी उम्मीदवार से फॉर्म भरने में कोई त्रुटि हो गई थी, तो ऑनलाइन करेक्शन विंडो बंद होने के पश्चात उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवल उन्हीं विशेष क्षेत्रों या फील्ड्स में संशोधन की छूट प्रदान की गई थी जिनकी स्पष्ट अनुमति नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की तरफ से दी गई थी। जिन अभ्यर्थियों के स्थायी या वर्तमान पते वाले राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश में कुल चार से कम परीक्षा शहर उपलब्ध हैं, उन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देने वाले अन्य उपलब्ध विकल्पों में से अपने पसंद का शहर चुनने की विशेष छूट दी गई है।
प्रत्येक विषय के लिए कटऑफ तैयार करने की प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाया गया है। एजेंसी का प्रयास रहता है कि जहाँ तक संभव हो सके, प्रत्येक विषय की परीक्षा एक ही पाली में सफलतापर्वक संपन्न करा ली जाए। यदि परीक्षा केवल एक ही शिफ्ट में आयोजित होती है, तो प्रथम प्रश्नपत्र और द्वितीय प्रश्नपत्र के कुल प्राप्त अंकों के आधार पर सीधा पर्सेंटाइल निकाल लिया जाता है, जो सीधे तौर पर स्कोरकार्ड पर दिखाई देता है।
इसके विपरीत, यदि किसी विषय में परीक्षार्थियों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण परीक्षा एक से अधिक पालियों में आयोजित करनी पड़ती है, तो वहाँ ‘इक्वी-पर्सेंटाइल’ यानी सम-प्रतिशतक नॉर्मलाइजेशन पद्धति को लागू किया जाता है। इस परिस्थिति में अंतिम कटऑफ सामान्यीकृत अंकों के आधार पर ही निर्धारित की जाती है ताकि किसी भी विद्यार्थी को नुकसान न हो।
दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त समय और सुविधाएं
शारीरिक रूप से दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए नियमों को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी स्वरूप दिया गया है। जिन उम्मीदवारों के पास निर्धारित मानकों के अनुकूल वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र मौजूद होगा, उन्हें परीक्षा के दौरान प्रत्येक एक घंटे पर बीस मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि तीन घंटे की कुल अवधि वाले सामान्य पेपर में ऐसे योग्य परीक्षार्थियों को पूरे एक घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा। इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित प्रशासनिक नियमों का पूर्ण पालन करते हुए लेखक यानी स्क्राइब की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी परीक्षा पूरी कर सकें।
शुल्क संरचना, लेट फीस, उत्तर कुंजी पर आपत्ति और रिफंड से जुड़े प्रावधानों को भी बिल्कुल स्पष्ट रखा गया है। यदि किसी कारणवश विलंब शुल्क यानी लेट फीस लागू होती है, तो यह पांच सौ रुपये की अतिरिक्त राशि मूल परीक्षा शुल्क के ऊपर देय होगी। परीक्षा संपन्न होने के बाद जब प्रोविजनल आंसर-की जारी की जाती है, तो किसी भी प्रश्न पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रति प्रश्न दो सौ रुपये का शुल्क देना होता है जो कि गैर-वापसीयोग्य होता है।
रिफंड पॉलिसी के संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण भुगतान दो बार कट गया है या फिर ट्रांजेक्शन असफल होने के बावजूद खाते से पैसे कट गए हैं, तो उचित प्रशासनिक सत्यापन के बाद उस संपूर्ण राशि को नियमानुसार संबंधित बैंक खाते में वापस लौटा दिया जाएगा।



















