देश में हर साल लाखों छात्र प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला पाने का सपना देखते हैं और इसके लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी एनआईटी, दोनों ही तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़े नाम माने जाते हैं। संयुक्त प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ये दोनों पूरी तरह सरकारी संस्थान हैं, चार साल की पढ़ाई में कुल कितना खर्च आता है और डिग्री पूरी होने के बाद नौकरी के अवसरों में कितना अंतर रहता है। वर्ष 2027 की प्रवेश परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इन दोनों परिसरों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक स्थिति, फीस संरचना और कैंपस प्लेसमेंट को विस्तार से समझना आवश्यक है।
प्रशासनिक दर्जा और दोनों संस्थानों का ऐतिहासिक स्वरूप
बहुत से लोगों को लगता है कि आईआईटी या एनआईटी में से कोई एक स्वायत्त या निजी व्यवस्था पर चलता है, जबकि वास्तविकता यह है कि दोनों ही भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित होते हैं। इन दोनों को संसद के कानूनों के तहत 'राष्ट्रीय महत्व के संस्थान' का विशेष दर्जा प्राप्त है और ये सीधे केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड पर चलते हैं। हालांकि, दोनों का विकास क्रम और प्रशासनिक ढांचा अलग रहा है।
आईआईटी परिसरों की स्थापना का सिलसिला 1950 के दशक में शुरू हुआ था। इन्हें उच्च स्तरीय शोध और अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी नेतृत्व को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। दूसरी तरफ, एनआईटी परिसरों का इतिहास क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेजों, जिन्हें पहले आरईसी कहा जाता था, से जुड़ा हुआ है। देश के विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित इन कॉलेजों को बाद में अपग्रेड करके राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दर्जा दिया गया। दोनों ही संस्थान केंद्रीय निगरानी में हैं, लेकिन उनकी अकादमिक स्वायत्तता और संचालन बोर्ड अपनी स्वतंत्र नीतियां भी तय करते हैं।
दाखिले की प्रक्रिया और परीक्षा का स्तर
दोनों संस्थानों में प्रवेश पाने की प्रक्रिया में बड़ा फर्क है, जो छात्रों की मेहनत और रणनीति को तय करता है। एनआईटी परिसरों में बीटेक पाठ्यक्रमों में प्रवेश सीधे जेईई मेन की मेरिट सूची और ऑल इंडिया रैंक के आधार पर होता है। इसमें लाखों उम्मीदवारों के बीच शीर्ष पर्सेंटाइल हासिल करने वाले छात्रों को उनकी रैंक के अनुसार सीटें आवंटित की जाती हैं।
वहीं, देश के किसी भी आईआईटी में दाखिला केवल जेईई मेन पास करने से नहीं मिल सकता। छात्रों को पहले जेईई मेन की प्राथमिक पात्रता पूरी करनी होती है और उसके बाद जेईई एडवांस्ड परीक्षा में शामिल होना पड़ता है। जेईई एडवांस्ड में उत्कृष्ट रैंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को ही देश भर के आईआईटी परिसरों में सीट मिलती है। इस दोहरी चयन प्रक्रिया के कारण आईआईटी में प्रवेश का स्तर अपेक्षाकृत अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
चार साल की पढ़ाई का खर्च और फीस का गणित
खर्च की बात करें तो दोनों संस्थानों की कुल फीस में एक निश्चित अंतर देखने को मिलता है, हालांकि यह अंतर बहुत विशाल नहीं है। एक छात्र के चार साल के बीटेक कार्यक्रम के दौरान आने वाला खर्च ट्यूशन फीस, हॉस्टल आवास, मेस और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं पर निर्भर करता है।
- आईआईटी का खर्च: किसी भी आईआईटी में चार साल के बीटेक कोर्स की कुल ट्यूशन फीस, हॉस्टल चार्ज और अन्य विविध खर्च मिलाकर लगभग 8 लाख रुपये से 12 लाख रुपये के बीच बैठते हैं।
- एनआईटी का खर्च: एनआईटी परिसरों में चार साल की बीटेक डिग्री पूरी करने का कुल बजट आमतौर पर 5 लाख रुपये से 8 लाख रुपये के दायरे में रहता है।
सरकारी राहत और ट्यूशन फीस माफी के नियम
कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिभाशाली छात्रों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने दोनों संस्थानों में एक जैसी उदार शुल्क छूट नीति लागू की है। इससे गरीब परिवारों के बच्चों पर उच्च शिक्षा का बोझ नहीं पड़ता है।
सामान्य वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और अन्य पिछड़ा वर्ग गैर-क्रीमी लेयर के जिन छात्रों के परिवार की कुल वार्षिक आय 1 लाख रुपये से कम होती है, उन्हें आईआईटी और एनआईटी दोनों जगह 100 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी का लाभ दिया जाता है। जिन विद्यार्थियों के परिवारों की सालाना आय 1 लाख रुपये से 5 लाख रुपये के बीच होती है, उन्हें ट्यूशन फीस में दो-तिहाई यानी लगभग 66.6 प्रतिशत की छूट मिलती है। इसके अलावा अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) वर्ग के सभी छात्र-छात्राओं के लिए पूरी ट्यूशन फीस शून्य रखी गई है, यानी उन्हें ट्यूशन फीस के रूप में कोई भुगतान नहीं करना होता।
कैंपस प्लेसमेंट और नौकरियों का वास्तविक रिकॉर्ड
डिग्री पूरी होने के बाद करियर के अवसरों और वेतन पैकेज के स्तर पर दोनों संस्थानों में साफ अंतर देखा जा सकता है। यद्यपि दोनों ही परिसरों में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां पहुंचती हैं, लेकिन आईआईटी का रिकॉर्ड वैश्विक स्तर पर थोड़ा मजबूत दिखाई देता है।
देश के पुराने और शीर्ष आईआईटी, जिनमें आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर और आईआईटी खड़गपुर शामिल हैं, में छात्रों का औसत सालाना सैलरी पैकेज 20 लाख रुपये से 30 लाख रुपये के बीच दर्ज किया जाता है। इन परिसरों में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, मेटा और अमेज़न जैसी बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियां भारी संख्या में छात्रों को सीधे विदेशी नियुक्तियों और बड़े पैकेजों पर चुनती हैं।
दूसरी ओर, एनआईटी त्रिची, एनआईटी सुरथकल और एनआईटी वारंगल जैसे प्रमुख एनआईटी परिसरों का प्लेसमेंट प्रदर्शन भी काफी बेहतरीन रहता है। एनआईटी संस्थानों में छात्रों को मिलने वाला औसत सालाना पैकेज आमतौर पर 10 लाख रुपये से 15 लाख रुपये के बीच रहता है। यहां भी प्रमुख टेक और कोर कंपनियां बड़े पैमाने पर रिक्रूटमेंट के लिए पहुंचती हैं। छात्रों को अपनी तैयारी, परीक्षा में आने वाली रैंक और पारिवारिक बजट के अनुसार इन दोनों विकल्पों में से सबसे उपयुक्त संस्थान का चयन करना चाहिए।



















