पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बीजेपी कार्यकर्ता सुजीत मंडल हत्याकांड के मुख्य आरोपी का एनकाउंटर, अस्पताल में मौतपश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में नाबालिग से दुष्कर्म और ब्लैकमेल का मामला, बागुईआटी थाने में शिकायत दर्जराशिफल 29 अक्टूबर: उच्च के चंद्रमा के प्रभाव से 8 राशियों की बदलेगी किस्मत, हर तरफ से मिलेंगे लाभ के संकेतबिक्रम सिंह मजीठिया की कानूनी मुश्किलें गहरी, आय से अधिक संपत्ति मामले में दाखिल हुई सप्लीमेंट्री चार्जशीटसीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान जान गंवाने वालों के परिजनों को मिलेगा 30 लाख मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देशमूलांक 4 दैनिक अंकज्योतिष 29 अक्टूबर: डिजिटल लेन-देन में बरतें सावधानी, जल्दबाजी से बचेंमुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए धारा 18 बनी ढाल, सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्षचार राज्यों के विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस को करारा झटका, बीजेपी और सपा का दबदबाअमेरिकी मध्यावधि चुनावों में एलन मस्क का बड़ा दांव, झोंके 7.6 करोड़ डॉलरमूलांक 2 राशिफल 29 अक्टूबर 2026: दिल की बातों और पैसों के लेन-देन में बरतें सावधानी
पारंपरिक बीए और बीएससी के दिन लदे, अब यह आधुनिक वोकेशनल डिग्री दिलाएगी शत-प्रतिशत रोजगारकरियर
4 सित॰ 2026, 6:25 pm (54 दिन पहले)· 4

पारंपरिक बीए और बीएससी के दिन लदे, अब यह आधुनिक वोकेशनल डिग्री दिलाएगी शत-प्रतिशत रोजगार

बारहवीं कक्षा के बाद पारम्परिक डिग्रियों की दौड़ से आगे निकलकर छात्र अब 'बैचलर ऑफ वोकेशन' यानी बीवॉक की ओर रुख कर रहे हैं। यह तीन वर्षीय पाठ्यक्रम थ्योरी के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर देकर युवाओं को सीधे तौर पर नौकरी के काबिल बनाता है।

बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होते ही विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के सामने भविष्य की दिशा तय करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे पुराने अकादमिक कोर्स अब इस बात की गारंटी नहीं देते कि डिग्री पूरी होते ही रोजगार मिल जाएगा। यही वजह है कि आज के दौर में छात्र ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जहाँ केवल किताबों के पन्ने पलटने तक सीमित न रहना पड़े, बल्कि वास्तविक कार्यकुशलता और व्यावहारिक ज्ञान भी सीखने को मिले। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए 'बैचलर ऑफ वोकेशन' यानी बीवॉक का विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह एक ऐसा त्रि-वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है जो पारंपरिक शिक्षा पद्धति के उलट किताबी ज्ञान से कहीं अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करता है।

शिक्षा नीति और व्यावहारिक पाठ्यक्रम का महत्व

देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद से ही कौशल-आधारित यानी स्किल-बेस्ड कोर्सेस का महत्व कई गुना बढ़ चुका है। शिक्षा और वेलनेस के क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थान क्षेमवन के चीफ वेलनेस ऑफिसर डॉ. नरेंद्र के शेट्टी का इस बारे में कहना है कि यह डिग्री उन युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित होती है जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ सीधे उद्योग जगत की जरूरतों के मुताबिक तैयार होना चाहते हैं। क्षेमवन परिसर में ट्रांस-डिसिप्लिनरी हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से संबद्धता के तहत इन बीवॉक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है, जहाँ छात्रों को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर सीधे जमीनी हकीकत से रूबरू कराया जाता है।

ये भी पढ़ें

पाठ्यक्रम की संरचना और प्रवेश प्रक्रिया

यह तीन साल की अवधि वाला एक ऐसा वोकेशनल डिग्री प्रोग्राम है जिसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी यूजीसी से आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। किसी भी शैक्षणिक स्ट्रीम से बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाला कोई भी विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकता है। पारंपरिक बीए, बीएससी और बीकॉम की पढ़ाई से बिल्कुल अलग, बीवॉक के पूरे पाठ्यक्रम का साठ से सत्तर प्रतिशत हिस्सा केवल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, ऑन-जॉब ट्रेनिंग और इंटर्नशिप पर आधारित होता है। इस पूरी व्यवस्था में केवल तीस से चालीस प्रतिशत समय ही सैद्धांतिक पढ़ाई के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे छात्रों का अधिकांश समय हुनर सीखने में बीतता है।

विशेष प्रशिक्षण और प्रमुख क्षेत्र

व्यावहारिक शिक्षा पर जोर देने की वजह से ही इस कोर्स को पूरा करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के द्वार बहुत आसानी से खुल जाते हैं। क्षेमवन जैसे संस्थानों के भीतर बीवॉक के अंतर्गत मुख्य रूप से दो विशेष कोर्स पढ़ाए जाते हैं, जिनमें पंचकर्म और नेचुरोपैथी थेरेपी के साथ-साथ हॉस्पिटैलिटी का क्षेत्र शामिल है। पंचकर्म और नेचुरोपैथी पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को केवल पन्ने नहीं पढ़ाए जाते, बल्कि विषय विशेषज्ञों की सीधी निगरानी में थेरेपी, योग, ब्यूटी और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट का लाइव क्लिनिकल अनुभव प्रदान किया जाता है। दूसरी तरफ हॉस्पिटैलिटी एंड वेलनेस के क्षेत्र में छात्रों को फ्रंट office, फूड एंड बेवरेज सर्विस, गेस्ट रिलेशंस और वेलनेस टूरिज्म का बिल्कुल वास्तविक समय का अनुभव मिलता है, जिसकी आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारी मांग बनी हुई है।

मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का लचीलापन

इस वोकेशनल पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी असाधारण फ्लेक्सिबिलिटी यानी लचीलापन है। यदि कोई छात्र किसी भी व्यक्तिगत या पारिवारिक कारण से लगातार तीन साल तक अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाता है, तो उसकी पिछली मेहनत और समय बिल्कुल भी व्यर्थ नहीं जाता है। इस व्यवस्था के नियम के अनुसार यदि कोई विद्यार्थी एक साल पूरा कर लेता है तो उसे डिप्लोमा प्रदान किया जाता है, दो साल पूरे होने पर एडवांस डिप्लोमा मिलता है, और यदि वह तीनों साल सफलतापूर्वक पूरे कर लेता है तो उसे पूरी बीवॉक डिग्री से सम्मानित किया जाता है।

करियर की संभावनाएं और नौकरी के अवसर

इस डिग्री को हासिल करने वाले युवाओं के सामने अवसरों का कभी अभाव नहीं रहता है। पंचकर्म और नेचुरोपैथी विषय में बीवॉक की पढ़ाई पूरी करने वाले नौजवान देश-विदेश के नेचुरोपैथी अस्पतालों, स्पा सेंटर्स, रिजॉर्ट्स और वेलनेस सेंटर्स में आसानी से नौकरी पा सकते हैं या फिर खुद अपना वेलनेस स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। इसके विपरीत हॉस्पिटैलिटी से जुड़े ग्रेजुएट्स के लिए बड़े होटल्स, रेस्तरां, इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, एविएशन सेक्टर और हेल्थकेयर हॉस्पिटैलिटी में रोजगार के अनगिनत रास्ते खुल जाते हैं। यदि अभिभावक चाहते हैं कि उनका बच्चा किसी चुनिंदा क्षेत्र में विशेष दक्षता हासिल करे और पढ़ाई समाप्त होते ही नौकरी की पक्की गारंटी मिले, तो यह विकल्प बेहद मुफीद है। हालांकि किसी भी संस्थान में दाखिला दिलाने से पहले माता-पिता को यह अवश्य जांच लेना चाहिए कि वह कॉलेज या यूनिवर्सिटी यूजीसी से मान्यता प्राप्त हो और उसके पास छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए बेहतरीन इंडस्ट्री पार्टनर्स मौजूद हों।

सवाल-जवाब

बीवॉक कोर्स क्या है?
बीवॉक यानी बैचलर ऑफ वोकेशन तीन साल की एक अंडरग्रेजुएट डिग्री है जो थ्योरी के बजाय प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और स्किल सीखने पर जोर देती है।
बीवॉक में एडमिशन के लिए क्या योग्यता चाहिए?
किसी भी स्ट्रीम से बारहवीं कक्षा पास करने वाला कोई भी स्टूडेंट इस वोकेशनल डिग्री कोर्स में एडमिशन ले सकता है।
बीवॉक कोर्स में प्रैक्टिकल की पढ़ाई कितने प्रतिशत होती है?
इस कोर्स के सिलेबस में साठ से सत्तर प्रतिशत फोकस प्रैक्टिकल, ऑन-जॉब ट्रेनिंग और इंटर्नशिप पर होता है।
क्या बीवॉक कोर्स को यूजीसी की मान्यता प्राप्त है?
हाँ, यह तीन साल का वोकेशनल डिग्री प्रोग्राम यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन से मान्यता प्राप्त है।
कोर्स पूरा न होने पर क्या पढ़ाई बेकार जाती है?
नहीं, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के तहत एक साल पर डिप्लोमा और दो साल पूरे होने पर एडवांस डिप्लोमा मिलता है।
बीवॉक के तहत कौन से प्रमुख कोर्स पढ़ाए जाते हैं?
इसके तहत मुख्य रूप से पंचकर्म और नेचुरोपैथी थेरेपी तथा हॉस्पिटैलिटी एंड वेलनेस जैसे कोर्स पढ़ाए जाते हैं।
बीवॉक पास करने के बाद छात्र कहाँ नौकरी पा सकते हैं?
ग्रेजुएट्स नेचुरोपैथी अस्पतालों, स्पा, रिजॉर्ट, वेलनेस सेंटर्स, होटलों और इवेंट मैनेजमेंट में जॉब कर सकते हैं।
एडमिशन से पहले पेरेंट्स को क्या जांचना चाहिए?
पेरेंट्स को यह जांच लेना चाहिए कि कॉलेज यूजीसी से मान्यता प्राप्त हो और उसके पास अच्छे इंडस्ट्री पार्टनर्स हों।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp