पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बीजेपी कार्यकर्ता सुजीत मंडल हत्याकांड के मुख्य आरोपी का एनकाउंटर, अस्पताल में मौतपश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में नाबालिग से दुष्कर्म और ब्लैकमेल का मामला, बागुईआटी थाने में शिकायत दर्जराशिफल 29 अक्टूबर: उच्च के चंद्रमा के प्रभाव से 8 राशियों की बदलेगी किस्मत, हर तरफ से मिलेंगे लाभ के संकेतबिक्रम सिंह मजीठिया की कानूनी मुश्किलें गहरी, आय से अधिक संपत्ति मामले में दाखिल हुई सप्लीमेंट्री चार्जशीटसीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान जान गंवाने वालों के परिजनों को मिलेगा 30 लाख मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देशमूलांक 4 दैनिक अंकज्योतिष 29 अक्टूबर: डिजिटल लेन-देन में बरतें सावधानी, जल्दबाजी से बचेंमुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए धारा 18 बनी ढाल, सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने रखा अपना पक्षचार राज्यों के विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस को करारा झटका, बीजेपी और सपा का दबदबाअमेरिकी मध्यावधि चुनावों में एलन मस्क का बड़ा दांव, झोंके 7.6 करोड़ डॉलरमूलांक 2 राशिफल 29 अक्टूबर 2026: दिल की बातों और पैसों के लेन-देन में बरतें सावधानी
सहानुभूति के नाम पर आईआईटी प्रवेश नियमों में नहीं मिल सकती ढील, दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसलाकरियर
4 अक्तू॰ 2026, 10:43 am (25 दिन पहले)· 3

सहानुभूति के नाम पर आईआईटी प्रवेश नियमों में नहीं मिल सकती ढील, दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने जेईई अभ्यर्थी आशी अग्रवाल की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मूल्यांकन विवाद या तकनीकी दिक्कतों के आधार पर आईआईटी प्रवेश नियमों को नहीं बदला जा सकता।

देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में दाखिला पाना लाखों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों का सपना होता है। इसके लिए छात्र वर्षों तक कड़ी तैयारी करते हैं, कई मॉक टेस्ट देते हैं और कठिन प्रतिस्पर्धा से गुजरते हैं। हालांकि, जब कोई अभ्यर्थी मूल्यांकन विवादों, तकनीकी अड़चनों या पात्रता शर्तों के चलते प्रवेश से वंचित रह जाता है, तो कई बार अदालतों का रुख किया जाता है। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के सामने ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें अदालत ने साफ किया कि व्यक्तिगत कठिनाइयों या सहानुभूति के आधार पर स्थापित प्रवेश नियमों को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

आईआईटी दिल्ली में दाखिले की मांग लेकर अदालत पहुंची थीं छात्रा

यह मामला जेईई अभ्यर्थी आशी अग्रवाल से जुड़ा है, जिन्होंने आईआईटी दिल्ली में प्रवेश पाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि जेईई मेन परीक्षा के दौरान कुछ प्रश्नों के मूल्यांकन में गंभीर खामियां थीं। छात्रा का दावा था कि भौतिकी और रसायन विज्ञान के कुछ प्रश्नों के अंक अनुचित तरीके से काटे गए, जिसके कारण वह निर्धारित कटऑफ अंक हासिल करने से चूक गईं। कटऑफ पार न कर पाने की वजह से वह जेईई एडवांस्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए पात्र नहीं मानी गईं। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थी ने परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय पर पहुंचने के बाद भी प्रवेश न दिए जाने और कंप्यूटर सिस्टम के ऑडिट लॉग में गड़बड़ी होने के आरोप भी लगाए थे। इन आधारों पर याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें आईआईटी में एक सुपरन्यूमरेरी सीट आवंटित की जाए।

ये भी पढ़ें

रिट याचिका के तहत तकनीकी जांच की सीमाओं पर अदालत का रुख

इस मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस जसमीत सिंह ने याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि रिट याचिका के सीमित अधिकार क्षेत्र के तहत ऑडिट लॉग और तकनीकी गड़बड़ियों जैसे जटिल तथ्यात्मक विवादों की पड़ताल नहीं की जा सकती। अदालत ने समझाया कि याचिकाकर्ता को सीट दिलाने के लिए अनुमानों की एक लंबी श्रृंखला पर निर्भर होना पड़ेगा। इसके तहत पहले मूल्यांकन में गड़बड़ी सिद्ध करनी होगी, फिर अंकों में संशोधन का परिणाम तय करना होगा, उसके बाद जेईई एडवांस्ड की पात्रता तय होगी और तब जाकर प्रवेश पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने माना कि ऐसी काल्पनिक संभावनाओं के सहारे पूरी प्रवेश व्यवस्था को दोबारा नहीं खोला जा सकता।

जेईई एडवांस्ड के पात्रता नियम और परीक्षा का अनुशासन

अदालत ने इस मामले में पात्रता संबंधी बुनियादी नियमों पर भी कड़ा रुख अपनाया। प्रवेश दिशानिर्देशों के अनुसार, जेईई एडवांस्ड में वही उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं जिन्होंने उसी वर्ष या उससे ठीक एक वर्ष पहले अपनी बारहवीं कक्षा पहली बार उत्तीर्ण की हो। याचिकाकर्ता छात्रा बारहवीं कक्षा पास करने के वर्ष से जुड़े इस अनिवार्य मानदंड को पूरा नहीं कर पा रही थीं। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्धारित नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होते हैं और किसी एक अभ्यर्थी के लिए इनमें विशेष छूट नहीं दी जा सकती। अदालत के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और सख्त अनुशासन बनाए रखने के लिए नियमों का अक्षरशः पालन अनिवार्य है।

सवाल-जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट में आशी अग्रवाल ने क्या मांग रखी थी?
याचिकाकर्ता ने जेईई परीक्षा में मूल्यांकन और तकनीकी गड़बड़ियों का दावा करते हुए आईआईटी दिल्ली में सुपरन्यूमरेरी सीट दिए जाने की मांग की थी।
अदालत ने याचिका को क्यों खारिज कर दिया?
जस्टिस जसमीत सिंह ने स्पष्ट किया कि रिट याचिका में तकनीकी ऑडिट लॉग की जांच नहीं हो सकती और अनुमानों के आधार पर प्रवेश नियमों में ढील नहीं दी जा सकती।
जेईई एडवांस्ड के लिए 12वीं पास करने का क्या नियम है?
नियमों के अनुसार अभ्यर्थी का उसी वर्ष या उससे ठीक एक वर्ष पहले पहली बार 12वीं कक्षा पास होना अनिवार्य है।
क्या सहानुभूति के आधार पर आईआईटी में सीट मिल सकती है?
नहीं, अदालत ने साफ कर दिया है कि प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और समानता बनाए रखने के लिए किसी को व्यक्तिगत सहानुभूति पर छूट नहीं दी जा सकती।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp