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सप्ताह में सिर्फ 35 घंटे काम: जानिए भारत से लेकर फ्रांस तक दुनिया भर में कामकाजी घंटों के क्या हैं नियमकरियर
16 अक्तू॰ 2026, 12:18 am (13 दिन पहले)· 1

सप्ताह में सिर्फ 35 घंटे काम: जानिए भारत से लेकर फ्रांस तक दुनिया भर में कामकाजी घंटों के क्या हैं नियम

ब्राजील में काम के घंटे 44 से घटाकर 40 किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर कामकाजी नीतियों पर चर्चा छिड़ गई है, जहां फ्रांस में सबसे कम 35 घंटे काम होता है।

दुनिया भर में कार्यस्थलों की कार्यसंस्कृति और कर्मचारियों के कामकाजी घंटों को लेकर नियम बेहद अलग हैं। कहीं काम के लंबे घंटे तय हैं, तो कहीं कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सप्ताह में सीमित समय तक ही दफ्तर में समय बिताना पड़ता है। हाल ही में ब्राजील द्वारा लिए गए एक बड़े नीतिगत फैसले ने वैश्विक मंच पर काम के घंटों की इस बहस को फिर से तेज कर दिया है। विभिन्न देशों में काम के साप्ताहिक घंटे, काम के दिन और अतिरिक्त समय में काम करने पर मिलने वाले भत्तों को लेकर कड़े और स्पष्ट कानून बनाए गए हैं।

ब्राजील में काम के घंटों में ऐतिहासिक कटौती

लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में श्रम कानूनों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ब्राजील में पहले एक सप्ताह के दौरान कुल 44 घंटे काम करने का प्रावधान था, जिसे अब आधिकारिक रूप से घटाकर 40 घंटे प्रति सप्ताह कर दिया गया है। ब्राजील की सीनेट के अनुसार, इस सुधार का सीधा असर देश के लगभग 3.7 करोड़ कामकाजी लोगों पर पड़ेगा और इससे उनके जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी। इस पूरी प्रक्रिया को रातों-रात लागू करने के बजाय अगले 14 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से विभिन्न कार्य क्षेत्रों में अमल में लाया जाएगा, ताकि कंपनियों और उद्योगों को नए ढांचे के अनुरूप ढलने का पर्याप्त समय मिल सके।

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भारत में कामकाजी घंटों की जमीनी हकीकत

भारतीय कार्य संस्कृति की बात करें तो यहां आमतौर पर सप्ताह में 6 कार्यदिवस की व्यवस्था देखने को मिलती है। सामान्य नियमों के अनुसार कर्मचारियों से हफ्ते में कुल 48 घंटे काम लिया जाता है, जहां हर दिन की शिफ्ट औसतन 8 घंटे की होती है। दूसरी ओर, संगठित कॉरपोरेट जगत में नियम थोड़े अलग हैं। निजी कॉरपोरेट दफ्तरों में रोजाना 9 घंटे की शिफ्ट चलती है और कर्मचारियों को सप्ताह में 2 दिन का साप्ताहिक अवकाश मिलता है। इस व्यवस्था के तहत कॉरपोरेट क्षेत्र के कर्मचारी सप्ताह में 45 घंटे ही काम करते हैं। हालांकि, असंगठित और विनिर्माण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग अब भी 6 दिन और 48 घंटे के पुराने मॉडल पर ही काम कर रहे हैं।

फ्रांस में सबसे कम कामकाजी घंटे

वैश्विक स्तर पर यदि सबसे कम समय तक काम करने वाले मुल्कों की सूची देखी जाए, तो फ्रांस का नाम सबसे ऊपर आता है। फ्रांस में पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए कानूनी तौर पर प्रति सप्ताह मात्र 35 घंटे काम करने का अनिवार्य प्रावधान किया गया है। यदि कोई कंपनी अपने कर्मचारियों से 35 घंटे से अधिक समय तक काम लेती है, तो उसे नियमानुसार ओवरटाइम भत्ते का भुगतान करना पड़ता है। हालांकि यह व्यवस्था बिल्कुल पत्थर की लकीर नहीं है, क्योंकि अलग-अलग उद्योग और कंपनियां अपनी आंतरिक नीतियों और सामूहिक समझौतों के आधार पर इन घंटों को लचीला भी बना सकती हैं।

ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम में 38 घंटे का मानक

कम कामकाजी घंटों के मामले में ऑस्ट्रेलिया भी अग्रणी देशों में शामिल है। ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय रोजगार मानकों के तहत पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए सामान्य कामकाजी समय 38 घंटे प्रति सप्ताह तय किया गया है। कंपनियां काम की आवश्यकता के आधार पर इसमें मामूली बदलाव कर सकती हैं, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में 38 घंटे का नियम ही कड़ाई से प्रभावी रहता है।

यूरोपीय देश बेल्जियम में भी ऑस्ट्रेलिया की तरह प्रति सप्ताह अधिकतम 38 घंटे काम करने की कानूनी सीमा निर्धारित की गई है। यहां एक दिन में अधिकतम 8 घंटे काम कराया जा सकता है और इससे अधिक काम कराने पर उसे अतिरिक्त समय माना जाता है। बेल्जियम में ओवरटाइम को लेकर नियम काफी कड़े हैं। यदि कर्मचारी से शनिवार या किसी अन्य सामान्य कार्यदिवस पर अतिरिक्त काम लिया जाता है, तो उसे सामान्य वेतन की तुलना में डेढ़ गुना भुगतान किया जाता है। वहीं यदि ओवरटाइम रविवार या किसी सरकारी अवकाश के दिन कराया जाता है, तो नियोक्ता को सामान्य सैलरी की तुलना में दोगुना पैसा चुकाना पड़ता है।

डेनमार्क में काम के घंटे और अतिरिक्त वेतन

डेनमार्क भी अपने कर्मचारियों के अनुकूल श्रम नीतियों के लिए जाना जाता है। इस यूरोपीय देश में काम के घंटे प्रति सप्ताह 37 तय किए गए हैं। 37 घंटे की तय सीमा से ऊपर काम कराने पर ओवरटाइम के रूप में अतिरिक्त भुगतान देना अनिवार्य है। यद्यपि डेनमार्क के सभी क्षेत्रों में ओवरटाइम का नियम एक समान तरीके से लागू नहीं होता, लेकिन सामान्य नियम के अनुसार अतिरिक्त काम के लिए सामान्य दिनों के वेतन की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा यानी डेढ़ गुना राशि का भुगतान किया जाता है।

अमेरिका और चीन में 40 घंटे की व्यवस्था

दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों, यानी संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन में काम के साप्ताहिक घंटे समान रूप से 40 तय किए गए हैं। हालांकि, अतिरिक्त काम के मामले में दोनों देशों के कायदे अलग हैं। चीन में यदि किसी कर्मचारी से दिन में 9 घंटे से ज्यादा काम कराया जाता है, तो उसका ओवरटाइम उसी समय से जुड़ना शुरू हो जाता है। वहीं अमेरिका में श्रम नीतियां अलग-अलग राज्यों के अपने कानूनों के आधार पर संचालित होती हैं। दोनों ही मुल्कों में एक समानता यह है कि ओवरटाइम का भुगतान सामान्य दैनिक या प्रति घंटा सैलरी के मुकाबले डेढ़ गुना की दर से किया जाता है।

सवाल-जवाब

ब्राजील में काम के घंटों को लेकर क्या नया नियम बना है?
ब्राजील में सप्ताह में काम के घंटों को 44 से घटाकर 40 घंटे कर दिया गया है, जिसे अगले 14 महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
दुनिया में सबसे कम कामकाजी घंटे किस देश में हैं?
फ्रांस में कानूनी तौर पर पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए सप्ताह में सबसे कम मात्र 35 घंटे काम करने का प्रावधान है।
भारत में काम के सामान्य और कॉरपोरेट घंटे क्या हैं?
भारत में सामान्य तौर पर 6 दिन में 48 घंटे काम होता है, जबकि कॉरपोरेट सेक्टर में 9 घंटे की शिफ्ट और 2 दिन के अवकाश के साथ सप्ताह में 45 घंटे काम किया जाता है।
बेल्जियम में अतिरिक्त काम पर कितना भुगतान मिलता है?
बेल्जियम में सामान्य दिनों या शनिवार को अतिरिक्त काम करने पर डेढ़ गुना, जबकि रविवार या छुट्टी के दिन काम करने पर दोगुना वेतन दिया जाता है।
अमेरिका और चीन में सप्ताह में कितने घंटे काम करना होता है?
अमेरिका और चीन दोनों ही देशों में सप्ताह में सामान्य रूप से 40 घंटे काम करने का कानूनी प्रावधान है।
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टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·12 दिन पहले

पेरिस में जब मैं कुछ हफ्ते था, तो शुक्रवार दोपहर बाद दफ्तर बिल्कुल सुनसान हो जाते थे। लोग सचमुच परिवार और वीकेंड की तैयारी में लग जाते हैं। भारत में तो ऐसा सोचना भी मुश्किल है जहाँ रात-रात भर लैपटॉप खुले रहते हैं।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·12 दिन पहले

काम के घंटे कम होना अच्छा है, पर भारत जैसे बड़े देशों में जहाँ ज़्यादातर लोग असंगठित क्षेत्र में हैं, ये नियम ज़मीन पर लागू कैसे होंगे? कागज़ पर कानून बनाने से तो कुछ नहीं बदलेगा जब तक सख्ती न हो।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·12 दिन पहले

पूजा जी, आपकी बात सही है। भारत में असंगठित क्षेत्र का दायरा इतना बड़ा है कि सरकार इस 48 घंटे के नियम को हकीकत में कैसे लागू करवाएगी?

Divya Reddy@divya-reddy·12 दिन पहले

फ्रांस में हफ्ते में सिर्फ पैंतीस घंटे काम का नियम वाकई कमाल है, काश यहाँ भी ऐसा कुछ हो सके।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·12 दिन पहले

दिव्या जी, पेरिस में जब मैंने ग्राउंड कवरिंग के दौरान वहां के पत्रकारों को 35 घंटे बाद ऑफिस से निकलते देखा था, तो सचमुच लगा था कि जिंदगी काम से बाहर भी होती है।

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