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सरकारी नौकरी पाने की राह अब पहले से आसान, यूपीएससी और एसएससी ने भर्ती चक्र छोटा कियाकरियर
1 अग॰ 2026, 9:57 am (89 दिन पहले)· 0

सरकारी नौकरी पाने की राह अब पहले से आसान, यूपीएससी और एसएससी ने भर्ती चक्र छोटा किया

कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में बताया कि यूपीएससी और एसएससी ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े सुधार किए हैं, जिससे एसएससी की भर्ती 15-18 महीने से घटकर 6-8 महीने और यूपीएससी की भर्ती 15 महीने से घटकर 13 महीने में पूरी होगी।

लंबे समय से सरकारी नौकरी के इंतजार में समय जाया करने वाले लाखों युवाओं के लिए राहत भरी खबर है। फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा, रिजल्ट और आखिर में जॉइनिंग लेटर तक की पूरी प्रक्रिया अक्सर दो साल से भी ज्यादा खिंच जाती थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। यह सुधार खासतौर पर उन उम्मीदवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर साल भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करते हुए अपनी उम्र और मौके गंवाते रहते हैं। कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में बताया कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के कामकाज के तरीके में बड़े सुधार किए गए हैं, जिनका सीधा फायदा नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को मिलेगा।

एसएससी की भर्ती अब सिमटकर 6 से 8 महीने में

अब तक एसएससी की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में औसतन 15 से 18 महीने का समय लग जाता था। नए सुधारों के बाद यह समय घटकर सिर्फ 6 से 8 महीने रह जाएगा। इसके लिए एसएससी ने अपनी सभी परीक्षाओं को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी मोड में शिफ्ट कर दिया है। सीबीटी मोड में परीक्षा होने से रिजल्ट तैयार करने और आगे की प्रक्रिया शुरू करने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाता है। साथ ही, भर्ती प्रक्रिया के उन चरणों को हटाया गया है जिनका कोई खास मतलब नहीं रह गया था। कागजी कार्रवाई में लगने वाला वक्त बचाने के लिए 'ई-डॉजियर' नाम की एक नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट और दस्तावेजों का सत्यापन अब पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगा। इससे फाइलें दफ्तरों में महीनों तक अटकी नहीं रहेंगी और वेरिफिकेशन की रफ्तार बढ़ जाएगी।

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खाली नहीं बचेंगी सीटें, स्लाइडिंग मैकेनिज्म से मिलेगा फायदा

भर्ती प्रक्रिया में अक्सर यह देखने को मिलता था कि कोई एक मेधावी उम्मीदवार एक साथ कई पदों के लिए चुन लिया जाता था, लेकिन वह अंत में सिर्फ एक ही पद स्वीकार करता था और बाकी पद खाली रह जाते थे। पहले ऐसी खाली सीटों को भरने के लिए अक्सर अलग से भर्ती प्रक्रिया चलानी पड़ती थी, जिसमें और समय बर्बाद होता था। इस समस्या को दूर करने के लिए एसएससी ने 'स्लाइडिंग मैकेनिज्म' नाम का एक नया ढांचा शुरू किया है। इसके जरिए मेरिट सूची में नीचे के पायदान पर मौजूद उम्मीदवारों को अपग्रेड करके इन खाली सीटों पर भर्ती की जा सकेगी, जिससे कोई भी वैकेंसी बेकार नहीं जाएगी और ज्यादा उम्मीदवारों को नौकरी मिलने का मौका मिलेगा।

यूपीएससी में एआई वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन की एंट्री

संघ लोक सेवा आयोग ने भी अपने भर्ती चक्र को 15 महीने से घटाकर 13 महीने कर दिया है। परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए यूपीएससी ने हाई-टेक तरीके अपनाए हैं। सिविल सेवा परीक्षा यानी सीएसई में अब एआई आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया गया है, जो हर उम्मीदवार के परीक्षा में बैठने के प्रयासों यानी अटेम्प्ट्स का सटीक रिकॉर्ड रखेगा। इसके अलावा परीक्षा हॉल में किसी दूसरे व्यक्ति की जगह बैठकर परीक्षा देने वालों यानी मुन्नाभाइयों को रोकने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन यानी चेहरा पहचान की तकनीक अनिवार्य कर दी गई है।

प्रोविजनल जॉइनिंग और वेरिफिकेशन के लिए 6 महीने की समयसीमा

वेरिफिकेशन के नाम पर लगने वाली देरी को खत्म करने के लिए सरकार ने एक अहम प्रावधान जोड़ा है। अब सेल्फ अटेस्टेशन यानी स्वयं सत्यापन के आधार पर उम्मीदवारों को प्रोविजनल जॉइनिंग लेटर दिया जा सकेगा। चरित्र प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन के लिए संबंधित विभागों को अधिकतम 6 महीने का समय तय कर दिया गया है। अगर तय समय में वेरिफिकेशन रिपोर्ट नहीं आती है, तो भी इसका असर उम्मीदवार की सेवा पर नहीं पड़ेगा, यानी उसकी नौकरी अटकेगी नहीं।

उम्मीदवारों के लिए और राहत, घटी चैलेंज फीस और मिला केंद्र चुनने का अधिकार

पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से यूपीएससी ने उत्तर कुंजी यानी आंसर की जारी होने के बाद उस पर आपत्ति दर्ज कराने की फीस भी घटा दी है। इसके अलावा दिव्यांग उम्मीदवारों यानी पीडब्ल्यूडी कैंडिडेट्स को अब अपनी पसंद का परीक्षा केंद्र चुनने की गारंटी दी गई है। सरकार का कहना है कि इन तमाम कदमों से न सिर्फ प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम से फर्जीवाड़े पर भी लगाम लगेगी। इन बदलावों से देश भर के उन लाखों युवाओं को राहत मिलेगी, जो सालों-साल सिर्फ एक सरकारी नौकरी के फाइनल रिजल्ट का इंतजार करते रह जाते थे।

सवाल-जवाब

एसएससी की भर्ती प्रक्रिया में अब कितना समय लगेगा?
पहले 15 से 18 महीने लगते थे, अब यह घटकर 6 से 8 महीने रह जाएगा।
यूपीएससी का भर्ती चक्र कितना छोटा हुआ है?
यूपीएससी का भर्ती चक्र 15 महीने से घटाकर 13 महीने कर दिया गया है।
ई-डॉजियर सिस्टम क्या है?
यह एक डिजिटल व्यवस्था है जिसके तहत उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट और दस्तावेजों का सत्यापन कागजी काम की बजाय डिजिटल तरीके से किया जाएगा।
स्लाइडिंग मैकेनिज्म कैसे काम करेगा?
जब कोई मेधावी उम्मीदवार एक पद स्वीकार कर बाकी सीटें खाली छोड़ता है, तो मेरिट सूची में नीचे के उम्मीदवारों को अपग्रेड कर उन सीटों को भरा जाएगा।
यूपीएससी परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
सिविल सेवा परीक्षा में एआई आधारित वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य किया गया है।
वेरिफिकेशन में देरी होने पर क्या उम्मीदवार की नौकरी पर असर पड़ेगा?
नहीं, चरित्र और जाति प्रमाण पत्र वेरिफिकेशन के लिए विभागों को अधिकतम 6 महीने का समय दिया गया है और देरी होने पर भी उम्मीदवार की सेवा पर असर नहीं पड़ेगा।
इन सुधारों की जानकारी संसद में किसने दी?
कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में इन सुधारों की जानकारी दी।
दिव्यांग उम्मीदवारों को क्या नई सुविधा मिली है?
उन्हें अब अपनी पसंद का परीक्षा केंद्र चुनने की गारंटी दी गई है।
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