ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) ने अपने स्नातकोत्तर (पीजी) शिक्षा ढांचे का विस्तार करते हुए भारत सरकार के डिजिटल शिक्षण मंच SWAYAM के साथ साझेदारी की है। पहली बार विश्वविद्यालय के पीजी पाठ्यक्रमों को इस केंद्रीय पोर्टल से जोड़ा गया है। जुलाई-दिसंबर 2026 सत्र के तहत चार अलग-अलग अध्ययन विभागों में नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के इच्छुक विद्यार्थी 31 अगस्त तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण पूरा कर सकते हैं।
विभागवार पाठ्यक्रम और नोडल समन्वयकों की सूची
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार चार प्रमुख विभागों में यह आधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) विभाग में ‘एडवांस इन इंस्ट्रुमेंटेशन एंड केमिकल डेटा एनालिस’ पाठ्यक्रम शामिल किया गया है, जिसकी कमान नोडल कोऑर्डिनेटर डॉ. मोनी शर्मा को सौंपी गई है। वहीं भौतिकी (फिजिक्स) विभाग में ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम: कॉन्सेप्ट्स एंड एप्लीकेशन इन इंजीनियरिंग’ पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिसके नोडल कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपक कुमार हैं।
इसके अलावा भूगोल (जियोग्राफी) विभाग के अंतर्गत ‘डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट’ पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जिसकी नोडल जिम्मेदारी डॉ. रश्मि शिखा संभालेंगी। वाणिज्य (कॉमर्स) विभाग में युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से ‘एंटरप्रेन्योरशिप’ पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जिसकी नोडल कोऑर्डिनेटर डॉ. निर्मला कुशवाहा बनाई गई हैं।
क्रेडिट ट्रांसफर और उच्च गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री के लाभ
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने इस नई पहल के लाभ बताते हुए कहा कि SWAYAM से जुड़ने के कारण एलएनएमयू के छात्रों को देश भर के शीर्ष शिक्षण संस्थानों के अनुभवी प्राध्यापकों द्वारा तैयार की गई शिक्षण सामग्री उपलब्ध होगी। विद्यार्थी अपनी सुविधानुसार किसी भी समय पढ़ाई कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) प्रणाली के तहत विद्यार्थियों को अर्जित अंक और क्रेडिट आसानी से ट्रांसफर करने की सुविधा भी मिलेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और रोजगार के नए अवसर
आईक्यूएसी (IQAC) के निदेशक डॉ. मो. जिया हैदर ने बताया कि यह कदम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने का प्रयास है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए संस्थागत प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से मिथिला विश्वविद्यालय के छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के देश के प्रमुख संस्थानों का स्तरीय पाठ्यक्रम पढ़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके लिए उच्च शोध और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।



















