देशभर में यूनिवर्सिटी प्रोफेसर का पेशा सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानजनक माना जाता है। अच्छी सैलरी, शानदार कार्य संस्कृति और शोध के बेहतरीन माहौल की वजह से लाखों युवा नेट और पीएचडी की तैयारी में अपने कई साल झोंक देते हैं। हालांकि, जो लोग अपनी पढ़ाई किसी वजह से देर से पूरी कर पाते हैं या फिर किसी अन्य सेक्टर से निकलकर शिक्षण के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं, उनके मन में अक्सर एक बड़ा सवाल रहता है कि क्या इस सफर की शुरुआत के लिए कोई उम्र सीमा तय की गई है?
आम सरकारी नौकरियों में आमतौर पर 30 या 35 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा देखने को मिलती है, जिस कारण बहुत से उम्मीदवारों को यह गलतफहमी हो जाती है कि इस उम्र के बाद प्रोफेसर बनना नामुमकिन है। अगर आपके मन में भी उम्र को लेकर इस तरह का कोई भ्रम है, तो उसे दूर कर लीजिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियमित प्रोफेसर की सीधी भर्ती का गणित सामान्य सरकारी नौकरियों से काफी अलग होता है। आइए जानते हैं कि प्रोफेसर बनने के लिए आयु, पात्रता और प्रमोशन के क्या नियम तय किए गए हैं।
क्या प्रोफेसर बनने के लिए अधिकतम आयु सीमा तय की गई है?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है। कोई भी योग्य उम्मीदवार 35, 40 या फिर 45 साल की उम्र में भी पहली बार यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी पा सकता है। यहाँ एकमात्र शर्त यह होती है कि उम्मीदवार यूनिवर्सिटी के तय रिटायरमेंट नियमों, जो कि आमतौर पर 65 वर्ष हैं, से पहले आवेदन कर रहा हो और अपनी सेवा शुरू कर रहा हो।
जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी जेआरएफ के लिए जरूर आयु सीमा लागू होती है, जहाँ अधिकतम उम्र 30 वर्ष तय की गई है और आरक्षित तथा महिला वर्गों के लिए 5 साल की छूट दी जाती है। लेकिन केवल नेट सर्टिफिकेट हासिल करने या असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में पात्रता पाने के लिए ऐसी कोई उम्र की बंदिश नहीं होती है। वहीं, कुछ राज्यों के सरकारी डिग्री कॉलेजों में राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती के दौरान आयु सीमा 38 से 40 वर्ष तक रखी जाती है, लेकिन केंद्रीय या राज्य विश्वविद्यालयों में इस तरह की कोई रोक नहीं होती है।
प्रोफेसर बनने के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता
यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने की पूरी यात्रा मूल रूप से तीन मुख्य चरणों में आगे बढ़ती है। सबसे पहले शुरुआती स्तर पर असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होनी चाहिए, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को 5 प्रतिशत की छूट का प्रावधान मिलता है। इसके साथ ही यूजीसी नेट, सीएसआईआर नेट या फिर राज्य स्तर की सेट और स्लेट परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। हालांकि, जिन उम्मीदवारों ने वर्ष 2009 या 2016 के यूजीसी रेग्यूलेशन के तहत नियमित माध्यम से पीएचडी की है, उन्हें नेट परीक्षा से छूट मिल जाती है।
इसके अगले चरण में एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए उम्मीदवार के पास शिक्षण या शोध का कम से कम 8 साल का अनुभव होना जरूरी है और साथ ही उनके नाम पर कम से कम 7 अच्छे रिसर्च पेपर पब्लिश होने चाहिए। इसके बाद प्रोफेसर के सर्वोच्च पद के लिए न्यूनतम 10 साल का कुल शिक्षण या शोध अनुभव अनिवार्य माना गया है। इसके अलावा, कम से कम 10 उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रकाशित होने चाहिए और उम्मीदवार के पास सफलतापूर्वक पीएचडी गाइड करने का व्यावहारिक अनुभव भी होना चाहिए।
प्रोफेसर के लिए प्रमोशन और रिटायरमेंट के नियम
किसी भी यूनिवर्सिटी के भीतर शिक्षकों का प्रमोशन मुख्य रूप से करियर एडवांसमेंट स्कीम यानी कैस के नियमों के आधार पर तय किया जाता है। यदि आप असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत करते हैं, तो आपका पूरा करियर ग्राफ एक निश्चित प्रक्रिया से आगे बढ़ता है। प्रमोशन का मुख्य जरिया एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर स्कोर और कैस के नियम होते हैं, जिसके तहत असिस्टेंट प्रोफेसर लेवल 10 से प्रमोट होकर लेवल 11 और 12 में पहुंचते हैं, उसके बाद एसोसिएट प्रोफेसर यानी लेवल 13ए बनते हैं और अंत में फुल प्रोफेसर यानी लेवल 14 के पद पर पहुँचते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में रिसर्च के काम, टीचिंग के घंटे और पब्लिकेशन की संख्या की भूमिका सबसे अहम होती है।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर पद से रिटायरमेंट की आयु सीमा 65 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके बावजूद, यदि रिटायरमेंट के बाद भी किसी प्रोफेसर की कार्यकुशलता और सेहत बेहतरीन रहती है, तो यूनिवर्सिटी उन्हें 70 वर्ष की आयु तक री-अपॉइंटमेंट या फिर प्रोफेसर एमेरिटस के रूप में पढ़ाने का विशेष अवसर प्रदान कर सकती है।



















