अक्टूबर के महीने से भारत में फेस्टिव सीजन रफ्तार पकड़ने जा रहा है और इसके साथ ही देश के युवाओं के लिए कमाई के शानदार रास्ते खुलने वाले हैं। डिजिटल टैलेंट और ग्लोबल तकनीकी समाधान देने वाली कंपनी एनएलबी सर्विसेज के ताजा अध्ययन के अनुसार, इस साल त्योहारी दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर करीब 2.5 लाख नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। जुलाई से दिसंबर 2026 की छमाही के दौरान करीब दो से 2.5 लाख मौसमी और गिग नियुक्तियां सामने आने की संभावना है, जिससे त्योहारी सीजन की कुल भर्ती प्रक्रिया में 15 से 20 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की जा सकती है।
बाजार में गिग वर्कर्स उन कर्मचारियों को कहा जाता है जो ई-कॉमर्स या संबंधित कंपनियों के लिए अस्थायी अनुबंध या जरूरत के आधार पर सेवाएं देते हैं। त्योहारी मांग चरम पर पहुंचने की संभावना को देखते हुए ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, यात्रा और कंज्यूमर सर्विसेज से जुड़ी सभी प्रमुख कंपनियां वर्ष के इस सबसे व्यस्त समय के लिए अभी से कमर कस रही हैं। एनएलबी सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एपीएसी प्रमुख वरुण सचदेवा के मुताबिक, त्योहारों का यह दौर भारत के रोजगार बाजार के लिए एक सख्त परीक्षा की तरह बन गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि भर्तीकर्ता अब पहले से ही चयन प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और पुराने ढर्रे के रोजगार केंद्रों से बाहर निकलकर तकनीक में दक्ष, कार्यकुशल और त्वरित रूप से तैनात किए जा सकने वाले कार्यबल पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।
शॉर्ट टर्म जरूरत से आगे बढ़कर प्रतिभा परखने का मंच बने त्योहार
उद्योग जगत के नजरिए में आए इस बड़े बदलाव पर बात करते हुए वरुण सचदेवा ने स्पष्ट किया कि त्योहारों में आने वाली अचानक मांग को संभालना अब महज कुछ हफ्तों की तात्कालिक जरूरत तक सीमित नहीं रह गया है। असल में यह कंपनियों के लिए नए प्रतिभा समूहों तक सीधे पहुंचने, बड़े पैमाने पर उनकी कार्यक्षमता का आकलन करने और आगे चलकर उन्हें लंबी अवधि के स्थायी रोजगार देने का जरिया भी बन रहा है। इसी रणनीति के तहत कंपनियां त्योहारी सीजन की चरम मांग शुरू होने से लगभग 12 से 14 सप्ताह पहले ही अपनी भर्ती आवश्यकताओं का खाका तैयार करना शुरू कर देती हैं। इस अग्रिम तैयारी से नियोक्ताओं को पहले से एक दक्ष टैलेंट पूल तैयार करने में आसानी होती है और ऐन मौके पर हड़बड़ी में होने वाले हायरिंग दबाव से पूरी तरह निजात मिल जाती है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही नियुक्तियों की 45 फीसदी मांग
त्योहारी सीजन में होने वाली इस भर्ती लहर का दायरा अब बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के छोटे और मझोले शहरों तक फैल चुका है। जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल त्योहारी भर्ती मांग में करीब 45 फीसदी हिस्सा दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से आने की उम्मीद है। इतना ही नहीं, इन टियर-2 और टियर-3 बाजारों में भर्ती दर में 25 से 30 फीसदी तक की जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। ई-कॉमर्स और त्वरित डिलीवरी देने वाले क्विक कॉमर्स के विस्तार के साथ-साथ संगठित खुदरा दुकानों और क्षेत्रीय स्तर पर ऑर्डर सप्लाई नेटवर्क के मजबूत होने से जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में कर्मचारियों की भारी मांग निकल रही है।
फ्रेशर्स, महिलाओं और तकनीकी युवाओं के लिए बढ़े नए अवसर
इस अध्ययन में एक और अहम पहलू यह रेखांकित किया गया है कि त्योहारी दौर में पहली बार कार्यक्षेत्र में कदम रखने वाले फ्रेशर्स और कामकाजी महिलाएं एक बेहद महत्वपूर्ण वर्कफोर्स के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं। देश में जिस तरह से गिग इकनॉमी का दायरा तेजी से फैल रहा है, उसी अनुपात में अलग-अलग विधाओं के कर्मियों की मांग भी गति पकड़ रही है। अब गिग और सीजनल सेक्टर केवल गैर तकनीकी कामों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ऐसे युवाओं को भी बड़े पैमाने पर अवसर मिल रहे हैं जो प्रशिक्षित हैं, डिजिटल उपकरणों का सुगमता से उपयोग कर सकते हैं और तकनीकी तौर पर पूरी तरह दक्ष हैं।





















