सोनीपत में एसटीएफ की घेराबंदी देख टोल मैनेजर हत्याकांड का आरोपी फ्लाईओवर से नीचे कूदा, साथी भी दबोचा गयात्योहारी मांग से चमकेगा रोजगार बाजार, गिग और सीजनल सेक्टर में खुलेंगे 2.5 लाख अवसरवापसी से पहले सक्रिय हुआ मानसून, कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनीजालोर के खेतों से 15 मुल्कों तक पहुंचा किनोवा, 3500 टन पहुंचा सालाना कारोबारगोभी की बंपर पैदावार चाहिए तो न करें ये गलतियां, जुताई से लेकर कटाई तक अपनाएं ये नियमबॉक्स ऑफिस पर कुणाल खेमू की 'वाइब' ने बनाई बढ़त, दूसरे दिन करीना कपूर की 'दायरा' ने भी पकड़ी रफ्तारफिरोजाबाद की बोहरान गली कैसे बनी कांच की चूड़ियों का विश्व प्रसिद्ध बाजार, सादी बनावट से शुरू हुआ था सफरगोरखपुर विश्वविद्यालय का पुस्तकालय बना ज्ञान का केंद्र, नाथ पंथ और दर्शन की किताबों के लिए आम पाठकों को भी मिला प्रवेशअमेठी में 50 निजी कंपनियां लगाएंगी नौकरियों की झड़ी, 21 सितंबर को आईटीआई गौरीगंज में बड़ा रोजगार मेलाजमशेदपुर की चाय वाली गली में सिर्फ 10 रुपये से शुरू होते हैं कुल्हड़ और चॉकलेट चाय के अनोखे स्वाद
जालोर के खेतों से 15 मुल्कों तक पहुंचा किनोवा, 3500 टन पहुंचा सालाना कारोबारराजस्थान
20 सित॰ 2026, 6:56 am (43 मिनट पहले)· 1

जालोर के खेतों से 15 मुल्कों तक पहुंचा किनोवा, 3500 टन पहुंचा सालाना कारोबार

राजस्थान के जालोर जिले में कम पानी वाली किनोवा की खेती किसानों की किस्मत संवार रही है, जहां 100 टन से शुरू होकर उपज का कारोबार अब 3500 टन के पार निकल चुका है।

राजस्थान के जालोर जिले की बंजर और कम पानी वाली जमीन पर अब एक नई कृषि क्रांति आकार ले रही है। पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले स्थानीय किसान अब किनोवा जैसी पौष्टिक फसल को अपनाकर खेती का दायरा बदल रहे हैं। कभी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंडियों में पहचानी जाने वाली यह फसल अब जालोर के ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर उगाई जा रही है। कम सिंचाई में बेहतर पैदावार देने वाली इस फसल ने जिले के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।

प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन से मिला बड़ा बाजार

जालोर के खेतों से कटाई के बाद किनोवा को सीधे मंडियों में नहीं बेचा जाता, बल्कि इसे व्यवस्थित तरीके से प्रसंस्कृत किया जाता है। खेतों से लाई गई उपज को आधुनिक प्रोसेसिंग इकाइयों में पहुंचाया जाता है, जहां सफाई, धुलाई, सुखाने और ग्रेडिंग के कई कड़े चरणों से गुजरने के बाद इसे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद के रूप में पैक किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के चलते उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ती है और यह देश के प्रमुख महानगरों के साथ-साथ विदेशों के लिए भेजा जाता है।

ये भी पढ़ें

पोषण से भरपूर आहार के रूप में वैश्विक मांग

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किनोवा को एक अत्यंत पौष्टिक अनाज के तौर पर मान्यता मिली हुई है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर के साथ-साथ आयरन एवं मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। खानपान में विविधता पसंद करने वाले लोग इसे सलाद, खिचड़ी, पुलाव और अन्य कई तरह के सेहतमंद व्यंजनों में प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे इसके उपभोक्ता आधार में तेजी से विस्तार हुआ है।

स्थानीय रोजगार और 3500 टन तक पहुंचा निर्यात

किनोवा उत्पादन ने केवल किसानों की आमदनी ही नहीं बढ़ाई, बल्कि स्थानीय युवाओं और श्रमिकों के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खोले हैं। फसल की छंटाई, धुलाई, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी संख्या में लोगों को काम मिल रहा है। कभी महज 100 टन के शुरुआती स्तर से शुरू हुआ जालोर का यह कृषि उद्यम अब 3000 से 3500 टन के सालाना कारोबार तक पहुंच चुका है। आज यहां से तैयार होने वाला किनोवा दुनिया के 15 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है, जिसने जालोर को वैश्विक कृषि मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।

सवाल-जवाब

जालोर में किनोवा की खेती किसानों के लिए क्यों फायदेमंद साबित हो रही है?
किनोवा कम पानी में तैयार होने वाली फसल है, जो जालोर जैसे इलाके के लिए उपयुक्त है और किसानों को पारंपरिक फसलों से अलग नया बाजार देती है।
खेत से कटाई के बाद किनोवा को कैसे तैयार किया जाता है?
फसल को सीधे बाजार भेजने के बजाय प्रोसेसिंग यूनिट में सफाई, धुलाई, सुखाने और ग्रेडिंग के बाद पैक किया जाता है।
किनोवा में कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं?
किनोवा में प्रोटीन और फाइबर के साथ आयरन, मैग्नीशियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
किनोवा को खानपान में किन रूपों में उपयोग किया जाता है?
इसे सलाद, खिचड़ी, पुलाव और कई प्रकार के पौष्टिक एवं सेहतमंद व्यंजनों में तैयार करके खाया जा सकता है।
जालोर का किनोवा कारोबार कितने टन तक पहुंच चुका है?
100 टन से शुरू हुआ यह कारोबार अब बढ़कर करीब 3000 से 3500 टन सालाना तक पहुंच गया है।
जालोर से तैयार किनोवा कितने देशों में भेजा जा रहा है?
जालोर में प्रसंस्कृत किनोवा वर्तमान में 15 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·12 मिनट पहले

जालोर में कम पानी वाली जमीन पर किनोवा की सफलता यह साबित करती है कि विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में भी सही प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से कृषि को वैश्विक स्तर पर कैसे ले जाया जा सकता है। 100 टन से शुरू होकर 3500 टन के सालाना कारोबार और 15 देशों तक पहुंच यह दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और निर्यात आधारित खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नक्शा बदलने की पूरी क्षमता रखती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

जालोर में किनोवा की यह सफलता सिर्फ एक कृषि उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी एक मजबूत कड़ी है। जब बंजर जमीन पर इस तरह का आर्थिक बदलाव आता है, तो पलायन रुकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने से आपराधिक गतिविधियों की संभावनाओं में भी कमी आती है। 15 देशों तक फैला यह कारोबार इस बात का प्रमाण है कि सही आपूर्ति श्रृंखला और कानूनी-प्रशासनिक समर्थन मिलने पर कृषि आधारित उद्यम ग्रामीण सुरक्षा और समृद्धि दोनों सुनिश्चित कर सकते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp