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उच्च शिक्षा के नए कानून को दिल्ली कैबिनेट की हरी झंडी, स्थानीय छात्रों के लिए 25% सीटें रहेंगी आरक्षितकरियर
7 अग॰ 2026, 6:45 pm (82 दिन पहले)· 2

उच्च शिक्षा के नए कानून को दिल्ली कैबिनेट की हरी झंडी, स्थानीय छात्रों के लिए 25% सीटें रहेंगी आरक्षित

दिल्ली में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए कैबिनेट ने नए ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है, जिसमें स्थानीय विद्यार्थियों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण और कड़े प्रशासनिक नियम शामिल किए गए हैं।

दिल्ली में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ाने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विकल्प देने के उद्देश्य से दिल्ली कैबिनेट ने 'प्राइवेट यूनिवर्सिटीज बिल' के ड्राफ्ट को अपनी मंजूरी दे दी है। अब तक राष्ट्रीय राजधानी में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए कोई स्पष्ट और समर्पित कानूनी ढांचा मौजूद नहीं था, जिसके कारण नए शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने में प्रशासनिक और कानूनी अड़चनें आती थीं। सरकार के इस नीतिगत फैसले से दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्तर के निजी विश्वविद्यालय खोलने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने वाले हजारों स्थानीय छात्रों को अपने ही शहर में पढ़ाई के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

स्थानीय युवाओं के लिए 25% कोटा और दाखिला प्रक्रिया

इस प्रस्तावित विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दिल्ली के स्थानीय विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अवसरों को सुरक्षित करना है। कानून प्रभावी होने के बाद दिल्ली में स्थापित होने वाले प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय को अपने सभी पाठ्यक्रमों में 25 प्रतिशत सीटें स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षित रखनी होंगी। यह प्रवेश प्रक्रिया दिल्ली सरकार (GNCTD) की मौजूदा आरक्षण नीति के प्रावधानों के तहत संचालित होगी, जिससे शहर के मेधावी युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा में बिना किसी बाधा के दाखिला मिल सकेगा।

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लैंड क्लॉज में बदलाव और अनिवार्य इंफ्रास्ट्रक्चर मानक

नए बिल में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि की न्यूनतम सीमा यानी 'लैंड क्लॉज' की बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि जमीन का आकार कितना भी हो, निर्धारित मापदंड पूरे करने पर संस्थान स्थापित किया जा सकेगा। हालांकि, संस्थागत स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रायोजक संस्था (स्पॉन्सरिंग संस्था) के पास न्यूनतम 30 वर्षों की वैध लीज या जमीन का मालिकाना हक होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, भूमि छूट के बावजूद इंफ्रास्ट्रक्चर के मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रत्येक संस्थान में आधुनिक प्रयोगशालाएं, समृद्ध लाइब्रेरी, डिजिटल शैक्षणिक संसाधन और विश्वस्तरीय ढांचागत सुविधाएं विकसित करना जरूरी होगा।

सरकारी निगरानी और उच्च शिक्षा मंत्री की 'विजिटर' भूमिका

निजी संस्थानों को संचालन की स्वायत्तता देने के साथ-साथ सरकार ने प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था को मजबूत रखा है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री इन सभी निजी विश्वविद्यालयों के 'विजिटर' के रूप में कार्य करेंगे। विजिटर के पास संस्थानों से किसी भी समय प्रशासनिक अथवा वित्तीय रिपोर्ट तलब करने, कैंपस का प्रत्यक्ष निरीक्षण कराने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता पाए जाने पर दंडात्मक निर्देश देने या जांच आयोग बैठाने के व्यापक अधिकार होंगे।

निगरानी समितियां और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में सरकारी उपस्थिति

फर्जी और केवल कागजों पर चलने वाले शैक्षणिक संस्थानों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सरकार दो विशेष निगरानी समितियों का गठन करेगी। ये समितियां निजी विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों, वित्तीय पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे पर निरंतर नजर रखेंगी। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक विश्वविद्यालय के 'बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट' में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि की उपस्थिति को अनिवार्य बनाया गया है। नीतिगत और प्रशासनिक निर्णयों में सरकारी प्रतिनिधि की सहमति आवश्यक होगी, जिससे किसी भी मनमाने फैसले पर अंकुश लगाया जा सके।

यूनिटरी मॉडल और केंद्रीय नियामक संस्थाओं के दिशा-निर्देश

दिल्ली में स्वीकृत होने वाले सभी नए निजी विश्वविद्यालय 'यूनिटरी मॉडल' के तहत ही संचालित होंगे। इस व्यवस्था के अंतर्गत इन विश्वविद्यालयों को किसी अन्य कॉलेज को संबद्धता (Affiliation) देने का अधिकार नहीं होगा, हालांकि वे दिल्ली की सीमा के भीतर अपने अतिरिक्त कैंपस या स्टडी सेंटर स्थापित कर सकेंगे। इसके अलावा, इन सभी संस्थानों के लिए UGC, AICTE, NMC और BCI जैसी केंद्रीय नियामक संस्थाओं द्वारा तय किए गए मानकों और नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।

सवाल-जवाब

दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज बिल में स्थानीय छात्रों के लिए कितना आरक्षण तय किया गया है?
प्रस्तावित बिल के तहत दिल्ली के स्थानीय विद्यार्थियों के लिए हर प्राइवेट यूनिवर्सिटी के प्रत्येक कोर्स में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी।
प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने के लिए जमीन के नियमों में क्या बदलाव किया गया है?
न्यूनतम जमीन के क्षेत्रफल यानी लैंड क्लॉज की शर्त खत्म कर दी गई है, लेकिन स्पॉन्सरिंग संस्था के पास कम से कम 30 साल की वैध लीज या जमीन का मालिकाना हक होना जरूरी है।
प्राइवेट यूनिवर्सिटीज पर सरकारी निगरानी के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
उच्च शिक्षा मंत्री यूनिवर्सिटी के 'विजिटर' होंगे और दो विशेष निगरानी समितियां बनाई जाएंगी। साथ ही बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में उच्च शिक्षा सचिव या उनके प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
क्या ये नई यूनिवर्सिटीज दूसरे कॉलेजों को एफिलिएशन दे सकेंगी?
नहीं, ये सभी यूनिवर्सिटीज केवल यूनिटरी मॉडल पर काम करेंगी और किसी अन्य कॉलेज को एफिलिएट नहीं कर सकेंगी, हालांकि वे दिल्ली में अतिरिक्त कैंपस खोल सकती हैं।
इन यूनिवर्सिटीज को किन केंद्रीय संस्थाओं के नियम मानने होंगे?
इन संस्थानों को UGC, AICTE, NMC और BCI जैसी सभी केंद्रीय नियामक संस्थाओं के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
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