कॉरपोरेट आईटी क्षेत्र में काम करने वाले एक पेशेवर ने 33 LPA CTC का सालाना सैलरी पैकेज छोड़कर एक ऐसा फैसला लिया, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। लंबे कामकाजी घंटों और भारी तनाव से परेशान होकर इस कर्मचारी ने बिना किसी दूसरी नौकरी का ऑफर हाथ में हुए इस्तीफा दे दिया। अपनी मानसिक शांति और परिवार को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने बाद में 29 LPA का वर्क फ्रॉम होम (WFH) ऑफर स्वीकार किया। 4 लाख रुपये सालाना सैलरी कम होने के बावजूद उन्होंने पैसों की चमक-धमक से ऊपर अपने मानसिक सुकून और पारिवारिक जीवन को चुना, जो आज के कॉरपोरेट जगत में एक बड़ी मिसाल बन गया है।
काम का भारी दबाव और 2 महीने के नोटिस पीरियड की चुनौती
पिछले 6 महीनों से अधिक समय से यह आईटी पेशेवर लगातार काम के अत्यधिक बोझ से जूझ रहा था। रोजाना सुबह ऑफिस जाना, देर रात तक प्रोजेक्ट्स पर काम करना और घर-परिवार से पूरी तरह कट जाना उनकी दिनचर्या बन चुका था। काम के इस भारी प्रेशर के कारण उनका मानसिक सुकून छीन गया था और जीवन का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका था। वह इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए दूसरी नौकरियां तलाशना चाहते थे, लेकिन ऑफिस की व्यस्तता के कारण उन्हें इंटरव्यू की तैयारी करने और प्रक्रिया में शामिल होने का समय ही नहीं मिल पा रहा था। इसके अलावा, उनकी मौजूदा कंपनी में 2 महीने का लंबा नोटिस पीरियड एक बड़ी रुकावट साबित हो रहा था। आज के समय में अधिकांश कंपनियां तुरंत या बहुत कम समय में जॉइन करने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं। ऐसे में वर्तमान नौकरी में रहते हुए नए रास्ते तलाशना उनके लिए लगभग असंभव हो गया था।
बिना जॉब ऑफर के इस्तीफा और 5 दिनों का जरूरी ब्रेक
जब काम का दबाव सहनशक्ति से बाहर हो गया, तो इस पेशेवर ने अपनी सेहत और परिवार की भलाई के लिए एक साहसी कदम उठाया। उन्होंने बिना किसी दूसरे जॉब ऑफर के ही अपनी 33 लाख रुपये की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। नौकरी छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने अपने दिमाग को शांत करने के लिए 5 दिनों का एक मुकम्मल ब्रेक लिया। इन पांच दिनों के दौरान उन्होंने किसी भी तरह का काम नहीं किया, न ही इंटरव्यू की तैयारी की और न ही भविष्य की नौकरी को लेकर कोई चिंता जताई। यह पूरा समय उन्होंने सिर्फ अपने बच्चों और परिवार के साथ बिताया। इस सुनियोजित ब्रेक ने उनके दिमाग को पूरी तरह से रिफ्रेश कर दिया और महीनों से जमा मानसिक थकान को पूरी तरह दूर कर दिया।
शुरुआती रिजेक्शन के बाद मिला 29 लाख का WFH अवसर
मानसिक रूप से पूरी तरह तरोताजा होने के बाद, इस आईटी पेशेवर ने अपना रिज्यूमे अपडेट किया और नए सिरे से नौकरियों के लिए आवेदन करना शुरू किया। नौकरी की यह खोज आसान नहीं रही और उन्हें शुरुआत में लगातार 3 अलग-अलग कंपनियों से रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। हालांकि, शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार, चौथी कंपनी में उनका इंटरव्यू सफल रहा और उन्हें 29 LPA का ऑफिशियल ऑफर लेटर मिल गया। पुरानी सैलरी की तुलना में यह पैकेज 4 लाख रुपये कम था, लेकिन इस नौकरी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह पूरी तरह से वर्क फ्रॉम होम (WFH) प्रोफाइल थी, जहां ऑफिस केवल बेहद जरूरी स्थिति में ही जाना था।
सैलरी में कटौती के बावजूद मानसिक सुकून और परिवार को प्राथमिकता
पुरानी सैलरी के मुकाबले 4 लाख रुपये का नुकसान होने के बाद भी इस पेशेवर ने 29 लाख रुपये का यह ऑफर बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार कर लिया। उनके लिए यह फैसला पैसों के नुकसान से कहीं ज्यादा अपनी जिंदगी में शांति और संतुलन वापस लाने का माध्यम था। घर से काम करने की सुविधा मिलने के कारण अब उन्हें रोजाना ट्रैफिक और ऑफिस जाने के झंझट से मुक्ति मिल गई। वह अपने बच्चों को अपनी आंखों के सामने बढ़ते हुए देख सकते थे और अपने लिए व्यक्तिगत समय निकाल सकते थे। अपने इस फैसले पर बात करते हुए उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि ज्यादा पैसों के पीछे भागने के बजाय जीवन में सुकून चुनना उनके जीवन का सबसे बेहतरीन फैसला साबित हुआ।
कॉरपोरेट संस्कृति और वर्क-लाइफ बैलेंस पर बड़ा संदेश
सोशल मीडिया मंच X पर वानेश माली ने 4 अगस्त 2026 को इस घटनाक्रम को साझा किया, जिसके बाद कॉरपोरेट जगत में काम के घंटों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक नई बहस छिड़ गई। यह कहानी आज के दौर के उन तमाम पेशेवरों के लिए एक बड़ा संदेश है जो केवल भारी पैकेज के पीछे भागते हुए अपनी सेहत और पारिवारिक जीवन को नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे नोटिस पीरियड जैसी शर्तें अक्सर कर्मचारियों को तनावपूर्ण माहौल में बंधे रहने पर मजबूर करती हैं। इस आईटी पेशेवर का फैसला यह दर्शाता है कि वर्क-लाइफ बैलेंस, मानसिक शांति और परिवार के साथ बिताया गया समय किसी भी बड़े सैलरी पैकेज से कहीं अधिक कीमती होता है।



















