देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) का 57वां दीक्षांत समारोह अकादमिक और तकनीकी क्रांति के नए अध्याय के रूप में आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक और भव्य कार्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में सुबह 11 बजे उपस्थित हुए। संस्थान के प्रांगण में आयोजित इस समारोह के दौरान विभिन्न पाठ्यक्रमों के 3,036 पासआउट छात्र-छात्राओं को उनकी स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध की डिग्रियां प्रदान की गईं। इन डिग्री धारकों में उच्च स्तरीय शोध कार्य पूरा करने वाले 587 पीएचडी स्कॉलर्स भी शामिल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर पहुंचकर शैक्षणिक क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक, डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक तथा परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल सौंपकर उनका उत्साहवर्धन किया।
'परम प्रज्ञा' सुपरकंप्यूटर से भारत के एआई और डेटा साइंस रिसर्च को नई उड़ान
इस दीक्षांत समारोह की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि देश के शोध क्षेत्र को मिली एक अत्याधुनिक तकनीकी सौगात रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) सुविधा 'परम प्रज्ञा' का डिजिटल माध्यम से भव्य उद्घाटन किया। यह सुपरकंप्यूटर आईआईटी दिल्ली के हरियाणा स्थित सोनीपत एक्सटेंशन कैंपस में स्थापित किया गया है। परम प्रज्ञा में अत्यंत आधुनिक और विशेष तकनीकी विशेषताएं शामिल हैं, जो विशाल डेटा सेट की प्रोसेसिंग, अत्यंत जटिल गणितीय गणनाओं और बड़े एआई मॉडल्स को तेज गति से विश्लेषित करने में सक्षम हैं। देश में सुपरकंप्यूटिंग की क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने तथा अत्याधुनिक डेटा साइंस रिसर्च को गति देने की दिशा में इसे एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
स्वदेशी कंप्यूटिंग क्षमता से स्वास्थ्य, रक्षा और मौसम विज्ञान में नई संभावनाएं
वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियां भविष्य के विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। ऐसे समय में परम प्रज्ञा सुपरकंप्यूटर की स्थापना से भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की विदेशी कंप्यूटिंग संसाधनों पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और युवा शोधकर्ता अब स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में नई औषधियों की खोज, मौसम का अत्यंत सटीक पूर्वानुमान लगाने, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को विकसित करने, उन्नत एआई मॉडल्स की ट्रेनिंग देने और रक्षा प्रौद्योगिकी से जुड़े संवेदी विषयों पर गहराई से काम कर सकेंगे। यह स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग प्रणाली भारतीय शोधकर्ताओं को बिना किसी वैश्विक रुकावट के जटिल गणनाएं करने की स्वतंत्रता प्रदान करेगी।
3 हजार से अधिक शोधकर्ताओं और छात्रों को मिलीं उपाधियां, इन पदकों से नवाजे गए मेधावी
समारोह के दौरान परिसर का वातावरण अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण नजर आया। आईआईटी दिल्ली से BTech, MTech, MSc, MBA और PhD करने वाले कुल 3,036 विद्यार्थियों को उनकी सफलता की आधिकारिक डिग्री प्रदान की गई। जब देश के शीर्ष नेतृत्व के हाथों से विद्यार्थियों को उनके कठिन परिश्रम और लगन के लिए स्वर्ण पदक सौंपे गए, तो युवाओं के चेहरे गर्व से खिल उठे। राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक, डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक और परफेक्ट टेन गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले छात्रों की उपलब्धियों ने पूरे संस्थान के अकादमिक स्तर को नई पहचान दी।
18 एनआईटी के साथ 'अलाइन' नेटवर्क और मेंटरशिप पहल
अपनी शैक्षणिक यात्रा के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर आईआईटी दिल्ली ने भविष्य की कई दूरदर्शी योजनाओं का भी औपचारिक शुभारंभ किया। संस्थान ने देश भर के 18 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs) के साथ मिलकर एक मजबूत और एकीकृत रिसर्च नेटवर्क तैयार करने का संकल्प लिया है। इस महत्वाकांक्षी पहल को 'अलाइन' (ALIGN) नाम दिया गया है। अलाइन योजना के माध्यम से एनआईटी और आईआईटी के शोधकर्ता व छात्र आपस में मिलकर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य कर सकेंगे। साथ ही, वे दोनों संस्थानों के उच्च स्तरीय प्रयोगशालाओं, अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर का साझा उपयोग कर पाएंगे। इसके अतिरिक्त, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और करियर मार्गदर्शन के लिए भी नए मेंटरशिप कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि युवा अपने अर्जित ज्ञान और तकनीकी कौशल का प्रयोग देश की वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने में करें।



















