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कैंपस प्लेसमेंट में डिग्री से ज्यादा हुनर की मांग, इस साल इन 5 नए जॉब रोल्स में फ्रेशर्स की हो रही बंपर हायरिंगकरियर
8 अग॰ 2026, 1:03 pm (2 घंटे पहले)· 0

कैंपस प्लेसमेंट में डिग्री से ज्यादा हुनर की मांग, इस साल इन 5 नए जॉब रोल्स में फ्रेशर्स की हो रही बंपर हायरिंग

भारतीय कंपनियों में फ्रेशर्स की भर्ती को लेकर माहौल बेहद सकारात्मक बना हुआ है और हायरिंग इंटेंट उछलकर 73 फीसदी पर पहुंच गया है। अब पारंपरिक नौकरियों के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड और ऑटोमेशन से जुड़ी नई प्रोफाइल पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

कॉलेज के अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए कैंपस प्लेसमेंट की प्रक्रिया जोर-शोर से चल रही है। देश की विभिन्न कंपनियों में इस समय नए स्नातकों यानी फ्रेशर्स को नौकरी देने का रुख काफी उत्साहजनक नजर आ रहा है। टीमलीज एडटेक की करियर आउटलुक रिपोर्ट के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल कंपनियों द्वारा नए उम्मीदवारों को चुनने की गति में तेज उछाल देखा गया है। रोजगार बाजार में फ्रेशर्स को हायर करने की कंपनियों की इच्छा का आंकड़ा बढ़कर 73 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा बदलाव केवल नौकरियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि नौकरियों के स्वरूप और प्रोफाइल में एक बड़ा परिवर्तन दर्ज किया गया है।

बाजार में पारंपरिक दौर की पुरानी नौकरियों की मांग अब धीरे-धीरे कम हो रही है, जिनका दबदबा सालों से बना हुआ था। उनके स्थान पर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वचालन, क्लाउड तकनीक और डिजिटल बदलावों से जुड़े नए जॉब प्रोफाइल तेजी से उभरकर सामने आए हैं। यह ध्यान देने योग्य बात है कि इनमें से कई पद ऐसे हैं, जिनका अस्तित्व पिछले एक वर्ष पहले तक जॉब मार्केट में नाममात्र भी नहीं था। इसके साथ ही कॉरपोरेट जगत में डिग्री के स्थान पर व्यावहारिक कौशल को तरजीह देने की व्यवस्था स्थापित हो रही है। यदि किसी उम्मीदवार के पास उद्योग की जरूरत के अनुसार सही कौशल मौजूद है, तो कंपनियां उच्च वेतन पैकेज पर उन्हें तुरंत अपनी टीम का हिस्सा बनाने के लिए तैयार हैं।

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एआई मार्केटिंग स्पेशलिस्ट का बढ़ता दायरा

आधुनिक दौर में विपणन और ब्रांडिंग का पूरा तंत्र डेटा विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स पर निर्भर हो चुका है। यही कारण है कि कंपनियां अब ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं जो काम की शुरुआत से ही एआई टूल्स का उपयोग करने में माहिर हों। इस जॉब रोल के अंतर्गत नए कर्मचारियों को एआई आधारित टूल्स के सहयोग से मार्केटिंग कैंपेन का संचालन करना होता है। इसके अलावा उन्हें विभिन्न प्रकार के डेटा का गहराई से विश्लेषण करना और अभियानों के प्रदर्शन को ट्रैक करना होता है। मौजूदा समय में बेंगलुरु, दिल्ली और कोच्चि जैसे प्रमुख शहरों के कॉरपोरेट हब में इस विशिष्ट प्रोफाइल की सर्वाधिक मांग देखी जा रही है।

जूनियर डेवॉप्स इंजीनियर के नए दरवाजे

बीते कुछ वर्षों तक तकनीकी क्षेत्र में डेवॉप्स की भूमिका केवल अनुभवी और मध्य-करियर स्तर के पेशेवरों तक ही सीमित रखी जाती थी। लेकिन वर्तमान में आईटी सेक्टर में 81 प्रतिशत हायरिंग इंटेंट के साथ जूनियर डेवॉप्स इंजीनियर के पदों पर फ्रेशर्स की सीधी कैंपस प्लेसमेंट के जरिए भर्ती की जा रही है। यदि कॉलेज पास आउट छात्रों को सीआई/सीडी पाइपलाइंस, लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम और क्लाउड फंडामेंटल्स की अच्छी समझ है, तो उनके लिए बेंगलुरु, मुंबई और कोयंबटूर जैसे शहरों में बेहतरीन करियर अवसर उपलब्ध हैं। कंपनियों को अब बुनियादी स्तर पर ही ऐसे कुशल तकनीकविदों की आवश्यकता है जो सॉफ्टवेयर विकास और संचालन को सुगम बना सकें।

नो-कोड डेवलपर की बढ़ती उपयोगिता

सॉफ्टवेयर और वेबसाइट निर्माण के क्षेत्र में नो-कोड प्लेटफॉर्म्स के आगमन ने काम करने के पुराने तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। पारंपरिक रूप से की जाने वाली जटिल कोडिंग की तुलना में अब कंपनियां नो-कोड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके कम समय में वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स तैयार करवा रही हैं। विशेष रूप से निर्माण और विपणन क्षेत्र की कंपनियां ऐसे नए स्नातकों की तलाश में हैं, जिन्हें यूजर इंटरफेस और यूजर एक्सपीरियंस यानी यूआई/यूएक्स की अच्छी समझ हो। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास डिजिटल समस्याओं को हल करने की योग्यता होना आवश्यक है। इस रोल के लिए पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद सबसे बड़े रोजगार केंद्र बनकर उभरे हैं।

एआई चैटबॉट सपोर्ट इंजीनियर की मांग

ग्राहक सेवा के पुराने और पारंपरिक तरीके अब बीते जमाने की बात बनते जा रहे हैं। आज के समय में अधिकांश कंपनियां अपने ग्राहकों की सहायता के लिए एआई से संचालित होने वाले स्वचालित चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रही हैं। इन चैटबॉट्स को सुचारू रूप से चलाने, उनकी भाषा शैली को बेहतर बनाने और तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए एआई चैटबॉट सपोर्ट इंजीनियर्स को नियुक्त किया जा रहा है। इस काम में तकनीकी ट्रबलशूटिंग के साथ-साथ कन्वर्सेशनल एआई के प्रबंधन का जिम्मा होता है। एआई में सर्टिफिकेशन हासिल करने वाले नए युवाओं के लिए चेन्नई, पुणे और कोच्चि में नौकरियों के बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं।

स्मार्ट ग्रिड ऑटोमेशन टेक्नीशियन का नया क्षेत्र

तकनीक और ऑटोमेशन का यह नया रुझान केवल सूचना प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है। ऊर्जा और पावर सेक्टर में भी नई नियुक्तियों का उत्साह देखा जा रहा है, जहां कंपनियों का हायरिंग इंटेंट 72 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है। अक्षय ऊर्जा और हाइब्रिड एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते नेटवर्क को संभालने और संचालित करने के लिए कंपनियां अब स्मार्ट ग्रिड ऑटोमेशन टेक्नीशियन की बड़े पैमाने पर भर्ती कर रही हैं। ऐसे युवा जिन्हें ऑटोमेशन और कंट्रोल सिस्टम की व्यावहारिक जानकारी है, उनके लिए अहमदाबाद, चेन्नई और कोच्चि जैसे शहरों की कंपनियों में आकर्षक पैकेज वाली नौकरियों के रास्ते खुल चुके हैं।

सवाल-जवाब

टीमलीज एडटेक की रिपोर्ट के अनुसार फ्रेशर्स के लिए हायरिंग इंटेंट कितना है?
रिपोर्ट के अनुसार इस साल भारतीय कंपनियों में फ्रेशर्स को हायर करने की गति तेज हुई है और हायरिंग इंटेंट बढ़कर 73 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
आईटी सेक्टर में जूनियर डेवॉप्स इंजीनियर के लिए हायरिंग का क्या आंकड़ा है?
आईटी सेक्टर में जूनियर डेवॉप्स इंजीनियर के पदों पर 81 प्रतिशत हायरिंग इंटेंट के साथ कैंपस से सीधी भर्ती की जा रही है।
स्मार्ट ग्रिड ऑटोमेशन टेक्नीशियन की जरूरत किस सेक्टर में पड़ रही है?
यह नया रोल पावर और एनर्जी सेक्टर में उभरकर आया है, जहां रिन्यूएबल और हाइब्रिड ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को संभालने के लिए 72 प्रतिशत हायरिंग इंटेंट दर्ज किया गया है।
नो-कोड डेवलपर की नौकरी पाने के लिए फ्रेशर्स के पास क्या स्किल्स होनी चाहिए?
उम्मीदवारों के पास नो-कोड प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल के साथ-साथ यूआई/यूएक्स की समझ और डिजिटल प्रॉब्लम सॉल्विंग का हुनर होना जरूरी है।
एआई मार्केटिंग स्पेशलिस्ट और एआई चैटबॉट सपोर्ट इंजीनियर के लिए कौन से शहर बड़े हब हैं?
एआई मार्केटिंग के लिए बेंगलुरु, दिल्ली और कोच्चि तथा एआई चैटबॉट सपोर्ट इंजीनियर के लिए चेन्नई, पुणे और कोच्चि मुख्य रोजगार केंद्र बने हुए हैं।
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