छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में उस वक्त खलबली मच गई, जब व्यवस्था से पूरी तरह निराश एक 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने इच्छामृत्यु की गुहार लगा दी। बिलगहना की निवासी बालकुंवर बसोर ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजा। उनकी मांग साफ थी- या तो उन्हें इंसाफ मिले या फिर उन्हें मरने की इजाजत दे दी जाए। पीड़िता ने आईजी को भी आवेदन सौंपा है। महिला ने बताया कि उनके पति और दोनों बेटे दुनिया से जा चुके हैं और तभी से वह बिल्कुल अकेली जीवन गुजार रही हैं। इसी दौरान बीजेपी समर्थित पंच फागुन प्रसाद प्रजापति उर्फ मोनू ने उनके प्रति सहानुभूति दिखाई और बैंक में केवाईसी कराने से लेकर हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया।
पीड़िता के मुताबिक मोनू ने 14 दिसंबर 2021 को उनके एसबीआई खाते से 23 लाख रुपये निकालकर अपने खाते में डलवा लिए। आरोप यहीं नहीं रुका- महिला का कहना है कि ग्राम पंचायत लूफा में स्थित उनकी ढाई हेक्टेयर खेती की जमीन भी उसने धोखे से अपने नाम करवा ली। तब से वह लगातार न्याय के लिए भटक रही हैं, मगर कहीं भी उनकी फरियाद नहीं सुनी जा रही। अब उनकी एक ही गुजारिश है कि या तो उन्हें न्याय दिलाया जाए या फिर इच्छामृत्यु दे दी जाए।
बालकुंवर बसोर गुरुवार को आईजी रामगोपाल गर्ग से मुलाकात के लिए उनके दफ्तर पहुंचीं, लेकिन भेंट नहीं हो पाई। इसके बाद उन्होंने डीएसपी विवेक शर्मा को अपना आवेदन देकर पूरी आपबीती बयां की। आवेदन में उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग का भी जिक्र किया था। डीएसपी ने भरोसा दिलाया कि आईजी द्वारा इस मामले की समीक्षा की जाएगी और उसी के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में चलाया गया सुशासन तिहार अभियान अब समाप्त हो चुका है। यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चला था। इसका आखिरी शिविर तखतपुर के ग्राम घर बोड़सरा में लगा था। इसी मौके पर सकरी तहसील के किसान गौरीशंकर सूर्यवंशी ने अधिकारियों के सामने शिकायत रखी कि उनकी जमीन का सीमांकन पिछले 6 महीने से लटकाया जा रहा है। उनका कहना था कि इस काम के बदले संबंधित राजस्व निरीक्षक 15 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। उन्होंने एसडीएम और कलेक्टर तक से गुहार लगाई, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। हारकर अब वह सुशासन तिहार में आवेदन दे रहे हैं। सूर्यवंशी ने चेतावनी दी कि अगर 15 दिन के भीतर उनकी जमीन का सीमांकन नहीं हुआ तो वह आत्मदाह कर लेंगे।













