मंगलवार को रायपुर स्थित राज्य सचिवालय, महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कैबिनेट की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के युवाओं के भविष्य और स्थानीय कृषि व्यवस्था को लेकर कई बड़े नीतिगत बदलावों को मंजूरी दी गई है। सबसे प्रमुख फैसला भारतीय सेना से अपनी चार साल की सेवा पूरी करके लौटने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास से जुड़ा है। सरकार ने यह आधिकारिक घोषणा की है कि सैन्य सेवा से मुक्त होने वाले इन प्रशिक्षित युवाओं को अब छत्तीसगढ़ सरकार की सीधी भर्तियों में विशेष लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके तहत, राज्य की तृतीय श्रेणी (क्लास 3) की तमाम सिविल सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए दस प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की जाएंगी। प्रशासन का मानना है कि सेना से अनुशासित होकर निकलने वाले इन युवाओं का कौशल राज्य की प्रशासनिक और जमीनी व्यवस्था में काफी काम आएगा।
विशिष्ट विभागों में मिलेंगे अवसर
कैबिनेट द्वारा पारित किए गए इस नए आरक्षण प्रस्ताव के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किन-किन विभागों में यह 10 फीसदी का कोटा लागू होगा। यह छूट मुख्य रूप से तीन बड़े महकमों की सीधी भर्तियों में मिलेगी। पहला, राज्य के पुलिस विभाग में आरक्षक (कॉन्स्टेबल) के पदों पर होने वाली बहाली में। दूसरा, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत आने वाले वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के रिक्त पदों पर। और तीसरा, जेल विभाग में प्रहरी के पदों की भर्ती में भी इसी आरक्षण व्यवस्था का पालन किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि पुलिस, जेल और वन सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करने के लिए शारीरिक मजबूती और सख्त अनुशासन की जरूरत होती है, जो अग्निवीरों के पास पहले से मौजूद है। इससे न केवल इन पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के नए और स्थायी रास्ते खुलेंगे, बल्कि राज्य के अहम विभागों को भी एक चुस्त और बेहतरीन युवा बल प्राप्त हो सकेगा।
किसानों के लिए उर्वरक आपूर्ति पर विशेष जोर
युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के अलावा, इस बैठक में प्रदेश के किसान वर्ग के लिए भी एक बेहद जरूरी निर्णय लिया गया। खेती के मौसम में अक्सर किसानों को रासायनिक खादों की किल्लत का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने खरीफ और रबी, दोनों प्रमुख फसली सीजन के दौरान उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। खाद की निर्बाध आपूर्ति, उसके सही वितरण और उचित प्रबंधन की जमीनी निगरानी के लिए सरकार ने एक विशेष मंत्रिमंडलीय उप-समिति (सब-कमेटी) बनाने की मंजूरी दी है। यह समिति आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली अड़चनों को दूर करेगी और व्यवस्था में आवश्यक सुधार लाने के लिए अपने सुझाव तथा रणनीतिक मार्गदर्शन सीधे तौर पर राज्य सरकार को सौंपेगी।
उप-समिति का स्वरूप और जिम्मेदारियां
इस नवगठित कृषि पैनल की कमान सीधे तौर पर राज्य के उपमुख्यमंत्री को सौंपी गई है, जिनके नेतृत्व में यह समिति काम करेगी। मौजूदा समय में उपमुख्यमंत्री के पास लोक निर्माण, जन स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), नगरीय प्रशासन एवं विकास के साथ-साथ खेल और युवा कल्याण जैसे कई अहम विभागों का जिम्मा भी है। इस पैनल के अन्य सदस्यों में कृषि विकास तथा किसान कल्याण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे मंत्री के अलावा, सहकारिता मंत्री और प्रदेश के वित्त मंत्री भी अपनी सेवाएं देंगे। यह उच्च स्तरीय समिति किसानों की समस्याओं को त्वरित आधार पर सुलझाने और खाद वितरण के जमीनी हालात पर पैनी नजर रखने का काम करेगी, ताकि किसी भी फसल चक्र के दौरान यूरिया और अन्य उर्वरकों की कोई कमी न हो।
अन्य राज्यों में पहले से लागू है यह नीति
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य नहीं है जिसने अग्निवीरों के लिए अपनी नौकरियों के दरवाजे खोले हैं। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत सेवामुक्त होने वाले इन युवाओं के लिए भारत के कई अन्य सूबों की सरकारें भी पहले ही पुलिस और सुरक्षा बलों की भर्तियों में विशेष कोटा और उम्र सीमा में ढील का ऐलान कर चुकी हैं। उदाहरण के तौर पर, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग (जिसमें आरक्षक, पीएसी, फायरमैन और घुड़सवार पुलिस शामिल हैं) की भर्तियों में अग्निवीरों को सबसे अधिक 20 प्रतिशत का सीधा आरक्षण दिया जा रहा है, साथ ही उन्हें अधिकतम आयु सीमा में भी तीन वर्ष की विशेष छूट मिल रही है। वहीं दूसरी तरफ, हरियाणा प्रशासन ने भी पुलिस, वन रक्षक, जेल वार्डर और होम गार्ड के पदों पर 10 से लेकर 20 फीसदी तक सीटों को आरक्षित किया है, और वहां भी आयु सीमा में 3 से 5 वर्ष की मोहलत प्रदान की जा रही है।
देश भर में अग्निवीरों के लिए बढ़ते विकल्प
उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था देखने को मिल रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने अपने पुलिस महकमे, सशस्त्र बलों और अग्निशमन (फायर फाइटिंग) सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 फीसदी पद पहले ही आरक्षित कर दिए हैं। इसी तरह राजस्थान ने भी अपनी पुलिस कांस्टेबल, जेल प्रहरी और वन रक्षक की नौकरियों में 10 फीसदी का कोटा सख्ती से लागू किया है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की ओर नजर डालें तो ओडिशा सरकार ने अपनी सभी वर्दीधारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है। वहीं, असम ने भी राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों की भर्तियों में, जबकि अरुणाचल प्रदेश ने अपनी पुलिस तथा आपातकालीन सेवाओं में पूर्व सैनिकों के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान सफलतापूर्वक लागू कर दिया है।




















