छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकंडा स्थित बाल संप्रेषण गृह में हुई एक सुरक्षा गार्ड की नृशंस हत्या ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। यह वह जगह है जहां कानून के संपर्क में आए नाबालिगों को सुधार और निगरानी के मकसद से रखा जाता है, लेकिन पुलिस की शुरुआती पड़ताल में जो कहानी सामने आई है, वह किसी अचानक भड़के झगड़े की नहीं बल्कि एक सुनियोजित और खौफनाक साजिश की है, जिसे चार बाल अपचारियों ने मिलकर अंजाम दिया।
जेल शिफ्टिंग के डर से बनी साजिश
हत्या, दुष्कर्म, छेड़खानी और चोरी जैसे संगीन मामलों में इस बाल संप्रेषण गृह में बंद चारों नाबालिगों को यह भनक लग चुकी थी कि उन्हें जल्द ही यहां से दूसरी जेल में शिफ्ट किया जाने वाला है। इसी शिफ्टिंग से बचने के लिए उन्होंने वहां तैनात चौकीदार को ही रास्ते से हटाने की योजना बना ली, ताकि उनके भागने में कोई रोड़ा न रहे। रविवार रात जब पूरा परिसर नींद में डूब चुका था, चारों ने अपनी इस भयावह योजना पर अमल शुरू कर दिया।
गला घोंटकर हत्या, हाथ-पैर रस्सी से बांधे
रात करीब 11 बजे प्रथम तल पर ड्यूटी पर मौजूद 41 वर्षीय सुरक्षा गार्ड नरेंद्र कुमार खांडे जैसे ही चारों के वार्ड के नजदीक पहुंचे, आरोपियों ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। नरेंद्र को संभलने का मौका दिए बिना उन्हें जमीन पर पटक दिया गया, फिर उनके दोनों हाथ और पैर पीछे की ओर रस्सी से कसकर बांध दिए गए ताकि वे बचने या विरोध करने की स्थिति में न रहें। उनकी चीख बाहर न जा सके, इसके लिए मुंह में गमछा ठूंस दिया गया। इसके बाद चारों ने मिलकर बेरहमी से उनका गला घोंट दिया, जिससे दम घुटने से नरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।
सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी डीवीआर तक उखाड़ा
चौकीदार की हत्या के बाद आरोपियों ने अपनी साजिश के दूसरे चरण पर काम शुरू किया, जो सबूत मिटाने से जुड़ा था। जिला महिला बाल विकास अधिकारी सुरेश सिंह के मुताबिक ये चारों बाल अपराधी दूसरी मंजिल पर रहते थे, लेकिन हत्या के तुरंत बाद वे मृत चौकीदार से चाबियां छीनकर नीचे उतर आए। उन्होंने सबसे पहले बंद गेट खोला और फिर सीधे अधीक्षक के कमरे में घुस गए, जहां पूरे परिसर की चाबियां और सीसीटीवी का पूरा सिस्टम रखा हुआ था। अपनी पहचान छुपाने और पुलिस को गुमराह करने की नीयत से आरोपियों ने वहां लगे कैमरों का डीवीआर, मॉनिटर और परिसर की चाबियों के दो-तीन गुच्छे उखाड़कर अपने साथ ले लिए, ताकि किसी तरह की वीडियो फुटेज पीछे न बचे और उनकी शिनाख्त मुश्किल हो जाए।
छत के रास्ते सुरक्षा जाली काटकर फरार, पेड़ के सहारे उतरे नीचे
सबूत मिटाने के बाद चारों बाल अपचारियों ने भागने के लिए छत का रास्ता चुना। वे भागते हुए तीसरी मंजिल तक पहुंचे और वहां लगी सुरक्षा जाली को बड़ी चालाकी से हटाकर छत पर चढ़ गए। छत से वे परिसर में मौजूद एक बड़े पेड़ की टहनियों के सहारे नीचे उतरे और सीधे मुख्य गेट की ओर बढ़ गए। गेट के बाहर सुरक्षा के लिए तैनात दूसरे गार्ड की मोटरसाइकिल खड़ी थी। अधीक्षक के कमरे से चुराई गई चाबियों में से एक चाबी उसी बाइक में फिट हो गई, और चारों आरोपी उसी मोटरसाइकिल पर सवार होकर देखते ही देखते नजरों से ओझल हो गए।
कलेक्टर और एसएसपी ने संभाली जांच की कमान
सुबह जब वारदात का पता चला, तो कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह खुद मौके पर पहुंचे और पूरी साजिश की एक-एक कड़ी खंगालनी शुरू की। इस जघन्य हत्याकांड की खबर फैलते ही तखतपुर के ग्राम अरईबंद निवासी मृतक नरेंद्र के परिजनों में गहरा आक्रोश फैल गया।
परिजनों का प्रदर्शन, 12 सूत्रीय मांगें
सोमवार को दिनभर परिजन और विभिन्न संगठन बाल संप्रेषण गृह के बाहर प्रदर्शन करते रहे और शव उठाने से इनकार करते रहे। उनकी मांगों में उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराना शामिल था, कुल मिलाकर परिजनों और संगठनों ने 12 सूत्रीय मांगें प्रशासन के सामने रखीं। देर शाम प्रशासनिक अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई का ठोस भरोसा दिलाया और समझाइश दी, जिसके बाद परिजन शांत हुए और शव को सिम्स मरचुरी भेजा जा सका।
चारों नाबालिग फरार, तलाश में जुटी पुलिस
फिलहाल बिलासपुर पुलिस फरार चारों नाबालिग आरोपियों की तलाश में पूरे जिले में सतर्कता बढ़ा चुकी है। कई टीमें लगातार अलग-अलग इलाकों में दबिश दे रही हैं ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ा जा सके और इस पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।











