छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक ऐसा अनोखा प्राकृतिक स्थल मौजूद है, जो अपनी रहस्यमयी विशेषताओं से सभी को अचंभित कर रहा है। अंबिकापुर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर मैनपाट के पास स्थित मलंगरी पहाड़ अपनी प्राकृतिक छटा और एक विशेष जल स्रोत के कारण चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस ऊंचे पहाड़ पर मौजूद एक बड़ी चट्टान से लगातार पानी टपकता रहता है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से इस इलाके का रुख करते हैं।
मैनपाट देवता के रूप में है पहचान
यह स्थान मैनपाट के सुपलगा पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आता है और स्थानीय आबादी इसे मैनपाट देवता के नाम से भी पुकारती है। स्थानीय निवासी राम शंकर के अनुसार, यह इस पूरे इलाके का सबसे अधिक ऊंचाई वाला स्थल है। यहां पहुंचने पर चारों तरफ फैले हुए घने जंगल, अन्य पहाड़ और दूरदराज के गांव बेहद स्पष्ट नजर आते हैं। लोगों का मानना है कि इस जगह के बारे में उन्हें अपने पुरखों के जरिए जानकारी मिली थी और यह पीढ़ियों से क्षेत्र में जाना जाता रहा है।
सालभर जारी रहता है पानी का टपकना
इस पहाड़ की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यहां की चट्टानों से होने वाला जल रिसाव है, जिसे स्थानीय लोग टपका पानी कहकर बुलाते हैं। चट्टान के पत्थरों से पानी की बूंदें लगातार नीचे गिरती रहती हैं। राम शंकर का कहना है कि यह धारा केवल बरसात के दिनों में ही सक्रिय नहीं रहती, बल्कि वैशाख महीने की भीषण गर्मी के दौरान भी यहां पानी टपकता हुआ दिखाई देता है। इस आश्चर्यजनक नजारे को देखने वाले लोग हैरान रह जाते हैं, हालांकि इस जल स्रोत के उद्गम और कारणों की अभी तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
दुर्गम रास्ते और जंगलों के बीच का सफर
मलंगरी पहाड़ तक पहुंचना आम पर्यटकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित होता है क्योंकि यहां का मार्ग काफी उबड़-खाबड़ और कठिन है। इसके चारों तरफ घना जंगल फैला हुआ है जहां भालू और अन्य जंगली जानवरों का वास माना जाता है। ऐसे में यहां जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। इस ऊंचाई से नीचे देखने पर बंदरकोट गांव और आसपास की मनोरम वादियां दिखाई देती हैं। हालांकि प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी खजाने से कम नहीं है, फिर भी यहां बेहतर पर्यटन सुविधाओं और सुरक्षित रास्तों का अभाव खलखलता है।
पुरखों की कहानियों से जुड़ा है इतिहास
इस स्थान का इतिहास और रहस्य बहुत पुराना है जो पीढ़ियों से मौखिक रूप से आगे बढ़ रहा है। राम शंकर के मुताबिक उन्होंने इस जगह के बारे में बुजुर्गों से सुना था और खुद तीन बार यहां आकर इस अद्भुत नजारे का अनुभव किया है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को जीवन में एक बार इस प्राकृतिक स्थल की सुंदरता को जरूर देखना चाहिए। इस जगह के धार्मिक महत्व, वास्तविक इतिहास और पानी के वैज्ञानिक स्रोत को पूरी तरह समझने के लिए अभी और अधिक शोध और स्थानीय जानकारों की मदद लेने की आवश्यकता है।


















