राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस समय पंचायत चुनावों की सरगर्मी अपने चरम पर है। राज्य में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव के पहले चरण के तहत मतदान की प्रक्रिया आज आरंभ हो चुकी है। इस चरण के दौरान राज्यभर के मतदाता 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों के सदस्यों के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इन तमाम सीटों पर चुनावी मैदान में उतरे भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम मशीनों में कैद होना शुरू हो गया है, जिसके परिणाम बाद में सामने आएंगे।
पहले चरण का विस्तृत चुनावी गणित
पंचायत चुनाव के इस शुरुआती चरण में कुल 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों के सदस्यों का चुनाव हो रहा है। पहले चरण के अंतर्गत लगभग 85.7 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पात्र हैं। आंकड़ों के अनुसार, जिला परिषद की कुल 586 सीटों के लिए 1,693 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे यहां प्रति सीट औसतन 2.88 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है। दूसरी ओर, पंचायत समितियों की 1,806 सीटों के लिए 5,233 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, जहां प्रति सीट औसत 2.89 उम्मीदवार खड़े हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में अधिकांश स्थानों पर मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय नजर आ रहा है। मतदाता जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य दोनों पदों के लिए वोट डाल रहे हैं, जिसके लिए मतदान केंद्रों पर दो अलग-अलग ईवीएम का उपयोग किया जा रहा है।
मतदान के बाद बाड़ेबंदी और राजनीतिक दलों की रणनीति
मतदान संपन्न होने के साथ ही राजनीतिक दलों के भीतर प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। राजनीतिक दलों के सामने अपने विजयी या संभावित प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने और उन्हें एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवारों को पाला बदलने से रोकने के लिए मतदान के तुरंत बाद बाड़ेबंदी में भेज सकती हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी की ओर से तो उम्मीदवारों को अपने बैग पैक करके तैयार रहने के निर्देश तक दिए जाने की चर्चा है। कांग्रेस और अन्य दल भी अपने कुनबे को इंटेक्ट रखने के लिए इसी तरह की रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावना को समय रहते टाला जा सके। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि सभी उम्मीदवारों को एक ही स्थान पर रखा जाएगा या उन्हें अलग-अलग समूहों में विभाजित किया जाएगा।
लंबी अवधि और दिवाली पर असर की आशंका
राजस्थान में पंचायत चुनाव कुल चार चरणों में संपन्न कराए जा रहे हैं, जिनके तहत मतदान की पूरी प्रक्रिया 14 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद सभी जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव की मतगणना आगामी 20 नवंबर को निर्धारित की गई है। मतदान के विभिन्न चरणों और मतगणना के बीच के इस लंबे अंतराल के कारण बाड़ेबंदी की अवधि भी काफी लंबी खिंच सकती है। यदि दोनों प्रमुख दल मतगणना की तारीख तक प्रत्याशियों को एक साथ कैंपों या होटलों में रोककर रखते हैं, तो यह पंचायत चुनावों के इतिहास की सबसे लंबी बाड़ेबंदियों में से एक साबित हो सकती है। इस स्थिति में प्रत्याशियों को कई हफ्तों तक अपने घरों और परिवारों से दूर रहना पड़ सकता है। चुनावी कार्यक्रम के इस लंबे अंतराल के चलते यह आशंका भी जताई जा रही है कि प्रत्याशियों की इस बार की दिवाली अपने परिजनों के साथ घर पर मनने के बजाय बाड़ेबंदी के उसी अज्ञात ठिकाने पर ही कट सकती है। बहरहाल, बाड़ेबंदी के स्थान और वास्तविक अवधि को लेकर अभी राजनीतिक दलों की तरफ से अंतिम और आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। मतगणना के पूर्ण होने और परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किस दल की रणनीति सफल रही और किसे कितनी सीटों पर जीत हासिल हुई।

















