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छत्तीसगढ़ में धान की बालियों पर झुलसा रोग का खतरा, कृषि वैज्ञानिकों ने दी फफूंदनाशक छिड़काव की सलाहछत्तीसगढ़
2 नव॰ 2026, 5:38 am (1 घंटे पहले)· 0

छत्तीसगढ़ में धान की बालियों पर झुलसा रोग का खतरा, कृषि वैज्ञानिकों ने दी फफूंदनाशक छिड़काव की सलाह

छत्तीसगढ़ में बाली निकलने के नाजुक दौर में धान की फसल नेक ब्लास्ट रोग की चपेट में आ रही है, जिससे उत्पादन में 50 फीसदी तक गिरावट का अंदेशा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को तुरंत निगरानी और फफूंदनाशक के छिड़काव की सलाह दी है।

छत्तीसगढ़ में धान की खेती इस समय एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है। खेतों में कई किस्मों के पौधों से बालियां निकल रही हैं और उनके विकसित होने का दौर जारी है। इसी नाजुक समय में राज्य के खेतों में नेक ब्लास्ट, जिसे बोलचाल में धान के गले का झुलसा रोग भी कहा जाता है, तेजी से पैर पसार रहा है। यह बीमारी सीधे पौधे के उस हिस्से पर वार करती है जहां से बाली बाहर आती है, जिससे उत्पादन को भारी आघात पहुंच सकता है। यदि समय पर इस बीमारी की रोकथाम के उपाय नहीं किए गए, तो किसानों की महीनों की मेहनत और उपज को 50 प्रतिशत तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी खतरे को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से नियमित निगरानी बरतने और तत्काल सही कदम उठाने की अपील की है।

पौधों में नेक ब्लास्ट के प्रमुख लक्षण और पहचान

इस बीमारी की पहचान करना बहुत आसान है, बशर्ते किसान अपने खेतों का लगातार मुआयना करते रहें। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केआर साहू ने बताया कि नेक ब्लास्ट रोग होने पर धान की बाली जिस जोड़ या स्थान से तने से बाहर निकलती है, वहां भूरे रंग के धब्बे उभरने लगते हैं। वक्त बीतने के साथ यह प्रभावित हिस्सा धीरे-धीरे कमजोर और सड़ांध जैसा हो जाता है। तने के ऊपरी हिस्से में कमजोरी आ जाने के कारण कई बार धान की बालियां वजन नहीं संभाल पातीं और बीच से ही झुक जाती हैं। इसी विकृति और कमजोरी को कृषि विज्ञान में नेक ब्लास्ट अथवा गले का झुलसा कहा जाता है।

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फसल सुरक्षा के लिए फफूंदनाशक का सही छिड़काव

इस फफूंद जनित रोग पर काबू पाने के लिए रासायनिक नियंत्रण के तौर-तरीके भी साझा किए गए हैं। डॉ केआर साहू के अनुसार, इस रोग की समय रहते रोकथाम करने के लिए किसान टेबुकोनाजोल अथवा हेक्साकोनाजोल जैसे असरदार फफूंदनाशकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके प्रयोग की विधि बताते हुए उन्होंने एक ग्राम दवा को प्रति लीटर पानी के अनुपात में घोलकर छिड़कने का परामर्श दिया है। खेत में सही तरीके से दवा पहुंचाने के लिए एक एकड़ रकबे में कम से कम 150 लीटर पानी के घोल का इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि हर पौधे पर दवा का समुचित और समान छिड़काव सुनिश्चित हो सके। हालांकि दवा के चयन, उसकी सटीक मात्रा और छिड़काव की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले किसानों को उत्पाद के पैकेट पर दर्ज लेबल निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन अवश्य लेना चाहिए।

लापरवाही पड़ सकती है भारी, नियमित निगरानी जरूरी

छत्तीसगढ़ के कृषि परिदृश्य में यह समय इसलिए भी अत्यंत अहम माना जा रहा है क्योंकि विभिन्न किस्मों के खेतों में अभी भी बाली निकलने और परिपक्व होने का क्रम चल रहा है। इस दौरान पौधों को पोषण और सुरक्षा दोनों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। यदि किसान इस गंभीर अवस्था में बीमारी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो बालियों में दाने नहीं भर पाएंगे और फसल आधी बर्बाद हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें। जैसे ही बाली के ठीक नीचे भूरे चकत्ते, तने के ऊपरी हिस्से में कमजोरी या बालियों का असमय झुकना नजर आए, बिना देरी किए विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही उपचार शुरू कर दें, जिससे बड़े आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

सवाल-जवाब

धान में नेक ब्लास्ट या गले का झुलसा रोग क्या है?
यह एक फफूंद जनित बीमारी है, जिसमें धान की बाली जिस जोड़ से निकलती है वहां भूरे धब्बे पड़ जाते हैं और तना कमजोर होकर झुक जाता है।
नेक ब्लास्ट से धान की फसल को कितना नुकसान हो सकता है?
यदि समय पर इस रोग की पहचान और रोकथाम न की जाए, तो फसल के उत्पादन में 50 प्रतिशत तक का भारी नुकसान हो सकता है।
इस रोग के नियंत्रण के लिए कौन से फफूंदनाशक सुझाए गए हैं?
कृषि विशेषज्ञों ने इसकी रोकथाम के लिए टेबुकोनाजोल और हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों के उपयोग की सलाह दी है।
दवा का छिड़काव किस अनुपात और मात्रा में करना चाहिए?
एक ग्राम दवा को प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार करना चाहिए और प्रति एकड़ कम से कम 150 लीटर पानी का छिड़काव करना चाहिए।
खेत में नेक ब्लास्ट के क्या शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं?
बाली के निचले जोड़ पर भूरे रंग के धब्बे दिखते हैं, तने का ऊपरी हिस्सा कमजोर हो जाता है और कई बार बालियां नीचे की ओर झुक जाती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·11 मिनट पहले

दवा का छिड़काव करने से पहले मौसम का हाल देख लेना चाहिए, वरना बारिश हुई तो सारी मेहनत और पैसा दोनों बह जाएंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·33 मिनट पहले

छत्तीसगढ़ में धान की फसल पर फफूंद का यह हमला चिंताजनक है। ऐन वक्त पर 50% नुकसान का अंदेशा सीधे किसानों की कमर तोड़ सकता है, समय रहते फफूंदनाशक का छिड़काव बेहद जरूरी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·32 मिनट पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या सरकार की तरफ से किसानों को ये दवाएं समय पर मिल भी रही हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

किसानों के लिए यह समय बहुत संकट का है। छत्तीसगढ़ में धान की बालियों पर झुलसा रोग की खबर सचमुच डराने वाली है, उम्मीद है कृषि विभाग तुरंत मदद पहुँचाएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·54 मिनट पहले

रोहन जी, बात बिल्कुल सही है। मैं ऐसे कई मामलों की जाँच से जुड़ा रहा हूँ जहाँ समय पर सही फफूंदनाशक न मिलने से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं।

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