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स्वदेशी नेविगेशन को नई ताकत, भारतीय वैज्ञानिकों ने NVS-03 सैटेलाइट को सटीक कक्षा में पहुंचायाभारत
31 अक्तू॰ 2026, 7:38 am (1 घंटे पहले)· 1

स्वदेशी नेविगेशन को नई ताकत, भारतीय वैज्ञानिकों ने NVS-03 सैटेलाइट को सटीक कक्षा में पहुंचाया

भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने जीएसएलवी रॉकेट की मदद से 2232 किलोग्राम वजनी NVS-03 नेविगेशन उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी तय कक्षा में स्थापित कर दिया है। इस कामयाबी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसे तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम बताया।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन नेटवर्क को सशक्त बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने आधी रात के समय जीएसएलवी रॉकेट के जरिए NVS-03 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में रवाना किया, जिसने उपग्रह को बेहद सटीकता के साथ उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया। लगभग 2232 किलोग्राम वजनी यह अत्याधुनिक उपग्रह भारत की क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली को और अधिक सक्षम बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

जीएसएलवी रॉकेट से हुआ सफल प्रक्षेपण

इस महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन को GSLV-F18 रॉकेट के माध्यम से अंजाम दिया गया। भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता रखने वाले इस प्रक्षेपण यान ने उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद NVS-03 को तय ऊंचाई पर सुरक्षित पहुंचा दिया। इस उपग्रह के सक्रिय होने से देश के अपने नेविगेशन ढांचे, नाविक को नई मजबूती मिलेगी, जिससे नागरिकों और सुरक्षा एजेंसियों दोनों के लिए सटीक स्थिति निर्धारण और समय से जुड़ी सेवाएं और बेहतर हो सकेंगी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी वैज्ञानिकों को बधाई

उपग्रह के सटीक प्रक्षेपण और सफल तैनाती के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने अभियान में शामिल अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की तकनीकी दक्षता की सराहना करते हुए कहा कि यह मिशन भारत के स्वदेशी नेविगेशन तंत्र को नई गति प्रदान करेगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'यह मिशन हमारे स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, ‘नाविक’ को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।' उन्होंने आगे रेखांकित किया कि NVS-03 में शामिल उन्नत क्षमताएं महत्वपूर्ण तकनीकों में देश की आत्मनिर्भरता को विस्तार देंगी और ऐसी जनोपयोगी सेवाएं उपलब्ध कराएंगी जिनसे आम लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

सवाल-जवाब

NVS-03 उपग्रह को किस रॉकेट से लॉन्च किया गया?
इस उपग्रह को GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजा गया।
NVS-03 सैटेलाइट का कुल वजन कितना है?
इस उपग्रह का कुल वजन 2232 किलोग्राम है।
इस सैटेलाइट मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम नाविक को तकनीकी रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर क्या कहा?
उन्होंने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता और जनोपयोगी सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·6 मिनट पहले

स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता की यह रफ्तार शानदार है, खासकर जब ऊर्जा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में जीपीएस पर निर्भरता कम करनी हो।

Ravikash Gupta@ravikash·28 मिनट पहले

जब कुछ साल पहले बेंगलुरु में इसरो के एक सीनियर वैज्ञानिक से मिलने का मौका मिला था, तब उन्होंने बताया था कि देश की अपनी जीपीएस तकनीक बनाना कितना मुश्किल काम है। आज आधी रात को जीएसएलवी के जरिए NVS-03 को कक्षा में जाते देख उनकी वही बातें याद आ गईं। हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम वाकई बहुत आगे निकल आया है।

Meera Joshi@meera-joshi·27 मिनट पहले

रविकेश जी, उन वैज्ञानिक की मेहनत आज रंग लाई है। आधी रात का यह सफल प्रक्षेपण वाकई गर्व महसूस कराता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सटीक लोकेशन मिलना बहुत बड़ी बात है। पिछली बार जब मैं एक बड़ी आपराधिक जांच कवर कर रहा था, तब सही समय और सटीक नेविगेशन न होने से काफी परेशानी हुई थी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·47 मिनट पहले

करण जी, सही कहा आपने। संसद में भी कई बार सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर सटीक लोकेशन और स्वदेशी तकनीक की जरूरत पर जोर दिया गया है, इससे एजेंसियों का काम काफी आसान हो जाएगा।

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